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दुश्वारियों से भरा है ये फ़िल्मी सफ़र: प्रियंका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कभी विश्व सुंदरी का ताज पहनने वाली अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा अब बॉलीवुड की टॉप अभिनेत्री हैं. अभिनय के अलावा प्रियंका को गाने का भी बेहद शौक है और उनकी तमन्ना है कि किसी रोज़ वे फ़िल्म में गाना गाएँ. हाल ही में प्रियंका लंदन आईं तो उनके चाहनेवाले एक झलक देखने के लिए घंटों इंतज़ार करते रहे. लेकिन प्रियंका कहती हैं कि इस ग्लैमर और चमक-दमक के पीछे की ज़िंदगी दुश्वारियों से भरी है. मिसाल यही कि तपते सर और बुख़ार के बावजूद भी प्रियंका ने अपने होटल में मौजूद एक-एक पत्रकार से लंबी बातचीत की या कहें करनी पड़ी. वर्ष 2006 में डॉन और कृष जैसी फ़िल्में देने के बाद आप पिछले साल लगभग पर्दे से ग़ायब ही हो गईं. हाँ लेकिन इस साल मेरी छह फ़िल्में हैं और हम लोग जुलाई में आ चुके हैं. लव स्टोरी 2050 रिलीज़ हुई है. इसके बाद आएगी गॉड तुसीं ग्रेट हो और द्रोणा. फिर फ़ैशन और दोस्ताना की बारी है. इस बीच एक फ़िल्म चमकू भी आएगी. लव स्टोरी 2050 अलग तरह की फ़िल्म है. आपने डॉन में एक्शन किया था, अभिषेक के साथ आने वाली फ़िल्म द्रोणा में भी एक्शन कर रही हैं. प्रियंका बॉलीवुड की एक्शन गर्ल हो गई हैं.ऐसे रोल हिंदी फ़िल्मों में हीरोइनों को कम ही मिलते हैं. बहुत उत्साहित हो जाती हूँ सोचकर कि लोग मुझे एक्शन रोल में पसंद कर रहे हैं और मैं अच्छे से कर पाती हूँ. मुझे पहले कभी नहीं लगा था कि मैं ऐसा कर पाउँगी लेकिन देखने के बाद लगा कि हाँ लड़कियाँ भी ऐसा कर सकती हैं. सेलिब्रिटी होने के कई फ़ायदे हैं- लोगों का प्यार मिलता है, शोहरत मिलती है,ग्लैमरस लाइफ़स्टाइल. लेकिन क्या इसका दूसरा पहलू भी है कोई नुकसान भी है. अच्छी चीज़ें तो हैं लेकिन बहुत मुश्किल काम है. लोग सोचते होंगे कि ग्लैमर और ख़ुशियां भरी रहती हैं हमारी ज़िंदगी में पर ऐसा नहीं है. 104 डिग्री बुख़ार में भी शूटिंग करनी पड़ती है क्योंकि आप शूट कैंसल नहीं कर सकते. मेरी तबीयत ख़राब है लेकिन मैं 12 घंटों के लिए लंदन आई हूँ अपनी फ़िल्म के लिए. कोई बहाना नहीं होता. आपको हमेशा अच्छा लगना पड़ता है. भले ही सर तप रहा हो लेकिन मुस्कुराते रहना होगा और 100 इंटरव्यू देने होंगे. बहुत मुश्किल है. आपकी निजी ज़िंदगी नहीं रहती. माँ-बाप के साथ बैठकर खाना खाने का वक़्त नहीं होता. लेकिन इस सब की भरपाई हो जाती है जब लोग आपको इतना प्यार करते हैं, आप उनके फ़ैनमेल पढ़ते हैं. मुझे अपना काम पसंद है और लोगों का प्यार मुझमें उत्साह भर देता है. आपने कहा कि निजी ज़िंदगी नहीं रहती. लोगों की नज़र हमेशा आप पर रहती है. कई लोगों से नाम जोड़ा जाता है, इन सब बातों पर कैसे रिएक्ट करती हैं.
