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अलविदा कह गए फ़ैशन सम्राट सें लरॉ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीसवीं सदी के महानतम फ़ैशन डिज़ाइनर माने जाने वाले सें ईव्ज़ सें लरॉ का 71 वर्ष की उम्र में पेरिस में निधन हो गया. वाईएसएल के नाम से मशहूर इस महान फ़ैशन डिज़ाइनर की प्रतिभा का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 21 वर्ष की उम्र में ही वो विश्व प्रसिद्ध ‘हाउस ऑफ़ डियोर’ के मुख्य डिज़ाइनर बन गए थे. इसके बाद अपने काम और प्रयोगों से लरॉ ने फ़ैशन उद्योग का चेहरा ही बदल दिया. उन्होंने ऐसे कपड़ों को डिज़ाइन किया जिन्होंने समाज में महिलाओं की बदलती भूमिका को प्रतिबिंबित किया. यह कपड़े व्यक्तिगत रूप से, सैक्स के नज़रिए से और कार्य स्थल पर ज़्यादा आत्मविश्वास दर्शाने वाले होते थे. इधर उम्र के ढलते पड़ाव में फ़ैशन उद्योग से उन्होंने 2002 में ही किनारा कर लिया था और काफ़ी समय तक वो बीमार रहे. फ़्रांस की राजधानी पेरिस में रविवार को द पिएरे बर्ज-सें लरॉ फ़ाउंडेशन ने जानकारी दी कि उनका निधन हो गया. इस डिज़ाइनर के औद्योगिक और व्यक्तिगत पार्टनर पिएरे बर्ज ने सिर्फ़ इतना ही कहा कि एक लंबी बीमारी के बाद अपने घर में उनका निधन हो गया. उन्होंने इसके बारे में ज़्यादा विस्तार से नहीं बताया. महिला बनीं प्रेरणा एक बार सें ईव्ज़ सें लरॉ ने कहा था, "मैंने अपना स्टाइल महिलाओं के माध्यम से पाया." उन्होंने कहा, "चूंकि मैं महिला के शरीर को अपने काम से चित्रित करता हूँ इसीलिए मेरे काम में शक्ति और जीवन दिखाई देता है."
बीबीसी की कला संवाददाता रज़िया इकबाल कहती हैं, "महिलाएं जो पहनती हैं, उन्हें जैकेट, ट्राउज़र सूट और स्वेटर इत्यादि से हमेशा के लिए बदल दिया गया है." सें लरॉ महान प्रवर्तक थे जिन्होंने तुरंत पहनने योग्य कपड़ों को लोकप्रिय बनाकर फ़ैशन उद्योग को नया जीवन दिया. ‘ब्रिटिश वोग’ की संपादक अलेक्ज़ेंद्रा शुल्मैन ने कहा कि उन्होंने फ़ैशन को जनतांत्रिक बनाने में मदद की है. इससे पहले सिर्फ़ अमीरों के लिए फ़ैशन प्रदर्शनी लगाई जाती थीं. उनके अनुसार, "लरॉ ने ही फ़ैशन को आम लोगों तक पहुँचाया. वे युवा और फुर्तीले थे. पॉप स्टार उनके साथ लगे रहते थे और युवा पीढ़ी उनसे संबद्ध रहती थी." उनके साथ 40 साल तक काम करने वाले प्रसिद्ध फ़्रेंच एम्ब्रॉयडरर फ़्राँसुआँ लेसेज ने कहा, "उनके निधन की ख़बर से मैं तबाह हो गया हूँ." उन्होंने कहा, "मैंने ऐसा कोई डिज़ाइनर नहीं देखा जो किसी भी काम के लिए इतने सारे आइडिया दे सके." बीमारी लरॉ का जन्म अल्जीरिया के ओरान शहर में तब हुआ था जब उत्तरी अफ़्रीका एक फ़्रेंच कालोनी था. मात्र 18 साल की उम्र में उन्होंने ड्रेस डिज़ाइनिंग प्रतियोगिता जीती थी जिससे वो क्रिश्चियन डियोर के संज्ञान में आए. उनका पहला कलेक्शन बेहतर परिधानों के साथ सनसनी का कारण बन गया था और उनकी बनाई जैकेटों ने 1950 के फ़ैशन को रूप दिया. तीन साल के अंदर, महान डिज़ाइनर डियोर का निधन हो गया और सें लरॉ ने उनका स्थान लिया. उनके बनाए हुए कपड़े विशिष्ट और सेक्सी माने जाते थे जो समाज में महिलाओं की आत्मविश्वास से भरी भूमिका का प्रतिबिंब थे. उन्होंने अपने ट्राउज़र सूट, गहरे रंगों वाले एथनिक प्रिंटों और कला की दुनिया से प्रेरित अपने डिज़ाइनों से एक तूफ़ान की तरह फ़ैशन की दुनिया को अपनी मुट्ठी में कर लिया था. अपनी समलैंगिकता की वजह से स्कूलब्वॉय के ताने सहते सें लरॉ अपनी ज़्यादातर जिंदगी मानसिक और शारीरिक बीमारियों से जूझते रहे और पब्लिक में बहुत कम नज़र आए. कला संवाददाता रज़िया इकबाल कहती हैं, "उनका असर ख़त्म होते-होते बरसों लग जाएंगे. फ़्रांस ने न सिर्फ़ अपना महान फ़ैशन डिज़ाइनर बल्कि सांस्कृतिक प्रतिनिधि भी खो दिया है." |
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