ELECTION SPECIAL: मोक्ष की तलाश पर वोट से निराश

अयोध्या की महिलाएं
    • Author, नितिन श्रीवास्तव
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, अयोध्या से

उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के शोरगुल के बीच अयोध्या की एक गली में बात बाहर बहती नाली पर हो रही है.

जगह राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवादित स्थल से बस 500 मीटर दूर है और चर्चा महिलाएं कर रहीं हैं.

दरअसल, इस जगह को माई बाड़ा कहते हैं जिसका मतलब ऐसे घर या आश्रम जहाँ महिलाएं या तो मोक्ष प्राप्त करने के लिए आतीं हैं या अपने घरों से भाग कर.

महंत कृष्णा दासी
इमेज कैप्शन, माई बाड़े की महंत कृष्णा दासी 19 वर्ष पहले इलाहाबाद से आकर अयोध्या में रहने लगीं थी.

अयोध्या में इस तरह के कम से कम एक दर्जन माई बाड़े हैं जिनके भीतर एक मंदिर होता है और इसकी महंत एक महिला होती है.

इस माई बाड़े की महंत कृष्णा दासी हैं जो 19 वर्ष पहले इलाहाबाद से आकर यहाँ रहने लगीं थी.

कृष्णा दासी ने बताया, "यहाँ हर कोई दूसरे का ख़्याल रखता है. जब महिलाएं वृद्ध हो जातीं हैं तो वे जो बाहर जाकर भिक्षा मांग सकतीं हैं. सबके लिए खाना-प्रसाद जुटातीं हैं. कुछ अपने मन से यहाँ आतीं हैं और कुछ मजबूरी में."

जर्जर हाल में माई बाड़े

अयोध्या में राम जन्मभूमि न्यास की दीवार से सटे हुए तीन माई बाड़े हैं जो बेहद जर्जर हालत में हैं.

महिलाओ में आपस की चर्चा बाहर फैले कूड़े, गंदी नालियां और मदद की कमी पर टिकी रहती है.

कुसुम दासी का जन्म फैज़ाबाद में ही हुआ थे लेकिन वे बाहर रहने चली गईं थीं.

कुसुम दासी
इमेज कैप्शन, कुसुम दासी

कुसुम दासी कहती हैं, "मैं पिछले बीस वर्षों में दो बार यहाँ आई, फिर घर वापस गई और फिर भाग कर आई. मेरा मन यहीं लगता था और अयोध्या में तो मोक्ष की प्राप्ति होती है. लेकिन दुख है कि हम सब दो दशक पहले जिन हालातों में रहते थे आज भी वैसे ही हैं. चुनाव आते हैं, नेता लोग हमारे यहाँ भी आते हैं वोट मांगने. कहते हैं बहुत मदद करेंगे, लेकिन फिर अगले चुनाव में ही दिखते हैं."

'राजनेता नहीं लेते सुध'

फैज़ाबाद-अयोध्या विधानसभा सीट में फिलहाल समाजवादी पार्टी के विधायक हैं जो सरकार में मंत्री भी हैं.

इससे पहले सीट भाजपा के पास थी और तब यहाँ के सांसद कांग्रेसी थे.

लेकिन इन महिलाओं के मुताबिक़ किसी भी राजनीतिक दल ने कभी इस बात की सुध नहीं ली कि, "हमारे आश्रमों में चूल्हा कैसे जलता है, बूढी महिलाओं का इलाज कौन कराता है".

ज़्यादातर के पास वोटर आईडी है और वे सभी अपने मत का प्रयोग भी करती रही हैं.

कल्याणी दासी
इमेज कैप्शन, कल्याणी दासी

लेकिन 1996 में कुशीनगर से यहाँ आकर बस चुकीं कल्याणी दासी के मन में चुनाव को लेकर एक कसक है.

उन्होंने कहा, "वोट देने बिलकुल जाएंगे. लेकिन कौन जीतेगा और कौन हारेगा इससे हमें कोई मतलब नहीं. हमारी पूछ किसी के यहाँ नहीं है".

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