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'कोलकाता वालों का उधार चुका दिया'
"हमारा काम सिर्फ़ बजाना है. उसमें असर ऊपर वाले के हाथ है". इतनी विनम्रता बरतने वाला इंसान, बक़ौल उस्ताद विलायत ख़ान के, देश का वरिष्ठतम कलाकार है. और वह हैं शहनाई सम्राट उस्ताद बिस्मिल्लाह ख़ान. कोलकाता के एक सभागार में तीन घंटे तक शहनाई बजा कर उन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया. इस मौक़े पर उनकी जुगलबंदी थी सितारवादक उस्ताद विलायत ख़ान के साथ. इसी जगह अब से एक हफ़्ता पहले बिस्मिल्लाह ख़ान और सरोदवादक उस्ताद अमजद अली ख़ान की जुगलबंदी शुरू हुई.
हॉल खचाखच भरा हुआ था. संगीत के क्षेत्र के दो महारथी आमने-सामने थे. लेकिन बीस मिनट बाद ही बिस्मिल्ला ख़ान कुछ असहज हो गए. उनका कहना था कि हॉल की माइक व्यवस्था गड़बड़ है और उन्होंने प्रदर्शन जारी रखने से इनकार कर दिया. लोगों को मायूस हो कर लौटना पड़ा. लेकिन उस्ताद विलायत ख़ान के साथ उनकी जोड़ी ख़ूब जमी. उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ान का कहना था, "कोलकाता के लोगों का मुझ पर कुछ उधार था जो मैंने चुका दिया". |
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