अफ़वाहें फ़िल्म इंडस्ट्री का हिस्सा हैं. अगर मैं डॉक्टर होती तो शायद अस्पताल का स्टाफ़ बात करता कि अच्छा किसी एक डॉक्टर से ज़्यादा बात कर रही हूँ. आपके प्रोफ़ेशन में भी ऐसा होता होगा. हमारे प्रोफ़ेशन में सारी दुनिया आपके बारे में बात करती है, आपके यहाँ सिर्फ़ ऑफ़िस में बातें होती होंगी. इसको हैंडल करने का यही तरीका है कि आप इसे नज़रअंदाज़ करें. अगर आप जवाब देना चाहें तो दे दीजिए. मैं अपनी निजता का ध्यान रखती हूँ. मेरी ज़िदंगी मेरी अपनी है और मैं किसी का मोहताज बनकर नहीं जीना चाहती. मैं अपने फ़ैन्स से प्यार करती हूँ,मुझे लगता कि जितना उन्हें बताना चाहिए उतना मैं बताती हूँ. अगर मैं आपको अपना 90 प्रतिशत दे रही हूँ तो 10 प्रतिशत मेरा हक़ बनता है कि मैं अपने पास रखूँ. क्या आप अपने समकालीन अभिनेताओं-अभिनेत्रियों की फि़ल्में देखती हैं. कभी आपको लगा हो कि काश ये रोल मैं कर पाती. अभी तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि मैने कोई रोल करने से मना कर दिया हो और बाद में मुझे लगा हो कि मैने क्यों इनकार किया. मैं अपने करियर में ही इतनी मसरुफ़ हूँ कि मुझे वक़्त नहीं मिलता ये जानने का बाकी लोग क्या कर रहे हैं. हाँ मैं ये ज़रूर जानती हूँ कि बाकी लोग क्या कर रहे हैं. लेकिन मैं खुशनसीब हूँ कि मुझे अच्छी-अच्छी फ़िल्में मिल रही हैं. मुझे सोचने की ज़रुरत नहीं पड़ती कि किसने क्या किया और काश मैं वो रोल कर सकती. ऐसा सोचने पर असुरक्षा की भावना आ जाती है और इंसान का दिमाग़ खराब हो जाता है. एक्टिंग से अलग अगर पूछूँ तो आप अच्छा गाती भी हैं. अगर मुझे ठीक से याद है तो आपने तमिल फ़िल्म में गाया भी है. हिंदी फ़िल्म में गाने के बारे में सोचा है? गाना तो मुझे है, गाने का शौक भी बहुत है. कहीं किसी रोज़ गाना चाहती हूँ. अभी तक ऐसा गाना नहीं आया है जब मुझे लगा हो इसमें अपनी आवाज़ देनी चाहिए. लव स्टोरी 2050 आपके लिए क्यों ख़ास है और आपका क्या रोल है इसमें.
ये मूल रूप से एक प्रेम कहानी है जो 2008 से 2050 तक जाती है, इसलिए इसमें साइंस फ़िक्शन भी है. लोग टाइम मशीन में बैठकर 2050 में जाते हैं. मेरा फ़िल्म में डबल रोल है. एक लड़की 2008 में रहती है, सॉफ़्ट किरदार है, डायरी लिखती है, हल्के रंग पसंद करती है. दूसरी 2050 में रहती है, बोल्ड है. इस किरदार के लिए मुझे अपने बाल लाल रंग में रंगने पड़े थे. मेरे पापा ने देखा था तो तीन दिन तक बात नहीं की मुझसे. पर फ़िल्म देखकर उन्हें समझ में आया कि मैने ऐसा क्यों किया. ये किरदार लोगों को पसंद भी आया है. लव स्टोरी 2050 में लोग टाइम मशीन में बैठकर 2050 में जाते हैं. आपको अगर टाइम मशीन में बैठना हो कहाँ जाना चाहेंगी. टाइम मशीन होती तो मैं तीन साल पीछे जाती. तीन साल पहले मेरे पापा की तबीयत बहुत ख़राब हो गई थी, डॉक्टरों ने बताया था कि उन्हें कैंसर है. सर्जरी काफ़ी जटिल रही. पापा दो साल तक अस्पताल में थे. कैंसर को तो मैं टाल नहीं पाती क्योंकि वो शायद किस्मत में ही था लेकि अगर मेरे पास टाइम मशीन होती तो उन जटिलताएँ को हटा देती जिसकी वजह से पापा मौत के इतने करीब आ गए थे. आपने नए हीरो हरमन के साथ काम किया है. उनके साथ काम करना कैसा रहा. हरमन करीब 15 सालों से फ़िल्म इंडस्ट्री में है. उनके पापा फ़िल्मकार हैं. हरमन ने 21 साल की उम्र में अपनी फ़िल्म बनाई थी. मैं तो स्कूल में पढ़ती थी और किसी ने फ़िल्मों में डाल दिया. मुझे शायद ऑन स्क्रीन अनुभव ज़्यादा होगा लेकिन कैमरे के पीछे हरमन का अनुभव ज़्यादा है. हम दोनों ने एक दूसरे से काफ़ी सीखा. गिव एंड टेक वाला रिश्ता था. |
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