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'शाहरुख़-अमिताभ की तुलना न करें' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बॉलीवुड में इन दिनों कई युवा निर्देशक अपना कमाल दिखा रहे हैं. फ़रहान अख़्तर, इम्तियाज़ अली और सागर बेलारी जैसे निर्देशकों के बाद अब बारी है विवेक शर्मा की जो भूतनाथ के साथ पहली बार निर्देशन में उतरे हैं. फ़िल्म में अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ खान एक साथ काम कर रहे हैं. भूतनाथ के पीछे की कहानी, शाहरुख़-अमिताभ के रिश्ते, क्यों विवेक और शाहरुख़ खान जूही चावला को कहते हैं 'जूहीमाँ' ..इन सब पर विवेक शर्मा ने लंदन में बीबीसी से विशेष बातचीत की. भूतनाथ आपकी पहली फ़िल्म है. नर्वस हैं, उत्साहित हैं? अभी तो नर्वस हूँ, बहुत ही डर लग रहा है. बस इंतज़ार कर रहा हूँ और उम्मीद कर रहा हूँ कि लोगों को फ़िल्म पसंद आए. शाहरुख़ और अमिताभ बच्चन काफ़ी समय बाद भूतनाथ में एक साथ काम कर रहे हैं. बीच में ख़बरें आती रही हैं कि दोनों के रिश्ते अच्छे नहीं है. तो सेट्स पर कैसा माहौल रहता था.
मुझे तो कोई परेशानी नहीं हुई. एक तो दोनों वरिष्ठ और मझे हुए कलाकार हैं. दोनों के बीच पारिवारिक रिश्ता है, सिनेमा के ज़रिए दोनों जुड़े हैं तो एक सृजनात्मक रिश्ता भी है. जब शाहरुख़ के सीन नहीं भी होते थे तो भी वे भूतनाथ के सेट्स पर आ जाते थे. वे कई बार अमिताभ जी के लिए डीवीडी लेकर आते थे और उन्हें अपने सिक्स पैक दिखाते थे. तो अमित जी कहते थे मुझे तो साढ़े तीन पैक ही दिख रहे हैं..दूसरा चश्मा लेकर आओ. तो हँसी मज़ाक चलता रहता था. उन दिनों दोनों को लेकर कई तरह की बातें अख़बारों में छपती रहती थीं. मेरी मीडिया से गुज़ारिश है ये कि दो लोग भारत को विदेशों में भी ख्याति दिलवा रहे हैं. इन दोनों की तुलना न करें और न छवि धूमिल करें. भूतनाथ की कहानी काफ़ी अलग सी लग रही है- एक भूत और एक बच्चे के साथ उसका रिश्ता. अपनी पहली फ़िल्म को लेकर ये आइडिया कैसे आया आपके दिमाग़ में. दरअसल मैं जब छोटा था तो अपनी माँ से अजीब-अजीब पूछता रहता था कि भगवान की मूँछ क्यों नहीं होती, उनके बाल सफ़ेद क्यों नहीं होते. माँ बोलती थी कि पागल है कैसे-कैसे सवाल करता है. शायद मेरे अंदर का बच्चा अभी भी ज़िंदा है जो बहुत सारी चीज़ें पूछना और जानना चाहता है. उसी बच्चे के नज़रिए से मैने ये कहानी लिखी है कि दुनिया में बुराई को ठीक करने का एक की रास्ता है कि उसमें अच्छाई ढूँढी जाए. हर आदमी को एक मौका मिलना चाहिए. कहानी में बच्चा भूत को फ़रीशता समझता है और उसे मुक्ति दिलाता है. इसी को लेकर मैने फ़िल्म में दो चरित्र गढ़े और फिर दूसरे चरित्र जुड़ते चले गए और भूतनाथ बन गई. अमिताभ बच्चन जी भूत का रोल कर रहे हैं. क्या कहानी उन्हीं को दिमाग़ में सोचकर लिखी गई थी. उनकी क्या प्रतिक्रया दी कहानी सुनने के बाद. दरअसल एक विज्ञापन आया था जिसमें अमिताभ बच्चन और अमन( जिसने भूतनाथ में बच्चे का रोल किया है)- दोनों थे. उसी समय मैं भूतनाथ की कहानी लिख रहा था. मुझे लगता था कि भूतनाथ में जो भी कलाकार भूत और बच्चे का रोल करेंगे उन दोनों के बीच भी ऐसी ही केमिस्ट्री होनी चाहिए. मुझे नहीं पता था कि ऊपर से कोई फ़रिश्ता मेरी बात सुन रहा है. किस्मत से फ़िल्म में मुझे यही दोनों लोग मिल गए. जब पहली बार अमिताभ जी को कहानी सुनाई था तो उन्हें फ़िल्म का कॉन्सेपट बहुत अच्छा लगा था लेकिन उन्हें मुझ पर विश्वास नहीं था. मेरी पहली फ़िल्म थी. अमित जी को लगा कि कहानी को और इसमें निहित भावनाओं को मैं पर्दे पर उतार पाऊँगा या नहीं. लेकिन रवि चोपड़ा साहब ने मेरी मदद की. एक बार अमित जी मान गए तो फिर कोई दिक्कत नहीं हुई. जल्दी ही वे घुलमिल गए. भूतनाथ बीआर फ़िल्मस ने बनाई है. उनकी फ़िल्मों का संगीत भी अच्छा होता है. आप किस हद तक जुडे रहे फ़िल्म के संगीत से.
