BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
मित्र को भेजेंकहानी छापें
गांधी पर केंद्रित है पुस्तक मेला

गांधी पर विशेष
दुनिया भर से महात्मा गांधी पर मौजूद सामग्री को एकत्रित किया गया है
बाइबिल की कहावत है, पहले ‘शब्द’ जन्मा जिससे ज्ञान का सागर फूटा और ज्ञान के इसी सागर ने दूर-देश के साथ साथ हम से हमारा परिचय कराया.

किताबें शब्दों में हमारी अभिव्यक्ति हैं जो उत्सुकता जगाती हैं और राहत देती हैं.

18वां विश्व पुस्तक मेला दिल्ली के प्रगति मैदान में चल रहा है. एक सप्ताह तक चलने वाला ये मेला हर दो वर्षों के बाद नेशनल बुक ट्रस्ट के ज़रिए आयोजित किया जाता है.

इस बार ये विश्व पुस्तक मेला कई मायनों में यादगार है.

एक वजह तो यह है कि नेशनल बुक ट्रस्ट अपने संस्थापन का 50वां साल मना रहा है जिसका एक हिस्सा ये पुस्तक मेला भी है.

विशेष पवेलियन

दूसरे, नेशनल बुक ट्रस्ट ने महात्मा गांधी पर एक विशेष पवेलियन का आयोजन किया है और ‘इन वर्ड्स एंड डीड्स’ (शब्दों और कर्मों में) शीर्षक से एक पुस्तक प्रकाशित की है जिसमें दुनिया भर से महात्मा गांधी की रचनाओं और लेखों के अलावा गांधी पर मौजूद कॉपी राइट सामग्री को एकत्रित किया गया है.

पुस्तक मेला
ये मेला हर दो वर्षों के बाद नेशनल बुक ट्रस्ट के ज़रिए आयोजित किया जाता है

पवेलियन के आयोजक कुमार विक्रम ने बताया कि गांधी पर रोज़ाना कई डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाती हैं.

गांधी की किताबें वहां सिर्फ़ प्रदर्शित की जा रही हैं जबकि दर्शकों की ख़्वाहिश होती है कि वे इनमें से अपनी पसंद की किताबें ख़रीदें.

गांधी पवेलियन में किताबों को विषयों के हिसाब से सजा कर रखा गया है, एक जगह विभिन्न भाषाओं में अनूदित और प्रकाशित महात्मा गांधी की आत्मकथा उनकी लोकप्रियता की मिसाल है.

गांधी की प्रसंगिकता उनके 60 बरसों बाद भी क़ायम है.

रूस और भारत

विश्व के ध्रुवीकरण की बातों के बीच पुल के नीचे से कितना ही पानी बह गया हो और भारत का झुकाव अमरीका की ओर भले ही हो रहा हो लेकिन साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में रूस से नज़दीकियाँ अब भी बनी हुई हैं.

इस विश्व पुस्तक मेले में रूस का मुख्य अतिथि राष्ट्र के रूप में शामिल होना भारत-रूस रिश्ते का नवीनीकरण है.

इस मौक़े पर रूस के प्रेस और जनसंचार उपाध्यक्ष आंद्रे रोमनचेनको ने कहा कि भारत और रूस का संबंध काफ़ी पुराना है.

उन्होंने कहा कि भारत की कहानियाँ पंचतंत्र, रामायण और महाभारत की कहानियों के ज़रिए रूस में बहुत पहले पहुँच चुकी हैं और रूसी बच्चे पीढ़ी दर पीढ़ी इनसे प्रभावित होते रहे हैं.

उन्होंने यह भी कहा कि टैगोर, विवेकानंद, श्रीअरविंद जैसे भारतीय लेखकों और दार्शनिकों से लेकर नए ज़माने के गुरू दीपक चोपड़ा और श्री श्री रविशंकर ने रूस पर अपना प्रभाव डाला है.

युवा और बच्चों का पवेलियन

रूस से 70 प्रकाशक इस पुस्तक मेले में भाग ले रहे हैं जबकि 20 से भी अधिक रूसी लेखक मेले में मौजूद हैं और चेख़व, पुश्किन, दोस्तवोस्की में भारत के लोगों की दिलचस्पी से मोहित हो रहे हैं.

