|
एनबीटी: प्रकाशन के पचास साल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नेशनल बुक ट्रस्ट अपनी पचासवीं सालगिरह को बड़े धूमधाम से मनाने की तैयारी में है. यह एक संयोग ही है कि इस वर्ष भारत अपनी सवतंत्रता की साठवीं सालगिरह भी मना रहा है और पहले स्वतंत्रता संग्राम का 150 वर्ष भी. साहित्य अकादमी भी अपनी 50वीं सालगिरह मना रहा है. पढ़ने की आदत डालने और पढ़ने का माहौल और चलन बनाने के उद्देश्य को लेकर आज से 50 वर्ष पूर्व नेशनल बुक ट्रस्ट के नाम से भारत सरकार ने 1957 में एक आंदोलन छेड़ा था. नेशनल बुक ट्रस्ट की निदेशक नुज़हत हसन का कहना था कि नेशनल बुक ट्रस्ट सिर्फ़ एक पब्लिशिंग हाउस नहीं है बल्कि यह राष्ट्रीय एकता की एक मुहिम है. नेशनल बुक ट्रस्ट की शुरुआत जवाहरलाल नेहरू की कल्पना पर आधारित है कि भारत जनतांत्रिक, आत्मनिर्भर और आगे की ओर देखने वाले समाज में उसी वक़्त परिवर्तित हो सकता है जब यहां बौद्धिक प्रेरणा का माहौल पैदा हो. नुज़हत हसन ने ट्रस्ट के 50 वर्ष पर नज़र डालते हुए कहा कि सारे निदेशकों ने अपनी अपनी सोच के मुताबिक़ योगदान किया और इसी का नतीजा है कि यह पिछले 50 वर्षों में सिर्फ़ प्रकाशन संस्था न रहकर विशाल रूप ले चुका है. देश भर में पुस्तक मेले के आयोजन और विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व करने से लेकर यह पुस्तक-प्रकाशन पर प्रशिक्षण भी देता है. एनबीटी के अध्यक्ष और विख्यात इतिहासकार प्रोफेसर बिपिन चंद्रा ने कहा कि हम इस मौक़े पर और इस संस्था के ज़रिए भारत की मिली जुली संस्कृति की बुनियाद को मज़बूत करना और एक कोने को दूसरे कोने से जोड़ना चाहते हैं. उन्होंने कहा कि हमारे सामने सब से बड़ी चुनौती इस देश के नौजवानों में पढ़ने की आदत डालना है. यह देश दुनिया के सबसे अधिक नौजवान जनसंख्या वाला देश है और यहां हर वर्ष 70 हज़ार से भी अधिक पुस्तकें प्रकाशित होती हैं. जब नेशनल बुक ट्रस्ट की शुरूआत हुई थी उस वक़्त देश भर में ज़्यादा किताबें प्रकाशित नहीं होती थीं लेकिन आज भारत दुनिया के सबसे ज़्यादा पुस्तक प्रकाशित करने वाले देश में शामिल है. 50 वर्ष पर ख़ास प्रकाशन के पचास वर्ष को लेकर एनबीटी में ख़ास कार्यक्रम की भरमार है और इसे तीन बड़े क्षेत्रों में रखा गया है. पहला भाग देश भर में सेमिनार का एक सिलसिला है जो कि एक अगस्त से शुरू हो रहा है. पहला सेमिनार ‘भारतीय प्रकाशन: नई सहस्त्राबदी में चुनौतियां और संभावनाएं’ के शीर्षक से दिल्ली में एक अगस्त से हो रहा है जिसका उदघाटन महाश्वेता देवी करेंगी. इसमें नवयुवकों में किताबों के प्रति रुचि पैदा करने पर भी विचार होगा. इसके अलावा बंगलोर, कोलकता और मैसूर में भी सेमिनार होने हैं.
दूसरा क्षेत्र है गद्य-पद्य संग्रहों के प्रकाशन का जिसमें 52 पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं. 22 भाषाओं में कहानियों और 22 ही भाषाओं में कविताओं की पुस्तकें प्रकाशित हो रही हैं जबकि आठ भाषाओं में नाटक से संबंधित पुस्तकें आ रही हैं. सबसे पहले मणिपुरी, राजस्थानी, डोगरी, कश्मीरी और मैथली जैसी स्थानीय भाषाओं में किताबें आ रही हैं. इस अवसर पर होने वाले कार्यक्रम का तीसरा क्षेत्र है लेखक के ज़रिए पाठ और प्रदर्शनी. इसका आयोजन देश भर में जगह जगह होना है ताकि कोई भी इलाक़ा अछूता न रह जाए. एनबीटी के अंग्रेज़ी विभाग के संपादक कुमार विक्रम ने बताया कि 50 वर्ष पूरे होने पर भारत के पहले स्वतंत्रता संग्राम के 150वें वर्ष से संबंधित भी कई कार्यक्रम हैं. इसी संदर्भ में एनबीटी के उर्दू संपादक शम्स इक़बाल ने कहा कि हमने ‘1857 की कहानी ग़ालिब की ज़बानी’ और पी सी जोशी की किताब ‘1857 का इंक़लाब’ के नाम से प्रकाशित की है. उन्होंने यह भी बताया कि भारत की स्वतंत्रता के 60 वर्ष पर हम अनिता इंदर सिंह की किताब ‘तक़सीमे-हिंद’ भी प्रकाशित कर रहे हैं. कम दाम पर किताबें नेशनल बुक ट्रस्ट के हिंदी विभाग से संबंधित एक पूर्व अधिकारी कुलवंत कोछड़ ने कहा इसकी सब से महत्वपूर्ण बात है इसके ज़रिए प्रकाशित पुस्तकों की क़ीमत जोकि न-लाभ, न-हानि पर आधारित होती हैं.
अब तक नेशनल बुक ट्रस्ट ने 32 भाषाओं में 16 हज़ार अलग अलग पुस्तकें प्रकाशित की हैं, 7500 मोबाइल प्रदर्शनी का आयोजन किया है, 18 बार नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले, 29 राष्ट्रीय पुस्तक मेले, बच्चों के 15 पुस्तक मेले, 38 क्षेत्रीय पुस्तक मेले, बेशुमार पुस्तक प्रदर्शनी और ज़िले के स्तर पर पुस्तक मेले का आयोजन किया है. इसने 300 से ज़्यादा अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेलों में शामिल होने के साथ साथ प्रकाशन, साहित्य, संस्कृति वग़ैरह पर अनेक समारोहों का आयोजन किया है. एनबीटी के सेल्स और मार्केटिंग मैनेजर एस एम ए रिज़वी ने बताया कि नेशनल बुक ट्रस्ट ने पिछले साल 14 करोड़ की पुस्तकें बेचीं हैं और लगभग 50 लाख कापियां प्रकाशित की हैं. |
इससे जुड़ी ख़बरें किताब के बहाने अख़बारों का पोस्टमार्टम01 जून, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'किताबें कुछ कहना चाहती हैं'10 नवंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस हैरी पॉटर के उपन्यास ने सारे रिकॉर्ड तोड़े23 जुलाई, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'आज भी ज़िंदा हैं बापू के हत्यारे'01 फ़रवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस ख़ुद से युद्ध लड़ता पाकिस्तान31 जनवरी, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'ट्रेन टू पाकिस्तान' ने तय की आधी सदी 22 अगस्त, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||