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'फ्यूज़न संगीत का भविष्य उज्ज्वल' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जाने माने सितारवादक पंडित रविशंकर का कहना है कि आने वाला दौर फ़्यूज़न संगीत यानी मिले-जुले संगीत का है और इस तरह के संगीत का भविष्य बहुत अच्छा है. पंडित रविशंकर ने कलकत्ता क्लब के शताब्दी समारोह के अवसर पर कोलकाता में सितार वादन प्रस्तुत किया. पूरी दुनिया में अपने सितार वादन का लोहा मनवा चुके 87 वर्षीय रविशंकर स्वास्थ्य में गिरावट के बावजूद अब भी नियमित अभ्यास करते हैं. इस सप्ताह पत्नी सुकन्या और दोनों बेटियों (अनुष्का और नोरा जोन्स) के साथ लगभग छह साल बाद कोलकाता आए रविशंकर की नज़र में अब आने वाला दौर फ़्यूज़न म्यूज़िक यानी मिश्रित संगीत का है. रविशंकर कहते हैं, "आने वाले समय में फ़्यूज़न म्यूज़िक और मज़बूत होगा. इसका भविष्य काफ़ी उज्ज्वल है. मुझे शुरू से ही लगता रहा है कि ऐसा ही होना है. इस संगीत को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है." 'बहुत कुछ करना है' 87 साल की उम्र में भी रविशंकर बहुत कुछ करना चाहते हैं. वे कहते हैं, "मेरे मन में कई विचार हैं. मुझे लगता है कि अभी काफ़ी कुछ करना है. अब तक मैंने जो भी किया है वह काफ़ी नहीं है."
रविशंकर ने अपने सितारवादन से समारोह में मौजूद श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. पूरे कार्यक्रम के दौरान लगा कि उन्होंने उम्र और बीमारी को ख़ुद पर ज़रा भी हावी नहीं होने दिया है. यह ज़रूर है कि वे अब नीचे नहीं बैठ पाते. ख़ास तौर पर बनी एक कुर्सी पर बैठ कर सितार बजाते हैं. अपना कार्यक्रम पेश करने से एक दिन पहले पंडित जी पत्रकारों से भी मिले और संगीत के भविष्य, अपनी पसंद-नापंसद और कोलकाता से जुड़ी अपनी यादों के बारे में खुल कर बात की. उनके साथ अनुष्का भी थी. कोलकाता से जुड़ी यादों का ज़िक्र करते हुए जैसे रविशंकर सात-आठ दशक पीछे लौट गए. उन्होने कहा, "1930 के उत्तरार्द्ध में मैं मध्य कोलकाता के एक मकान में अक्सर जाता था. वहाँ सचिन देव बर्मन और सलिल चौधरी रियाज़ करते थे. मैं घंटों उनको सुनता रहता था और उससे मुझे काफ़ी प्रेरणा मिलती थी." सितारवादन के अलावा उनको फ़िल्में देखना और किताबें पढ़ना भी बेहद पसंद है. 'नापसंद हैं टैलेंट शो' रविशंकर बताते हैं, "हाल ही मैंने ब्लू बेरी नाइट्स देखी है. इसमें नोरा ने काम किया है. बीते दिनों चीन में इसका प्रीमियर हुआ था."
वे टीवी भी देखते हैं, लेकिन विभिन्न चैनलों पर चलने वाले टैलेंट हंट यानी प्रतिभा खोज वाले कार्यक्रम उनको नापंसद हैं. रविशंकर का मानना है कि इन शो में शिरकत करने वाले तमाम गायक बुरे नहीं हैं. इनमें कुछ अच्छे गायक भी हैं. नोरा यहाँ अपनी बहन के साथ महानगर के दर्शनीय स्थलों की सैर करती रहीं और जम कर ख़रीददारी की. लेकिन वे मीडिया से बचती रहीं. उनलोगों ने विक्टोरिया मेमोरियल में दो घंटे बिताए. नोरा ने भले बात नहीं की, लेकिन अनुष्का ने बताया कि नोरा परिवार के साथ कुछ समय बिताने, अपने पिता को कार्यक्रम पेश करते देखने और उनके कुछ पुराने मित्रों से मिलने कोलकाता आई है. रविशंकर कहते हैं कि कोलकाता लौटना और यहाँ अनुष्का के साथ कार्यक्रम पेश करना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है. उन्होंने कहा, "बीमारी के बावजूद मेरा स्वभाव नहीं बदला है. मैं अक़्सर अपनी बढ़ती उम्र और अपने भीतर के शिशु के बीच तालमेल बैठाने का काफ़ी प्रयास करता हूं. लेकिन इसमें मुझे ज़्यादा कामयाबी नहीं मिल सकी है." पत्रकारों ने जब अनुष्का से सवाल किया कि अगर चुनने का मौक़ा मिले तो वे बॉलीवुड की हीरोइन बनना पसंद करेंगी या संगीतकार ही रहना चाहेंगी? उनका जवाब था- बॉलीवुड का संसार बहुत बड़ा है और एक स्टार बनना अच्छा ही होगा. लेकिन मैं संगीतकार ही रहना चाहती हूँ. |
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