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'आहिस्ता-आहिस्ता मिट जाएँगी दूरियाँ'
अबरार-उल-हक़
अबरार पहले लेक्चचर थे और भूगोल पढ़ाते थे
पाकिस्तानी पंजाबी पॉप गायक अबरार-उल-हक़ मानते हैं कि भारत और पाकिस्तान आसपास बने ऐसे दो घरों की तरह हैं जिनका आँगन एक ही है और अगर कुछ बातों पर दूरियाँ हैं भी तो वो आहिस्ता-आहिस्ता ख़त्म हो जाएँगी.

पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा लोकप्रिय पॉप गायक के रूप में अपनी जगह बनाने के बाद अबरार ने अब भारत का रुख़ किया है और उन्हें आशा है कि यहाँ भी उन्हें पाकिस्तान की तरह ही पसंद किया जाएगा.

अपने एलबम 'प्रीतो' के साथ पहली बार भारत आए अबरार से उनके गायन के कई पहलुओं पर बात की बीबीसी संवाददाता पाणिनी आनंद ने-

बातचीत के कुछ प्रमुख अंश-

अबरार, सबसे पहले अपने करियर की शुरुआत के बारे में हमारे पाठकों को बताइए.

कलाकार के रूप में मैंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1995 में की थी जब मैंने अपना पहला एलबम तैयार किया था. ऐसा करना मेरे व्यक्तित्व के लिए एक एकदम अलग तरह की चीज़ थी क्योंकि उन दिनों मैं एक कॉलेज में भूगोल पढ़ाता था.

मेरे विद्यार्थियों को मुझसे यह अपेक्षा नहीं थी कि उनके अध्यापक इस तरह का गाना गाएंगे पर वो एलबम इतना पसंद किया गया कि उसकी कुछ ही दिनों में एक करोड़ प्रतियाँ बिकी और पाकिस्तान में किसी पॉप संगीत एलबम के लिए यह एक ऐतिहासिक सफलता थी.

पाकिस्तान में इतनी बड़ी तादाद में और कोई एलबम बिका हो, ऐसा देखने को नहीं मिलता.

इसके बाद मैंने संगीत के साथ ही समाजसेवा के क्षेत्र में भी काम किया और इन दिनों अपनी माँ के नाम से एक अस्पताल भी चला रहा हूँ. हाँ, इतना ज़रूर है कि ऐसे सभी प्रयास मेरे संगीत की दुनिया में आने की वजह से सफल हो सके.

दुनिया के कई देशों में आपने अपने कार्यक्रम दिए हैं पर पड़ोस में ही यानी भारत आने में इतना वक़्त क्यों लग गया.

वक़्त ज़रूर लगा पर जब भारत आने का न्योता मिला तो मुझे इतनी ख़ुशी हुई कि बता नहीं सकता. बहुत सारा प्यार यहाँ के लोगों से मिला और ऐसा ही हम भी सोचते-करते हैं.

 हमारी सांस्कृतिक धरोहरें एक जैसी हैं. मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों बहुत सुंदर-सुंदर घर हैं और इनकी संस्कृति और संगीत एक ही आँगन में हैं. हमें चाहिए कि हम एक साथ गाए, सुनें, नाचें और भांगड़ा करें.

भारतीय पंजाबी पॉप गायक सुखबीर तो कई बार वहाँ आ चुके हैं. हम भी यहाँ से गए लोगों को उतना ही प्यार और सम्मान देते हैं. बल्कि यूँ कहिए कि यहाँ से ज़्यादा प्यार पाकिस्तान में वहाँ आने वालों को मिला है.

पर गायिका शुभा मुदगल और अभी हाल ही में गीतकार जावेद अख़्तर साहब को पाकिस्तान आने का वीज़ा देने से मना कर दिया गया. एक कलाकार होने के नाते इसे आप किस तरह से देखते हैं.

मुझे लगता है कि अब दोनों ओर से यह बंद होना चाहिए. लोगों को आसानी से एक-दूसरे के पास जाने और मिलने का मौक़ा मिलना चाहिए.

पिछले दिनों लोगों को एक महीने से लेकर दो वर्षों तक का वीज़ा मिला है. यह एक सराहनीय पहल है. हमारी सांस्कृतिक धरोहरें एक जैसी हैं. मुझे लगता है कि भारत और पाकिस्तान दोनों बहुत सुंदर-सुंदर घर हैं और इनकी संस्कृति और संगीत एक ही आँगन में हैं.

हमें चाहिए कि हम एक साथ गाए, नाचें, सुनें और भांगड़ा करें. आहिस्ता-आहिस्ता सारी दूरियाँ ख़त्म हो जाएँगी.

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