तेज बहादुर के वीडियो पर बीएसएफ ने क्या कहा

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- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
फ़ेसबुक पर वीडियो पोस्ट कर सुर्खियों में आए सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवान तेज बहादुर यादव की शिकायत पर बवाल मच गया है.
गृह मंत्री राजनाथ सिंह और गृह राज्य मंत्री किरेन रिजीजू के दख़ल और मीडिया-सोशल मीडिया में ये मामला छाने के बाद बीएसएफ़ ने अपना पक्ष रखा है.
सीमा सुरक्षा बल का जवाब, जवान पर लगे इल्ज़ाम
सीमा सुरक्षा बल के मुताबिक, ''तेज बहादुर यादव का अतीत परेशानी भरा रहा है. करियर के शुरुआती दौर में उन्हें नियमित काउंसलिंग की ज़रूरत पड़ती थी. बिना इजाज़त गायब रहना, लगातार शराब पीना, सीनियर अधिकारियों के साथ बुरा व्यवहार जैसे आरोप उन पर लगते रहे हैं. जवान के बैकग्राउंड को अलहदा रखते हुए एक डीआईजी रैंक के अधिकारी वीडियो मे बताए गए हालात की जांच करने लोकेशन पर पहुंच चुके है.''
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शिकायत करने वाले जवान तेज बहादुर यादव ने सोमवार रात अपना नंबर फ़ेसबुक पर डाला था.
मंगलवार सवेरे बीबीसी संवाददाता विनीत खरे से बातचीत में यादव ने कहा, ''मैं डेढ़ साल से इस जगह पर पोस्टड हूं और समर्थन जताने वाले कई लोगों के फ़ोन आ रहे हैं. एक आला अफ़सर का भी फ़ोन आया था. लेकिन हालात अभी वही हैं.''
इसके बाद से यादव का फ़ोन स्विच ऑफ़ है और अब ख़बर आई कि यादव का तबादला कर दिया जाएगा.
'जवान ने किया नियमों का उल्लंघन'
सीमा सुरक्षा बल के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा कि इस जवान ने जो कुछ बोला, जिन हालात में बोला, इस मामले की जांच की जाएगी.
पर क्या सोशल मीडिया पर शिकायत कर यादव ने नियमों का उल्लंघन किया है, इस सवाल पर प्रवक्ता का कहना था, ''जी हां, हमारी कुछ गाइडलाइंस हैं और इस मामले में उल्लंघन हुआ है.''
बीबीसी ने बीएसएफ़ के कुछ रिटायर्ड जवानों से बात की, ताकि यादव के दावों की पड़ताल की जा सके, लेकिन उनके बयानों से कुछ अलहदा जानकारी मिली.
साल 2010 में बीएसएफ़ से रिटायर सुभाष यादव बिहार के भागलपुर में रहते हैं. भारत-बांग्लादेश बॉर्डर और श्रीनगर मे तैनात रहे यादव का कहना है कि इस मामले को लेकर वो कुछ नहीं कह सकते, लेकिन उन्हें मिले खाने में कोई ख़राबी नहीं थी.
रिटायर्ड जवानों ने क्या कहा?
यादव ने कहा, ''हम लोगों के समय बहुत बढ़िया खाना मिलता था. अभी का नहीं बता सकते. लेकिन हम लोग सामान खुद खरीदते थे अपने मेस के लिए. घर में भी वैसा खाना नहीं मिलता था.''
खाने में क्या-क्या मिलता था, इसके जवाब में उन्होंने कहा, ''मौसम और जगह पर निर्भर करता है, लेकिन आम तौर पर सब कुछ मिल जाता था. दाल, सब्जी, मछली, मांस, अंडा, सब कुछ.''
सीमा सुरक्षा बल से रिटायर्ड दलीप सिंह कारगिल समेत कश्मीर, पंजाब और बंगाल में तैनात रह चुके हैं और खाने को लेकर उनका अनुभव भी ख़राब नहीं रहा.
जब उनसे पूछा गया कि खाने की क्वालिटी कैसी थी, तो उन्होंने कहा, ''बहुत बढ़िया थी. सेना से भी अच्छी.''
आउटपोस्ट का मतलब क्या?
क्या हेडक्वार्टर और आउटपोस्ट पर तैनाती के वक़्त खाने की क्वालिटी में अंतर हो सकता है, इस पर दलीप सिंह ने कहा, ''मैं हेडक्वार्टर पर तैनात रह चुका हूं और बॉर्डर पर भी. अभी का नहीं कह सकता, लेकिन तब खाना, दोनों जगह अच्छा था.''
उन्होंने कहा, ''आउटपोस्ट का मतलब है सरहद के क़रीब तैनाती. आउटपोस्ट पर आम तौर पर 8-10 आदमी रहते हैं. एक प्लाटून कमांडर, हवलदार, 5-7 जवान रहते हैं. खाना पोस्ट में ही बनता था. इतना फर्क ज़रूर था कि आउटपोस्ट पर कम लोगों के लिए कम खाना बनता था और है.''
BSF के पूर्व अधिकारी कह रहे हैं कि वो इस मामले के बारे में ख़ास रूप से टिप्पणी तो नहीं कर सकते, लेकिन आम तौर पर खाने और सुख-सुविधाओं को लेकर ऐसी शिकायत नहीं करते थे.

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सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक जनरल प्रकाश सिंह ने बीबीसी से कहा, ''मुझे रिटायर हुए वक़्त हो गया है. इस बीच काफ़ी बदलाव आए होंगे. ज़मीनी हालात पर मैं सटीक रूप से कुछ नहीं कह सकता, लेकिन परंपराएं तो बनी ही रहती हैं. ये शिकायत आई है, तो इसे मैं अपवाद मानूंगा. किसी भी संगठन में, जो बड़ा हो. कर्मियों की संख्या दो लाख से ज़्यादा हो. उसमें थोड़ी-बहुत गड़बड़ी हो सकती है.''
'मामले की जांच अब ज़रूरी'
उन्होंने आगे कहा, ''इससे भी इनकार नहीं किया जा सकता कि भ्रष्टाचार की वजह से ऐसा हुआ हो. अधिकारी ने राशन बेच दिया हो. कम खाना दिया गया हो. ऐसा हो सकता है. लेकिन इस पर विश्वास करने में दिक्कत हो रही है.''
सिंह ने कहा, ''लेकिन क्योंकि जवान ने वीडियो डाल दिया है. खाने की तस्वीर डाल दी है. मामला पब्लिक में है, ऐसे में इसकी जांच तो करनी ही होगी. तथ्य सही पाए गए तो ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कदम उठाने होंगे.''
जवान ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर नियमों का उल्लंघन किया है, उन्होंने कहा, ''नियमों का उल्लंघन है. जवाह को कमांडेंट से शिकायत करनी चाहिए थी. डीआईजी और आईजी से शिकायत की जा सकती थी. सवाल ये है कि उन्होंने इन चैनल का इस्तेमाल किया या नहीं किया. अगर हज़ारों जवान सोशन मीडिया पर इस तरह डालने लगे तो अनुशासन छिन्न-भिन्न हो जाएगा.''













