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'बॉलीवुड का फ़ैशन बिल्कुल पसंद नहीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
फ़िल्म, कला, उद्योग- भारत की मौजूदगी इनदिनों हर ओर देखी जा सकती है.फ़ैशन भी इसमें पीछे नहीं है. भारत के फ़ैशन डिज़ाइनर मनीष अरोड़ा पहले भारतीय हैं जिन्हें प्रतिष्ठित पेरिस फ़ैशन शो के लिए आमंत्रित किया गया है. लंदन में सात सितंबर को उनके डिज़ाइनों की विशेष प्रदर्शनी लग रही है. बीबीसी ने मनीष अरोड़ा से ख़ास बातचीत की. बातचीत में मनीष ने कहा कि फ़ैशन सिर्फ़ एलीट वर्ग के लिए नहीं सबके लिए है. वहीं बॉलीवुड के फ़ैशन से वे ख़ासे ख़फ़ा नज़र आए हालांकि किसी दिन बॉलीवुड फ़िल्म बनाने की हसरत ज़रूर उनके मन में है. पेश है बीबीसी से उनकी बातचीत के मुख्य अंश: आप पहले भारतीय हैं जो पेरिस जैसे प्रतिष्ठित फ़ैशन शो में आमंत्रित किए गए हैं. बहुत ही गर्व की बात है आपके लिए. गर्व की बात तो है ही पर मैं थोड़ा नर्वस भी हूँ क्योंकि बहुत ज़िम्मेदारी है मेरे ऊपर- पहला भारतीय डिज़ाइनर हूँ यहाँ. सब लोगों की नज़र मुझ पर होगी. मैं वहीं करुँगा जो मेरे दिमाग़ में है. आपकी गिनती भारत के सबसे जाने-माने फ़ैशन डिज़ाइनरों में होती है. आप की नज़र में फ़ैशन क्या है- कैसे परिभाषित करेंगे फ़ैशन को फ़ैशन मेरे लिए तो अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है- अपने विचार व्यक्त करने की आज़ादी. फ़ैशन के ज़रिए मैने अपनी बात लोगों तक पहुँचाई है- भारत में और बाहर भी. वैसे मैं फ़ैशन डिज़ाइनर नहीं होता तो फ़िल्में बनाता. जो भी करता, वो एक तरीका होता वो सब चीज़ें ज़ाहिर करने का जो मेरे दिल-दिमाग़ में है. फ़ैशन को लेकर एक बहस हमेशा होती रहती है- फ़ैशन वो है जो एक ख़ास वर्ग के लोग-एलीट लोग ही पहनते हैं, और बेहद मंहगे हैं या फिर वो जो आम लोग भी पहन सकते हैं.
बड़े-बड़े ब्रैंड को ही लीजिए..... फ़ैशन को अगर देखा जाए तो वो शुरू एलीट वर्ग से ही होता है और फिर वो सब लोगों के पास जाता है. मिसाल के तौर पर किसी भी बड़े डिज़ाइनर को देखेंगे-उसका एक लेबल होगा बड़े-बड़े हॉलीवुड सितारों के लिए और एक लेबल होगा आम लोगों के लिए. यानी आप मानते हैं कि आम लोगों की जो उम्मीदें हैं, वो जो चाहते हैं वो सब फ़ैशन में झलकना चाहिए. बिल्कुल. फ़ैशन सिर्फ़ एलीट वर्ग, किसी ख़ास वर्ग के लिए नहीं है बल्कि सबके लिए है. फ़ैशन डिज़ाइनिंग काफ़ी सृजनशील काम है. आप इसके लिए प्रेरणा कहाँ से लेते हैं. जैसे आपके एक शो में हमने देखा कि जीव-जतुंओं और प्रकृति को अपने विषय बनाया था जबकि दूसरे शो में टाइम एंड स्पेस को दर्शाया. प्रेरणा तो कहीं से भी मिल जाती है. भारत हमेशा मेरे लिए प्रेरणा का एक स्रोत रहा है. मैं कोई भी शो करूँ, भारत उसमें हमेशा झलकता है. अच्छा आप कुछ भी डिज़ाइन करते हैं, तो कितना वक़्त लगता है किसी एक चीज़, एक क्रिएशन पर. समय बताना बड़ा मुश्किल है कि एक डिज़ाइन पर कितना वक़्त लगता है. हाँ पूरी की पूरी क्लेकशन बनाने के लिए कम से कम तीन से चार महीने तो लग ही जाते हैं. आप तो विदेशों में भी फ़ैशन शो कर चुके हैं. भारत के फ़ैशन उद्योग और अंतरराष्ट्रीय फ़ैशन उद्योग दोनों में क्या फ़र्क़ देखा है आपने. भारत में फ़ैशन पर आज भी शादी-ब्याह का कब्ज़ा है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चीज़ें बहुत अलग से ढंग से चलती हैं. कोई ऐसी हस्ती जिसके लिए आप कपड़े डिज़ाइन करना चाहते हैं या कोई ड्रीम पर्सनेल्टी जिसके लिए आप डिज़ाइन कर चुके हों. मैने हाल ही में स्टीव टाइलर के लिए कपड़े डिज़ाइन किए हैं जो अमरीकी रॉक बैंड एरोस्मिथ के लीड सिंगर हैं. उसको लेकर मैं काफ़ी उत्साहित हूँ. आपने शुरु में कहा कि अगर आप फ़ैशन डिज़ाइनर नहीं होते तो फ़िल्म बनाते. भविष्य में कभी फ़िल्म बनाएँगे. बॉलीवुड फ़िल्म तो मैं ज़रूर बनाऊँगा लेकिन फ़िल्म के लिए कपड़े नहीं डिज़ाइन करूँगा. मुझे वो फ़ैशन बिल्कुल पसंद नहीं है जो बॉलीवुड में है. मैं बॉलीवुड के लिए कपड़े तो शायद ही बनाऊँ पर मैं किसी दिन बॉलीवुड फ़िल्म ज़रूर बनाना चाहूँगा. अच्छा फ़ैशन उद्योग के लिए जिस तरह का आधारभूत ढाँचा, रिटेलिंग चाहिए आपको लगता है भारत में वो सब कुछ है. मुझे लगता है कि हमारे पास वो क्षमता है. आठ-दस सालों में विश्व स्तर पर बहुत सारे भारतीय डिज़ाइनर होंगे. |
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