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'संत संगीतकार थे बिस्मिल्ला ख़ान' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संगीतकारों का मानना है कि उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान साहब की बदौलत ही शहनाई को पहचान मिली है और आज उसके विदेशों तक में दीवाने हैं. वो ऐसे इंसान और संगीतकार थे कि उनकी प्रशंसा में संगीतकारों के पास भी शब्दों की कमी नज़र आई. पंडित जसराज हों या हरिप्रसाद चौरसिया सभी का मानना है कि वो एक संत संगीतकार थे. पंडित जसराज पंडित जसराज का मानना है- हमारे देश को आज जो क्षति हुई है उसकी पूर्ति नहीं हो सकती है. एक बहुत बड़ी शख्सियत हमारे बीच से चली गई है.' उनके जैसा महान संगीतकार न पैदा हुआ है और न कभी होगा. मैं सन् 1946 से उनसे मिलता रहा हूं. पहली बार उनका संगीत सुनकर मैं पागल सा हो गया था. मुझे पता नहीं था कि संगीत इतना अच्छा भी हो सकता है. उनके संगीत में मदमस्त करने की कला थी, वह मिठास थी जो बहुत ही कम लोगों के संगीत में सुनने को मिलती है. मैं उनके बारे में जितना भी कहूँगा बहुत कम होगा क्योंकि वो एक ऐसे इंसान थे जिन्होंने कभी दिखावे में यकीन नहीं किया. वो हमेशा सबको अच्छी राह दिखाते थे और बताते थे. वो ऑल इंडिया रेडियो को बहुत मानते थे और हमेशा कहा करते कि मुझे ऑल इंडिया रेडियो ने ही बनाया है. वो एक ऐसे फरिश्ते थे जो धरती पर बार-बार जन्म नहीं लेते हैं और जब जन्म लेते हैं तो अपनी अमिट छाप छोड़ जाते है. हरिप्रसाद चौरसिया बाँसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया का कहना है- बिस्मिल्ला खां साहब भारत की एक महान विभूति थे. अगर हम किसी संत संगीतकार को जानते है तो वो हैं बिस्मिल्ला खा़न साहब. बचपन से ही उनको सुनता और देखता आ रहा हूं और उनका आशीर्वाद सदा हमारे साथ रहा. आज ज़रूरत है कि हम ख़ान साहब की परंपरा को आगे बढ़ाएं. वो हमें दिशा दिखाकर चले गए. लेकिन वो कभी हमसे अलग नहीं हो सकते हैं. उनका संगीत हमेशा हमारे साथ रहेगा. उनके मार्गदर्शन पर अनेक कलाकार चल रहे हैं. शहनाई को उन्होंने एक नई पहचान दी. शास्त्रीय संगीत में उन्होंने शहनाई को जगह दिलाई इससे बड़ी बात क्या हो सकती है. यह उनकी मेहनत और शहनाई के प्रति समर्पण ही था कि आज शहनाई को भारत ही नहीं बल्कि पूरे संसार में सुना और सराहा जा रहा है. उनकी कमी तो हमेशा ही रहेगी. मेरा मानना है कि उनका निधन नहीं हो सकता क्योंकि वो हमारी आत्मा में इस कदर रचे बसे हुए हैं कि उनको अलग करना नामुमकिन है. | इससे जुड़ी ख़बरें शहनाई को सम्मान दिलानेवाली साँसें थमीं21 अगस्त, 2006 | मनोरंजन शहनाई के बेताज बादशाह21 अगस्त, 2006 | मनोरंजन शहनाई के सुर उदास हैं | भारत और पड़ोस 'कोलकाता वालों का उधार चुका दिया'03 जनवरी, 2004 | मनोरंजन बिस्मिल्लाह ख़ान को मदद | भारत और पड़ोस बिस्मिल्लाह ख़ान की तबीयत बिगड़ी17 अगस्त, 2006 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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