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नोबेल शांति के लिए रविशंकर का भी नाम | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रसिद्ध सितार वादक रविशंकर को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया है. नोबेल शांति पुरस्कार दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक है. नोबेल संस्थान के निदेशक गीर लुंडेनस्टेड ने रायटर समाचार एजेंसी को बताया कि शांति पुरस्कार के लिए 166 नामांकन हासिल हुए हैं. इसमें 29 संगठनों के नाम भी शामिल हैं. हालांकि आधिकारिक रूप से नामांकित नामों की घोषणा नहीं की जाती है लेकिन अक्सर नाम प्रस्तावित करनेवाले लोग उन्हें सार्वजनिक कर देते हैं. समाचार एजेंसी पीटीआई का कहना है कि रविशंकर के अलावा अमरीका के पूर्व विदेश मंत्री कॉलिन पावेल, पोप जोन पॉल और रॉक स्टार बोनो का भी नाम नोबेल शांति पुरस्कारों की सूची में शामिल है. उपलब्धियां वाराणसी में जन्मे पंडित रविशंकर ने एक नर्तक के रुप में कला जगत में प्रवेश किया था. उन्होंने अपने बड़े भाई उदय शंकर के साथ कई नृत्य कार्यक्रम किए. अठारह वर्ष की उम्र में उन्होंने नृत्य छोड़कर सितार सीखना शुरू किया. पंडित रविशंकर ने अपने लंबे संगीत जीवन में कई फ़िल्मों के लिए भी संगीत निर्देशन किया जिसमें प्रख्यात फ़िल्मकार सत्यजीत रे की फ़िल्में और गुलज़ार द्वारा निर्देशित "मीरा" भी शामिल है. पंडित रविशंकर ने भारत के शास्त्रीय संगीत को विदेशों में लोकप्रिय बनाने के अलावा कई विदेशी संगीतकारों के साथ मिल कर संगीत रचनाएं की हैं. 1968 में उनकी यहूदी मेनुहिन के साथ उनकी एल्बम "ईस्ट मीट्स वेस्ट" को संगीत जगत के सबसे प्रतिष्ठित ग्रैमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था और फिर 1972 में जॉर्ज हैरिसन के साथ उनके "कॉनसर्ट फॉर बांग्लादेश" को ग्रैमी दिया गया. तीसरी बार उन्हें यह पुरस्कार उनकी संगीत रचना "फ़ुल सर्कल/कारनेगी 2000" के लिए दिया गया. |
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