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लद गया जमाना रीमिक्स का | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अचानक रीमिक्स संगीत की बिक्री कम हो जाने से फ़िल्म इंडस्ट्री के कई लोग काफ़ी खुश हैं तो कई ऐसे भी हैं जो मानते हैं कि इसका बाज़ार फिर से चमकेगा. पिछले कुछ समय तक रीमिक्स का जादू सर चढकर बोल रहा था. ‘कांटा लगा’, ‘मेरी बेरी के बेर...’, ‘बिन तेरे सनम..’, ‘ना जाओ सइयां..’, जैसे तमाम रीमिक्स गानों ने बाज़ार पर पूरी तरह से कब्ज़ा कर लिया था. संगीत कंपनियों को भी इससे काफ़ी फ़ायदा हुआ क्योंकि ओरिजिनल एल्बम के मुक़ाबले रीमिक्स एल्बम कहीं ज़्यादा मुनाफ़ा दे रहे थे. पैसा बनाने और चर्चित होने के लिए रीमिक्स का सहारा लेने वालों की कमी नहीं थी. इस साल के रीमिक्स गाने 'आजकल तेरे मेरे प्यार.., महबूबा...(शोले), ओ हसीना ज़ुल्फों वाली...जैसे अनगिनत गाने हैं जिसे श्रोताओं-दर्शकों ने सिरे से नकार दिया. फिछले वर्ष और इस वर्ष जितने भी एल्बम ने अच्छा व्यवसाय किया वे सारे ओरिजिनल हैं. इनमें ‘हसरत’, ‘तेरा मेरा प्यार’, ‘बेवफाई’ आदि जैसे एल्बम शामिल हैं. नया बाज़ार बॉलीवुड में प्रवीण भारद्वाज एकमात्र ऐसे गीतकार हैं जिनके रीमिक्स एल्बम ने भारत में सबसे ज़्यादा बिक्री की है. अब वो ओरिजिनल गीतों का एक नया बाज़ार बनाने के लिए प्रयासरत हैं और इसमें उन्हें सफलता भी हासिल हुई है. अभी इनके पास 25 निजी ओरिजिनल एल्बम हैं. प्रवीण कहते हैं, “मेरे एल्बम को अश्लीलता की ज़रूरत नहीं पड़ती है. मेरे लिए यह बहुत ही फ़क्र की बात है कि गायक मुझे गीत लिखने के लिए कहते हैं. सबसे बड़ी बात तो यह कि श्रोता मेरे लिखे हुए गीतों को पसंद करते हैं.” टी-सीरिज़ के डायरेक्टर अजय कपूर कहते हैं, “अब लोग रीमिक्स से ऊब चुके हैं. पिछले कुछ समय में गंदे रीमिक्स की भरमार सी हो गई थी. इसे दर्शक-श्रोता पूरी तरह से अपने से जोड़ नहीं सके और शायद यही वजह है कि आज रीमिक्स का बाज़ार पूरी तरह से ठंडा पड़ चुका है.” उम्मीद रीमिक्स की दुनिया के जाने माने फ़िल्म संगीतकार राजू सिंह इसे महज एक बदलते चक्र की तरह देखते हैं. वो कहते हैं, “यह एक चक्र की तरह है जो एक के बाद एक चलता रहता है. जब कोई चीज़ ओवरडोज़ हो जाती है तो फिर कुछ नया चलन में आना स्वाभाविक है.”
उनका मानना है कि भविष्य में रीमिक्स वापस आएंगे और इंडस्ट्री में सिर्फ़ अच्छे रीमिक्स बनाने वाले ही रह जाएंगे. ‘कांटा लगा’ के रीमिक्स गाने से रीमिक्स की दुनिया में धूम मचाने वाली शेफाली ज़रीवाला भी इसे फ़ैशन के बदलते ट्रेंड की तरह मानती हैं. वो कहती हैं, “मौसम की तरह लोगों को संगीत में भी बदलाव चाहिए. इसे इसकी लोकप्रियता ही कहेंगे कि रीमिक्स एक मौसम से कहीं ज़्यादा समय तक रहा.” गायक पंकज उधास कहते हैं, “ज़्यादातर लोग गहराई वाले गीत पसंद करते हैं और रीमिक्स में गहराई नहीं होती है इसमें सिर्फ़ बीट होती है.” गायिका सुनिधि चौहान भी इस साल के अंत तक अपने एल्बम को निकालने की तैयारी कर रहीं हैं. वो कहती हैं, “मुझे बहुत पहले ही लग गया था कि रीमिक्स का बाज़ार ढीला ज़रूर पड़ेगा. मुझे इस बात की खुशी है कि ओरिजिनल संगीत की वापसी हो रही है.” बदलते विकल्प निर्देशक मधुर भंडारकर मानते हैं अब लोगों को पास विकल्पों की कमी नहीं है. वो कहते है, “आज की तारीख़ में इतने चैनल्स हो गए हैं कि आपके पास चुनने की आज़ादी बढ़ गई है कि आप को क्या देखना है. भारत के लोगों ने हमेशा ही क्रिएटिविटी को पसंद किया है और ओरिजिनल से ज़्यादा क्रिएटिव क्या होगा.” वो कहते हैं कि सिर्फ़ भारत के नहीं बल्कि विदेशी चैनलों से भी प्रतियोगिता बढ़ गई है और शायद यही वजह है कि दर्शक या श्रोता चाहता है कि ओरिजिनल गीतों को ही सुना जाए. कारण कुछ भी हो लेकिन ओरिजिनल गीतों की वापसी से यह बात तो साबित हो ही गई कि किसी चीज़ की नकल के सहारे बाज़ार में लंबे समय तक टिके रहना बहुत मुश्किल है. |
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