भूतनाथ एक अलग किस्म की कहानी है, इसमें संगीत को पिरोना थोड़ा सा मुश्किल काम था. मुझे संगीत बहुत पसंद है तो मैने स्क्रीनप्ले में कुछ ऐसे किस्से जोड़े हैं जहाँ गाने आते हैं. विशाल-शेखर ने अच्छा काम किया है. जावेद अख़्तर जी ने भी बहुत मदद की. न सिर्फ़ संगीत में बल्कि फ़िल्म की कहानी में उन्होंने मदद की. उन्होंने मुझे भावनात्मक समर्थन दिया. फ़िल्म में दो गाने अमिताभ जी ने गाएँ हैं, डांस भी किया है और एक गाना जूहीमाँ ने गाया है. जूही चावला को गाने के लिए कैसे राज़ी करवाया आपने. मुझे पता था कि जूहीमाँ शास्त्रीय संगीत सीख रही हैं. मैं भी वोकल क्लासिकल सीख रहा हूँ. हम लोग फ़ोन पर संगीत के बारे में कई बार बात भी करते थे. फ़िल्म में एक गाना है जिसमें बच्चे की माँ को एक अंतरा गाना है. मैने जूही से ऐसे ही एक बार कहा कि आप इसमें गाने की कोशिश करिए और उन्होंने भी कहा ठीक है. पर गंभीरता से हमने लिया नहीं इस बात को. लेकिन अमिताभ जी पीछे पड़ गए कि ये गाना जूही ही गाएँगी. जूहीमाँ ने बस एक टेक में गाना रिकॉर्ड कर दिया था. बड़ा मज़ा आया था. मुझे याद है कि शाहरुख़ आईपीएल का कोई वीडियो शूट करने जा रहे थे लेकिन वे ख़ास तौर पर स्टूडियो आए थे जूहीमाँ को शुभकामनाएँ देने. उन्होंने कहा कि जूही करियर को नया आयाम देने जा रही हैं. मैने कई बार सुना कि आप जूहीमाँ बोलते हैं. इसकी कोई ख़ास वजह? जब मैं सहायक निर्देशक था तो जूही जी के साथ दक्षिण भारत में एक फ़िल्म कर रहा था-जेन्टममैन. वहाँ की टीम जूही जी को जूही अम्मा बोलती थी. ये 1994-95 की बात होगी. जूही अम्मा से मैने उन्हें जूहीमाँ बोलना शुरू कर दिया. फिर फ़िल्म डुपलीकेट के दौरान शाहरुख़ भी जूहीमाँ बोलने लगे. उसके बाद से शाहरुख़ और मैं आज भी जूहीमाँ ही कहते हैं. आपका प्रोफ़ाइल मैं सर्च कर रही थी इंटरनेट पर. आपने फ़ीज़िक्स में मास्टर्स किया है. फ़िल्मों में कैसे आ गए. विज्ञान की पढ़ाई के चलते मेरी लॉजिकल क्षमता बढ़ गई, चीज़ों को समझने-परखने की समझ बढ़ गई. कैमरा, लाइट ये सब फ़ीज़िक्स की देन है तो मैं चीज़ों को बेहतर समझ पाता हूँ. फ़िल्मों में मुझे इससे फ़ायदा ही मिलता है. बीआर फ़िल्मस जो भी फ़िल्में बनाता है उनका एक सामाजिक संदर्भ होता है. भूतनाथ का क्या संदेश है? ये पारिवारिक फ़िल्म है. फ़िल्म का सबसे बड़ा संदेश यही है कि ज़िंदगी में जादू जैसा कुछ नहीं होता कि आपने चुटकी बजाई और सब कुछ हो गया. अगर कुछ भी हासिल करना है तो अपनी मेहनत और लगन से करना होगा और ये रातों-रात नहीं होगा. इसके लिए कई बाधाएँ पार करनी होंगी. क्या भूतनाथ-2 भी बनेगी? अगर लोग पहली फ़िल्म को पसंद करते हैं तो ज़रूर बनेगी. मेरी स्क्रिप्ट लगभग तैयार है. जब भी मौका मिला तो मैं रवि चोपड़ा जी को सुनाउँगा जिन्होंने भूतनाथ का निर्माण किया है. इसके अलावा किसी और फ़िल्म पर काम कर रहे हैं? मैं वाशू भगनानी जी की फ़िल्म कर रहा हूँ- कल किसने देखा नाम है उसका. 15 मई से दक्षिण अफ़्रीका में शूटिंग है. एक अष्टिविनायक बैनर की फ़िल्म है, एक बीआर बैनर की फ़िल्म है. जैसे-जैसे कास्टिंग होती जाएगी, फ़िल्में शुरू होती जाएँगी. |
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