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'खोया खोया चाँद' सँवारेगा सोहा का करियर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सोहा अली ख़ान को अपनी आने वाली फ़िल्म 'खोया खोया चाँद' की रीलिज का बड़ी बेसब्री से इंतजार है. मशहूर सुधीर मिश्रा की इस फ़िल्म में सोहा ने अपने करियर का अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार निभाया है. इस फ़िल्म में सोहा अली ख़ान ने एक युवा अभिनेत्री की भूमिका निभाई है जबकि शाइनी आहूजा ने एक लेखक के किरदार को पर्दे पर साकार किया है. फ़िल्म की कहानी कुछ इस तरह की है कि देखने वालों को उसमें गुरुदत्त के जीवन की झलक देखने को मिलेगी. इसकी पटकथा और विषय काफी सशक्त है और यह 50-60 के दशक के फ़िल्म उद्योग पर आधारित है. इस फ़िल्म के माध्यम से ग्लैमर, उस समय के फ़िल्मी सेटों और उस दौर से जुड़े अन्य रोचक तत्व देखने को मिल सकते हैं. 'काफी तैयारी की' 'खोया खोया चाँद' में इस भूमिका को निभाने के लिए सोहा को काफी तैयारी करनी पड़ी. उन्होंने बीबीसी को बताया, "जी हां, काफी तैयारी करनी पड़ी. जैसा कि इस रोल में अलग-अलग आयाम है, उसे देखते हुए मुझे घुड़सवारी, तलवारबाजी, कत्थक नृत्य वगैरह सीखना पड़ा." सोहा ये भी मानती हैं कि इससे पहले उन्होंने इतनी चुनौतीपूर्ण भूमिका नहीं की है. इसीलिए उन्हें पूरा भरोसा है कि अगर उनका ये किरदार लोगों को भा गया तो निश्चित रुप से ये फ़िल्म उनके करियर को एक नई दिशा देगी. सुधीर मिश्रा एक प्रयोगवादी निर्देशक माने जाते हैं. मिश्रा के साथ काम के अनुभव के बारे में पूछने पर सोहा का जवाब रहा, "सुधीर मिश्रा बहुत ही गहरे और प्रयोगवादी निर्देशक हैं. उनके साथ काम करके काफी कुछ सीखने को मिला." वो कहती हैं, "इससे पहले की उनकी फ़िल्म "हज़ारों ख्वाहिशें ऐसी" को भी देखें तो आप आसानी से समझ सकते हैं कि उन्हें सामाजिक-राजनीतिक विषयों की कितनी गहरी समझ है." 'शाइनी का लुक पसंद' फिल्म में सोहा अली के साथ शाइनी आहूजा भी एक महत्वपूर्ण किरदार निभा रहे हैं.
शाइनी के बारे में वो कहती हैं, "काफी मजा आया शाइनी के साथ काम करके. उनका लुक मुझे बहुत अच्छा लगता है." सोहा बताती हैं, "मुझे शाइनी में जो सबसे खास बात लगती है वो ये कि उन्हें देखकर कोई ये विश्वास नहीं कर सकता कि ये इंसान रो भी सकता है, लेकिन उनकी खूबी है कि वो रोने का सीन भी बखूबी निभा लेते हैं." क्या कोई ऐसा भी सीन था जिसे करना ख़ासा मुश्किल रहा हो, सोहा हंसते हुए जवाब देती हैं, "हां, एक सीन है, जहां मुझे कत्थक डांस करना पड़ता है. आपको तो पता ही है कि कत्थक को इतनी आसानी से नहीं सीखा जा सकता." सोहा बताती हैं, "मैने केवल थोड़े दिन ही इसका अभ्यास किया था. इसलिए वो सीन करते वक्त काफी मुश्किल हो रही थी." ताज़ा होंगी पुरानी यादें 'खोया खोया चाँद' की सबसे खास बात ये है कि इसका बैकग्राउंड पूरी तरह से पचास-साठ के दशक की फ़िल्मों से प्रभावित है. जैसा कि हम सब जानते हैं कि वो दौर अपने बेमिसाल संगीत के लिए भी जाना जाता है. इतना ही नहीं उस दौर में मीना कुमारी, वहीदा रहमान जैसी चर्चित अभिनेत्रियों ने भी धूम मचाई थी. फ़िल्म के संगीत के बारे में सोहा ने कहा, "फ़िल्म के संगीत में वही पचास-साठ के दशक की खूशबू आपको मिलेगी." वो कहती हैं, "आजकल तो मैं अपनी गाड़ी में इसी फ़िल्म के गाने सुनती हूं और मेरे ख़्याल से लोगों को भी ये गाने अच्छे लगेंगे." | इससे जुड़ी ख़बरें ऑस्कर के लिए जाएगी 'रंग दे बसंती'25 सितंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'रंग दे बसंती' के बाद नहीं चढ़ा दूसरा रंग09 सितंबर, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'कम समय में अच्छी फ़िल्में बनाते थे हृषिकेश दा'27 अगस्त, 2006 | मनोरंजन एक्सप्रेस अब साथ-साथ हैं सैफ़ और करीना18 अक्तूबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'शर्टलेस गाने के लिए बॉडी बनाने में कड़ी मेहनत'19 सितंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस सुबह की पिक्चर और किंग ख़ान से भेंट09 नवंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस 'प्रचार के लिए अन्य मंच की ज़रूरत नहीं'21 नवंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस ऐश्वर्या की फ़िल्म प्रियंका की झोली में25 नवंबर, 2007 | मनोरंजन एक्सप्रेस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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