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शनिवार, 09 सितंबर, 2006 को 09:48 GMT तक के समाचार
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'रंग दे बसंती' के बाद नहीं चढ़ा दूसरा रंग
सोहा अली ख़ान और आमिर ख़ान

उनके पिता भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान रहे हैं और बेहद आकर्षक व्यक्तित्व के मालिक हैं और वे मॉडलिंग करते रहे हैं.

उनकी माँ एक सुपरिचित अभिनेत्री हैं और उनके भाई आजकल बॉलीवुड के सबसे चहेते अभिनेताओं में से हैं.

इस तरह देखें तो सोहा अली ख़ान को विरासत में एक ख्यातनाम परिवार मिला है और साथ में अभिनय.

सोहा अली को 'रंग दे बसंती' जैसी महत्वपूर्ण फ़िल्म भी मिली है लेकिन इस एक फ़िल्म अलावा उनकी कोई फ़िल्म हिट नहीं हुई है.

क्या हैं चुनौतियाँ सोहा के सामने, क्या करती हैं वो खाली समय में और क्या है उनकी राय हिंदी सिनेमा जगत के बारे में. उनसे लंबी बातचीत की प्रतीक्षा घिल्डियाल ने.

बातचीत के प्रमुख अंश -

क्या आप पर अभी भी 'रंग दे बसंती' की सफलता का रंग चढ़ा हुआ है?
'रंग दे बसंती' मेरे लिये बहुत ख़ास फ़िल्म रही है. तो ज़ाहिर है उस फ़िल्म की सफलता की खुशी मुझे अब भी है. मुझे लोगों का बहुत प्रोत्साहन मिला, बहुत चिठ्ठियाँ आईं, बहुत तारीफ़ हुई. मैं फ़िल्म के निर्देशक राकेश मेहरा की बहुत शुक्रगुज़ार हूँ कि उन्होंने मुझे इस फ़िल्म का हिस्सा बनाया. इस फ़िल्म से जुड़े होने पर मुझे गर्व है.

क्या 'रंग दे बसंती' में इतने सारे किरदारों के बीच खोने का डर नहीं लगा, फ़िल्म को स्वीकार करते वक्त.

सोहा अली ख़ान
सोहा अली ख़ान मानती हैं कि परिवारजनों का सहयोग महत्वपूर्ण होता है

मुझे इसका पटकथा इतनी अच्छी लगी और अपना किरदार भी. मैं एक अच्छी फ़िल्म का हिस्सा बनना चाहती थी. लोगों ने कहा भी कि आप इतने सारे मुख्य किरदारों की फ़िल्म न जाएँ लेकिन मेरा मानना है कि एक बुरी फ़िल्म में लंबा रोल करने से बेहतर है एक अच्छी फ़िल्म में छोटा किरदार निभाना. इस फ़िल्म में आमिर खा़न भी थे जिनके बारे में सब जानते हैं कि वो केवल अच्छी पटकथा वाली फ़िल्में ही करते हैं.

सच सच बताइये, शर्मीला टैगोर की बेटी होना और सैफ अली खान की बहन होने से कितनी मदद मिलती है फ़िल्म इंडस्ट्री में?
ये ताल्लुकात आपको आगे नहीं बढ़ा सकते. हां आपको निर्माताओं और निर्देशकों से मिलने में आसानी हो जाती है. लेकिन उसके आगे आपकी अपनी मेहनत है. आपमें कुछ बात तो होनी चाहिए जिसे देखकर निर्माता आपको अपनी फ़िल्म में लेने का मन बनाएँ. ये ज़रूर है कि मेरी माँ और मेरे भाई से मुझे समय समय पर मेरी फ़िल्मों को लेकर सलाह देते रहते हैं.

अक्सर सफल अभिनेताओं और अभिनेत्रियों के बच्चे जब फ़िल्मों मे कदम रखते हैं तो उनकी तुलना उनके मां बाप से की जाती है. अभिषेक बच्चन के साथ अभी तक ऐसा होता है. आपको लगता आप पर भी मां से तुलना होने का दबाव रहता है?
मैं उम्मीद करती हूँ कि लोग ज़्यादा तुलना नहीं करेंगे. माँ ने तो 200 से ज़्यादा फ़िल्में की हैं और वो बहुत मशहूर रही हैं. मेरे लिये ये गर्व और खुशी की बात है कि मैं शर्मीला टैगोर की बेटी हूँ लेकिन मैं अपनी पहचान अलग बनाना चाहती हूँ. मैं तो माँ की बेटी थी और रहूँगी, ज़ाहिर है मैं उनसे अपनी तुलना नहीं करना चाहती.

