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रविवार, 27 मई, 2007 को 18:28 GMT तक के समाचार
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निर्देशन मेरे बस का काम नहीं है: नसीर

नसीर निर्देशन से तौबा कर चुके हैं
बेहतरीन अभिनेताओं का ज़िक्र आते ही नसीर का नाम ज़्यादातर लोगों की ज़ुबान पर सबसे पहले आता है, मगर नसीर ने निर्देशन से तौबा कर ली है.

अपने किरदारों के ज़रिए अभिनय की नई ऊँचाइयाँ छूने वाले नसीर कहते हैं कि "फिल्मों को विभिन्न श्रेणियों में नहीं बाँटा जाना चाहिए. फ़िल्म या तो अच्छी होती है या फिर बुरी. फिल्मों को गुड या बैड की श्रेणी में ही रखा जाना चाहिए."

अपने निर्देशन में बनी पहली फिल्म ‘यूँ होता तो क्या होता’ को आप किस श्रेणी में रखेंगे? इस सवाल पर नसीर तुरंत जवाब देते हैं कि "वह बैड फिल्म है. मैं अब सपने में भी ऐसी फिल्म नहीं बना सकता."

नसीरुद्दीन ने अब निर्देशन से तौबा कर ली है. वे कहते हैं कि "निर्देशन मेरे बस का काम नहीं है."

क्या फिल्मों से संन्यास लेने का कोई इरादा है? वे कहते हैं कि "मैं आजीवन काम करने पर विश्वास करता हूँ इसलिए फिल्मों को अलविदा कहने का कोई इरादा नहीं है."

मौजूदा दौर के फिल्मकारों में वे अनुराग कश्यप, ऋतुपर्णो घोष और राजकुमार हिरानी के कामकाज को बेहतर मानते हैं.

अफ़सोस

कोलकाता में निर्देशक अंजन दत्त की हिंदी फिल्म ‘बीबीडी’ की शूटिंग के लिए आए नसीर ने कहा कि उन्हें अपने जीवन में दो बातों का अफ़सोस है, एक तो वे सत्यजित राय के साथ कभी काम नहीं कर पाए, दूसरे रिचर्ड एटनबरो की गाँधी में मुख्य भूमिका नहीं कर पाने का.

'यूँ होता तो क्या होता' को नसीर बुरी फ़िल्म मानते हैं

वे कहते हैं कि भारतीय सिनेमा के जीनियस माने जाने वाले राय के साथ काम नहीं कर पाने का गहरा अफसोस रहेगा.

नसीर कहते हैं कि "मुझे लगता था कि वे ‘शतरंज के खिलाड़ी’ में काम करने के लिए मुझे बुलाएँगे. लेकिन ऐसा नहीं हो सका. बदक़िस्मती से उन्होंने बाद में फिर हिंदी फिल्म भी नहीं बनाई."

नसीर कहते हैं कि "मैंने सत्यजित राय से कभी काम नहीं माँगा. मुझे लगता था कि मेरी अभिनय क्षमता को देखते हुए वे खुद मुझे बुलाएँगे. ‘सदगति’ के बाद उन्होंने जब ‘शतरंज के खिलाड़ी’ शुरू की तब भी मुझे उनके ऑफर का इंतजार था. मेरी उर्दू भी तब अच्छी थी. लेकिन उन्होंने नहीं बुलाया. यह अफसोस भुलाना मुश्किल है."

वे कहते हैं कि "ज़िंदगी में कभी-कभी कुछ चीजें अचानक घट जाती हैं और फिर आजीवन उसका अफसोस रहता है. रिचर्ड एटनबरो की ‘गांधी’ फिल्म में महात्मा गाँधी की भूमिका मैंने उम्र कम होने के कारण ठुकरा दी थी. लेकिन अब मुझे उसका भी गहरा अफसोस है."

फ़िल्म

हिंदी फिल्म ‘बीबीडी’ निर्देशक अंजन दत्त की तीसरी फिल्म है. वे इससे पहले ‘बड़ा दिन’ और ‘बोंग कनेक्शन’ बना चुके हैं.

उन्होंने नसीर के अलावा केके मेनन और जिमी शेरगिल के साथ एक सप्ताह तक कोलकाता में फिल्म के आखिरी हिस्सों की शूटिंग की.

नसीर अपने सह-कलाकारों की तारीफ करते हुए कहते हैं कि "जिमी को तो मैंने अपनी फिल्म में निर्देशित किया था. उनके साथ मेरा खास लगाव है. मेनन भी बहुत अच्छे कलाकार हैं. 'हनीमून ट्रैवल्स' में उनका डांस मैं नहीं भूल सकता."

नसीर कहते हैं कि "अभिनय सीखी जाती है, सिखाई नहीं जाती. इस मामले में दोनों यानी केके जिमी बहुत अच्छे हैं."

जिमी और केके कहते हैं कि नसीर के साथ काम करना अपने आप में बड़ी बात है. दोनों का कहना है कि उन्होंने नसीर से काफ़ी कुछ सीखा है.

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