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बच्चों के लिए बिग बी का तोहफ़ा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बॉलीवुड के बिग बी इस साल अपने छोटे दर्शकों को लुभाना चाहते हैं. भूतनाथ में जहाँ अमिताभ बच्चन भूत बनकर बच्चों के सामने हैं तो आने वाली फ़िल्म अलादीन में जिन्न बनकर बच्चों को लुभाएँगे. वे कहते हैं कि ये फ़िल्में बच्चों के लिए उनका तोहफ़ा है. अमिताभ ने पहले भी कई बाल कलाकारों के साथ काम किया है. चीनी कम, ब्लैक, दो अंजाने. फिर मिस्टर नटवरलाल में बच्चों के लिए गाया वो गाना कौन भूल सकता है- 'मेरे पास आओ मेरे दोस्तो'. बड़े-बड़े अभिनेताओं के साथ काम कर चुके अमिताभ बच्चन मानते हैं कि फ़िल्मों में बच्चों के साथ काम करना अपने आप में अलग ही अनुभव होता है और ये सब उन्हें अपने बचपन के दिन याद दिलाता है. बीबीसी हिंदी डॉट कॉम से बातचीत में बच्चों से जुड़े ऐसे ही कुछ सवालों के जवाब दिए अमिताभ बच्चन ने. फ़िल्मों में किसी सुपरस्टार के साथ या बच्चों में से किसी एक के साथ काम करना हो तो किसे चुनेंगे? बेशक बच्चों के साथ काम करना पसंद करुँगा. बच्चे कमाल के होते हैं. वे ख़ुला दिमाग़ लेकर आते हैं जैसे कोरा कागज़ हो- अतीत का कोई बोझ नहीं होता उनपर. अगर आप बच्चों के साथ काम कर रहें तो हमेशा हाई अलर्ट पर रहना पड़ता है. बच्चों को आप कहीं भी देंखेगी तो पाएँगी कि उनमें एक नई धारा होती है-चाहे बात करने का ढंग हो या स्वभाव हो. उनके साथ काम करने का अपना ही मज़ा है. बच्चों के साथ काम करने अलग किस्म की प्रेरणा मिलती है क्योंकि उनका स्वभाव बहुत ही नैचुरल होता है. हम कलाकार कोशिश करते रहते हैं कि कि कैसे कैमरे के सामने स्वाभाविक दिखें लेकिन बच्चे सेट पर आते हैं और बड़ी आसानी से सहजता से शॉट देकर चले जाते हैं. भूतनाथ में मेरे साथ अमन हैं. उनके साथ मैं पहले भी कई फ़िल्मों और विज्ञापनों में काम कर चुका हूँ और हमारी जान-पहचान अच्छी थी. अमन बड़ा होनहार बच्चा है. भूतनाथ में भूत का किरदार निभाने की चुनौती भूतनाथ का किरदार निभाने में चुनौती यही थी कि कोई इसके लिए रेफ़रेंस प्वाइंट नहीं था- भूत को देखा तो नहीं है कि वो कैसा होता है. इस रोल के लिए शोध करना मुश्किल काम था. वैसे भूतनाथ का भूत आपको डराता नहीं है. ये एक बच्चे के साथ रिश्ते की कहानी है जो भूत को अपने पोते की याद दिलाता है. असल ज़िंदगी में अपने घर में पोते-पोती के साथ कैसा रिश्ता रखना चाहेंगे और उन्हें कैसी फ़िल्में दिखाना पसंद करेंगे?
मेरे दादा जी का निधन पहले ही चुका था और जब मैं एक या दो साल का था तो नाना जी चल बसे. इसलिए उनके साथ तो मेरी कोई यादें नहीं है. इसलिए कभी-कभी मुश्किल होता है मेरे लिए तय करना कि मेरा अपने पोते-पोतियाँ के साथ कैसा रिश्ता होगा. मैं कोशिश करता हूँ कि अपने नाती-नातिन को सही सलाह दूँ. लेकिन ये ज़रूरी नहीं कि आज के बच्चे इस सलाह से सहमत हों. मैं जब छोटा था तो माहौल दूसरा था. आप कौन सी फ़िल्म देख सकते हैं और कौन सी नहीं ये बड़े तय करते थे. मैने पहली हिंदी फ़िल्म जो देखी थी वो थी जागृति. मैं शायद अपने पोते-पोती या नाती-नातिन को ऐसी फ़िल्में दिखाना पसंद करूँगा जिसमें कॉमेडी हो, जिसमें खेल-कूद हो या फिर पौराणिक कथाओं पर आधारित फ़िल्में हों. लेकिन मैं ये फ़ैसला इन बच्चों के माता-पिता पर छोड़ना पसंद करूँगा. फ़िल्में केवल मनोरंजन का साधन या संदेश देने का ज़रिया भी? वैसे तो फ़िल्म बनावटी होती है लेकिन इसी में अगर कोई अच्छी सीख दे दी जाए तो अच्छा लगता है. मनोरंजन के साथ-साथ कुछ सीखने को भी मिल जाए तो इससे अच्छा क्या हो सकता है. दरअसल ये पुरानी प्रथा है. औरों का तो पता नहीं लेकिन हमारे यहाँ तो बाबू जी का आदेश होता था कि दिन में एक वक़्त ऐसा होगा जब सब लोग एक साथ भोजन करेंगे और डाइनिंग टेबल पर साहित्य, कला, कविता और आम लोगों से जुड़े मुद्दे पर बातचीत होगी. जब मैने ‘कौन बनेगा करोड़पति’ करना शुरु किया था तो उसमें भी मैने ये विषय डाला था कि कार्यक्रम के शुरु में जीवन के बारे में या समाज के बारे में कुछ अच्छी बातें करके ही गेम को शुरू किया जाए. मूल कार्यक्रम में ये शामिल नहीं था. ये हमारे संस्कारों से जुड़ी बाते हैं. हिंदी के अलावा क्षेत्रीय सिनेमा में काम करने का मौका मिले तो.... मेरे बहुत सारे मित्र हैं तमिल सिनेमा में-रजनीकांत है, कमल हासन हैं. मैं उनसे कहता रहता हूँ कि मुझे रोल दें लेकिन वो मज़ाक समझ कर मुझे देते नही हैं. अगर मौका मिला तो ज़रूर काम करूँगा. अभिषेक और ऐश्वर्या के साथ आगामी वर्ल्ड टूयर? वर्ल्ड टूयर की तैयारियाँ चल रही हैं. विश्व के कई हिस्सों में जाएगा ये टूयर. मैं, अभिषेक, ऐश्वर्या, रितेश देशमुख, प्रीति ज़िंटा, संगीत निर्देशक विशाल-शेखर ये लोग लगातार टूयर के साथ बने रहेंगे. जबकि हर शहर में जहाँ हम जाएँगे कुछ सितारे जुड़ते रहेंगे जैसे शाहिद कपूर, अक्षय कुमार और शायद माधुरी दीक्षित भी. इस उम्र में भी काम करने की प्रेरणा... फ़िल्म इंडस्ट्री के लोग मुझसे काम करने की इच्छा जताते हैं. वे लोग मेरे सामने नई-नई चुनौतियाँ रखते और मैं कोशिश करता रहता हूँ कि इन चुनौतियों का सामना करूँ और अच्छा काम करूँ. |
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