पुस्तक मेला
युवा और बच्चों का पवेलियन नेहरू युवा केंद्र और नेशनल बुक ट्रस्ट की कोशिशों का नतीजा है

युवा और बच्चों का पवेलियन नेहरू युवा केंद्र और नेशनल बुक ट्रस्ट की साझा कोशिशों का नतीजा है.

इसका उदघाटन करते हुए कांग्रेस सांसद और दिवंगत सुनील दत्त की पुत्री प्रिया दत्त ने कहा कि किताबें हमारी प्रेरणा का स्रोत हैं.

उनका कहना था कि उनकी माँ नरगिस दत्त को किताबों से काफ़ी लगाव था.

नेहरू युवा केंद्र के मुख्य निदेशक शकील अहमद ख़ान ने इस पवेलियन अपने सहयोग के बारे में बताते हुए कहा कि हम अपनी युवा पीढ़ी को पुस्तक से जोड़ कर उनको अपने साहित्य, सभ्यता और संस्कृति की क़ीमती धरोहर के बारे में बताना चाहते हैं.

पुस्तक मेले की ज़रूरत

पुस्तक मेले में जाने वालों को क्या चाहिए? अच्छी किताबें सस्ते दामों में.

दुनिया में किताबों की सबसे बड़ी मंडी यानी भारत में सस्ती और महंगी किताबों के प्रकाशन की होड़ लगी है फिर भी पसंद की किताबें ढूँढ पाना मुश्किल है. लेकिन पुस्तक मेले में इसकी आसानी हो जाती है.

नायाब से नायाब किताब आपके हाथ लग सकती है और पुराने दोस्तों से भी भेंट हो सकती है शर्त यह है कि वह भी आपकी ही तरह पुस्तक प्रेमी हो.

हिंदी में विशेष आकर्षण वाणी प्रकाशन है, प्रकाशक अरुण महेश्वरी ने बताया कि इस बार वह 100 से भी अधिक नई पुस्तकों के साथ आए हैं.

इसके अलावा पेंगुइन ने अलग से अपना हिंदी का स्टॉल लगाया है.

टिकट

क्षेत्रीय भाषाओं की किताबें आप कहां ढ़ूंढ़ते फिरेंगे. यही मौक़ा है जब देश विदेश के विभिन्न प्रकाशक विभिन्न भाषाओं में किताबें लेकर आते हैं.

पिछले पुस्तक मेलों के मुक़ाबले इस मेले में भीड़ कम है.

कारण कई हो सकते हैं, जैसे दिल्ली का गिरता पारा या मेले में जाने के लिए 10 रुपए का टिकट.

यह पहला मौक़ा है जब पुस्तक मेले में जाने के लिए कोई टिकट लगाया गया है.

सच है कि पुस्तक प्रेमियों को 10 रुपए का टिकट मेला जाने से तो नहीं रोक पाएगा, हां वे छात्र छात्राएं जो हर दिन मेले जाते थे उनकी संख्या में कमी ज़रूर आएगी.

टिकट के लिए लंबी क़तारें भी परेशानी का सबब हो सकती है.

किताबकिताबों की दुनिया
एक अनमोल दुनिया में ले जाने का माध्यम हैं किताबें.
महात्मा गांधीहर माटी में गांधी
गांधी की मूर्ति केवल भारत ही नहीं दुनिया के हर बड़े शहर में मौजूद हैं.
तुषार गाँधी की किताब'लेट्स किल गाँधी'
तुषार की किताब 'लेट्स किल गाँधी' बापू के आलोचकों को जवाब है.
इससे जुड़ी ख़बरें
एनबीटी: प्रकाशन के पचास साल
31 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
नहीं लगेगा कोलकाता का पुस्तक मेला
30 जनवरी, 2008 | भारत और पड़ोस
कोलकाता पुस्तक मेला खटाई में
29 जनवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
सराहा जा रहा है सरहद पार का साहित्य
25 अगस्त, 2004 | मनोरंजन एक्सप्रेस
हैरी पॉटर के उपन्यास ने सारे रिकॉर्ड तोड़े
23 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
किताब के बहाने अख़बारों का पोस्टमार्टम
01 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>