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बुधवार, 05 अप्रैल, 2006 को 16:47 GMT तक के समाचार
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शुरू हुआ 'इंडिया फ़ैशन वीक'

फ़ैशन
समारोह में क़रीब 80 डिज़ाइनर हिस्सा ले रहे हैं
तेज़ आवाज़ में बजते संगीत, तरह-तरह के परिधानों में लिपटे मॉडलों, पत्रकारों से घिरे डिज़ाइनरों और रैंप पर नज़रें गड़ाए बैठे दर्शकों के साथ भारत का सबसे बड़ा फ़ैशन समारोह कहा जाने वाला, 'इंडिया फ़ैशन वीक' बुधवार से राजधानी दिल्ली में शुरू हो गया है.

अगले पाँच दिनों यानी नौ अप्रैल तक चलने वाले इस फ़ैशन के कुंभ में डिज़ाइनर अपने परिधानों का प्रदर्शन कर रहे हैं.

समारोह स्थल है दिल्ली का पाँच सितारा होटल, 'द ग्रांड' जहाँ नई डिज़ाइनों के वस्त्रों में कुछ खुले तो कुछ ढके मॉडल रैंप पर सधी चाल चल रहे हैं.

इस समारोह में 80 से ज़्यादा डिज़ाइनर हिस्सा ले रहे हैं और क़रीब इतने ही मॉडलिंग की दुनिया के चर्चित चेहरे.

इनमें रितु कुमार, रोहित बल, मनीष अरोड़ा, तरुण ताहिलियानी, मालिनी रमानी, जतिन कोचर जैसे जाने-माने फ़ैशन डिज़ाइनर भी शामिल हैं.

फ़ैशन
लैक्में फ़ैशन वीक में यह मॉडल कपड़े खुल जाने के कारण विवाद का विषय बनी

समारोह के पहले दिन ही पिछले दिनों मॉडल जेसिका लाल के हत्याकांड की वजह से चर्चा में रही फ़ैशन डिज़ाइनर मालिनी रमानी ने, अपने डिज़ाइन किए हुए कपड़ों को लेकर ख़ासी प्रशंसा बटोरी.

लेकिन सबकी निगाहें टिकी थीं मनीष अरोड़ा और रोहित बल के परिधानों पर.

आयोजन का विवाद

भारतीय फ़ैशन डिज़ाइन परिषद का यह छठा आयोजन है.

इससे पहले इस आयोजन को 'लैक्मे इंडिया फ़ैशन वीक' के नाम से जाना जाता था पर पिछले वर्ष ही 'लैक्मे' ने इस समारोह से ख़ुद को अलग कर लिया और पिछले हफ़्ते ही मुंबई में 'लैक्मे' ने अलग से एक फ़ैशन सप्ताह का आयोजन भी किया.

हालांकि इंडिया फ़ैशन वीक को लैक्मे के जाने के बाद 'विल्स लाइफ़ स्टाइल' और 'किंगफ़िशर' जैसे दो बड़े प्रायोजक मिल गए हैं.

 हमारे पास इस समारोह में प्रदर्शन करने के लिए जिन लोगों के आवेदन आए थे, उनकी सूची बहुत लंबी थी. ऐसे में हमने उन लोगों को भी इस बार अपना काम दिखाने का मौका दिया है, जिन्हें ब़ाकी जगहों पर अवसर नहीं मिल सका है
रति विनय झा, अध्यक्ष-भारतीय फ़ैशन डिज़ाइन परिषद

समारोह में इस बार 26 नए डिज़ाइनरों को भी मौक़ा दिया गया है जबकि पिछले आयोजनों में आने वाले कुछ डिज़ाइनर इस बार शो नहीं कर रहे हैं.

हमने इसकी वजह पूछी भारतीय फ़ैशन डिज़ाइन परिषद की अध्यक्ष रति विनय झा से. उन्होंने बताया, "हमारे पास इस समारोह में प्रदर्शन करने के लिए जिन लोगों के आवेदन आए थे, उनकी सूची बहुत लंबी थी. ऐसे में हमने उन लोगों को भी इस बार अपना काम दिखाने का मौका दिया है, जिन्हें बाकी जगहों पर अवसर नहीं मिल सका है."

सवाल

पेज थ्री के रास्ते तमाम क्षेत्रों में अपना दखल बना रहे इन डिज़ाइनरों को लेकर एक सवाल लगातार उठता रहा है और वह है इनकी रचनात्मकता और व्यवहारिकता का.

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भारतीय डिज़ाइनरों की मौलिकता पर सवाल उठते रहे हैं

विशेषज्ञों की राय तो यहाँ तक है कि कई बार भारतीय डिज़ाइनरों का काम अपनी और भारतीयता की पहचान कम, पश्चिम की नक़ल ज़्यादा समझ आता है.

हालांकि समारोह में आए डिज़ाइनर इससे इनकार करते हैं.

डिज़ाइनर जतिन कोचर ने बीबीसी को बताया, "हम जो पोशाकें बना रहे हैं, वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़रीददारों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं. हमें विश्व स्तर पर पहचान मिली है और लोग भारतीय डिज़ाइनरों के काम को दुनियाभर में पसंद कर रहे हैं."

 हम जो पोशाकें बना रहे हैं, वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ख़रीददारों को ध्यान में रखकर तैयार की गई हैं. हमें विश्व स्तर पर पहचान मिली है और लोग भारतीय डिज़ाइनरों के काम को दुनियाभर में में पसंद कर रहे हैं
जतिन कोचर, डिज़ाइनर

बहरहाल, तमाम नई और अलग किस्म की पोशाकों के साथ इस समारोह के आयोजकों को आशा है कि समारोह आख़िरी दिन तक अच्छा कारोबार कर लेगा.

आयोजकों के मुताबिक इस बार क़रीब डेढ़ सौ अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय ख़रीदार इस समारोह में पहुँचने वाले हैं.

देखना यह है कि कभी दुनियाभर में अपने कपड़ों के लिए जाने जाने वाले भारत की आज की डिज़ाइनर पीढ़ी अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में क्या अपनी पहचान बना पाएगी.

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