आपके सह-अभिनेता अभय देओल का कहना है कि आप बड़ी हंसमुख हैं और सबको हँसाती रहती हैं.
अब मैं अपने बारे में खुद क्या कहूं. अभय कहते हैं तो शायद ये सच हो. वैसे मुझमें लोगों को हँसाने की क्षमता तो है और मैं खुद पर भी हँस सकती हूँ. लोग अक्सर अपने आपको बहुत गंभीरता से ले लेते हैं.

सुना है आपका परिवार आपको कोई दिक्कत न हो इसका बहुत ख़याल रखता, आपको हर मुश्किल से बचाकर रखना चाहता है. आपको ये अच्छा लगता है?
नहीं, मेरा परिवार एक हद तक ऐसा करता है. हाँ, मैं सबसे छोटी हूँ इस वजह से वो मुझे हर तरह की सुरक्षा देना चाहते हैं लेकिन वो मेरे हर मामले में दखल नहीं देते और चाहते हैं कि मैं अपने फैसले खुद लूँ. मेरे मां-बाप खुले विचारों के हैं.

आपके सह-अभिनेताओं से प्रेम संबंधों के बारे में जब आप खबरें देखती हैं तो कैसा लगता है?

सोहा अली ख़ान और शाहिद कपूर
अभी किसी और फ़िल्म की ख़ास चर्चा नहीं हुआ है

मैं इन बातों को बिलकुल गंभीरता से नहीं लेती. आदत पड़ गई है. मैं जानती हूँ कि अखबारों और पत्रिकाओं को भी अपनी प्रतियाँ बेचनी होती हैं तो वो ऐसी बातें लिखते रहते हैं. हाँ, लेकिन अगर कोई ऐसी बात लिखे जिससे किसी को चोट पहुंचे तब उस बारे में एक कड़ा रुख़ लेना ज़रूरी हो जाता है.

एक और बड़ी अजीब अफवाह आपके बारे में सुनी है.
हाँ, ज़रूर बताइये क्योंकि कई चीजें तो मुझे अपने बारे में आप लोगों से ही पता चलती हैं.

सुना है मोरक्को के राजकुमार आपके बड़े कायल हो गये हैं?
हाँ, मैंने भी ये सुना है. मैं क्या बताऊँ आपको मैं तो मोरक्को के राजकुमार को जानती तक नहीं. हाँ मैं मोरक्को गई ज़रूर हूं एक बार, लेकिन पता नहीं ये अफवाह कहाँ से शुरु हुई.

प्यार के बारे में आपकी क्या राय है?
प्यार तो बहुत ख़ूबसूरत और अहम चीज़ है. सबको जीवन में इसका इंतज़ार रहता है और ये बहुत प्रेरणादायक भी है.

भाई सैफ़ अली खान से कैसे संबंध हैं?
हम दोनों बहुत हद तक एक जैसे हैं. हम एक दूसरे को अच्छी तरह समझते हैं. वो मुझसे बड़ा प्यार करते हैं. कभी-कभी उन्हें समझ नहीं आता कि वो मेरे भाई ज़्यादा हैं या दोस्त.

आपके और क्या शौक हैं?
मुझे सिनेमा देखने, किताबें पढ़ने और दोस्तों के साथ मस्ती करने का शौक है.

'रंग दे बसंती' की सोनिया की तरह क्या आप भी देशभक्त हैं?
हाँ, मैं सोनिया की तरह ही देशभक्त हूँ. मैं चार साल विदेश में रही हूँ. मुझे लगता है कि विदेश में रहने से आप अपने देश के बारे में ज़्यादा जानकारी हासिल करते हैं. मैंने अपने देश के इतिहास के बारे में बहुत पढ़ा है. बचपन में गणतंत्र दिवस की परेड हर साल देखने जाते थे. हम एक सफल लोकतंत्र हैं और मुझे इस बात का गर्व है.

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