'भारत में बनी विदेशी शराब' पर पटना हाईकोर्ट ने पाबंदी हटाई

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पटना हाइकोर्ट ने विदेशी शराब की बिक्री और उपभोग पर लगी रोक को अवैध क़रार दिया है.
पटना से स्थानीय पत्रकार मनीश शांडिल्य का कहना है कि बिहार सरकार ने पांच अप्रैल को यह रोक लगाई गई थी.
विदेशी शराब निर्माताओं, रोस्टोरेंट और बार मालिकों के साथ-साथ कुछ लोगों ने सरकार के इस फ़ैसले को चुनौती दी थी. जिस पर सुनवाई पूरी करते हुए बीते दिनों कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रखा था.
सत्यवीर भारती पटना हाइकोर्ट के वकील हैं और सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली सभी याचिकाओं के वकील भी हैं.
उन्होंने अदालत के आज के फ़ैसले के बारे में बीबीसी को बताया, ''हाइकोर्ट ने विदेशी शराब के बिक्री और उपभोग पर रोक लगाने वाली संबंधी राज्य सरकार के नोटिफिकेशन और उत्पाद क़ानून की जिन धाराओं के तहत यह प्रतिबंध लागू किया था, उसे गैरक़ानूनी क़रार दिया है.''
इस फ़ैसले के बाद सूबे में अब विदेशी शराब पर लगी रोक समाप्त हो गई है. हालांकि सूबे में देसी शराब पर लगे प्रतिबंध पर आज के फ़ैसले का कोई असर नहीं पड़ेगा.
हालांकि समाचार एजेंसी पीटीआई ने पहले कहा था कि हाईकोर्ट ने बिहार सरकार के ज़रिये लाए गए शराबबंदी क़ानून को ख़ारिज कर दिया है.
नितीश सरकार ने इस बार बिहार का मुख्यमंत्री बनने जो बड़े फ़ैसले लिए थे उनमें बिहार में शराबबंदी एक अहम फैसलों में से एक था.
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार शुक्रवार को पटना उच्च न्यायालय ने कानून के प्रावधानों पर सवाल उठाते हुए शराबबंदी क़ानून को गैरक़ानूनी क़रार दिया है.
बिहार के मुख्यमंत्री ने इसी वर्ष अप्रैल में बिहार में पूर्ण रूप से राज्य में शराबबंदी लागू कर दिया था.
लेकिन शुरुआती दिनों में बिहार में एक अप्रैल से शराबबंदी का पहला चरण शुरु हुआ था. इसके तहत गांवों में पूर्ण रूप से शराब की बिक्री बंद कर दी गई थी.

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जबकि शहरी क्षेत्रों के चुनिंदा इलाकों की सरकारी दुकानों में सिर्फ़ विदेशी शराब बेची जा रही थी.
बिहार सरकार ने यह भी कहा था कि सूबे में सेना के कंटोनमेंट को छोड़कर होटल, बार, रेस्टोरेंट जैसी जगहों पर भी शराब बिक्री पूरी तरह से बंद कर दी गई थी.
सरकार के इस फ़ैसले के साथ ही बिहार उन राज्यों की सूची (गुजरात, केरल) में शामिल हो गया था जहाँ शराब बंदी लागू थी.
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