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गुरुवार, 19 जनवरी, 2006 को 16:59 GMT तक के समाचार
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एक और चुनौतीपूर्ण भूमिका में कोंकणा

कोंकणा
कोंकणा सेन ने अब तक की अपनी सभी फ़िल्मों में अभिनय के लिए सराहना बटोरी है
कोंकणा सेन शर्मा ने अपनी फ़िल्म 'मिस्टर एण्ड मिसेस अय्यर' से सबका ध्यान अपनी तरफ खींचा था जिसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था.

फिर कुछ समय बाद कोंकणा की फ़िल्म पेज-3 आई और इनके अभिनय की पूरी फ़िल्म इंडस्ट्री कायल हो गई.

हालाँकि किसी ने इसे तक़दीर कहा तो किसी ने इसे फ़िल्मकार मां अपर्णा सेन का प्रभाव बताया.

लेकिन सभी लोग इस तर्क को नहीं मानते.

कोंकणा किसी भी किरदार में जान फूंक देती है, फिर चाहे वह 'मि. एण्ड मिसेस अय्यर' की सीधी-सादी लड़की का किरदार हो या फिर 'पेज-3' की बिंदास पत्रकार का.

‘पेज-3’ के काफी दिन बाद आई '15, पार्क एवेन्यू' लेकिन इस बीच कोंकणा की और कोई फ़िल्म नज़र नहीं आई.

इसका कारण पूछने पर कोंकणा कहती हैं, "ऐसा नहीं है कि मैंने फ़िल्मों से संन्यास ले लिया था, हां कुछ अच्छी स्क्रिप्ट के लिए समय तो लगता ही है और फिर दूसरी भाषाओं की फ़िल्में भी तो थीं."

डेडलाइन

लगता है कोंकणा को एक बार फिर अपने मन मुताबिक रोल मिल गया है और अपनी एक और धमाकेदार थ्रिलर फ़िल्म ‘डेडलाइन-सिर्फ 24 घंटे’ के साथ जल्द ही पर्दे पर नज़र आने वाली है.

कोंकणा
कोंकणा डेडलाइन में भी एक अलग तरह के किरदार में हैं

इस फ़िल्म में उनके साथ इरफ़ान ख़ान, संध्या मृदुल, रजत कपूर, ज़ाकिर हुसैन तथा प्रिंसी शुक्ला है. इस फ़िल्म में अपने किरदार को लेकर कोंकणा काफी उत्साहित हैं.

इस फ़िल्म के बारे में पूछने पर कोंकणा बताती हैं,"डेडलाइन में मैं एक मॉडर्न माँ के किरदार में हूँ और यह एक ऐसी फ़िल्म है जो थ्रिलर होते हुए भी थ्रिलर नहीं है. इस फ़िल्म में भावनाओं की कई परतें एक साथ देखने को मिलेंगी और हां इस फ़िल्म की ख़ासियत यह भी है कि थ्रिलर होते हुए भी इसमें ख़ूनख़राबा बिल्कुल नहीं है."

दूसरी भाषा की फ़िल्में

कोंकणा सिर्फ समानान्तर या आर्ट सिनेमा ही नहीं, बल्कि मेनस्ट्रीम सिनेमा में भी जोर-शोर से काम कर रही हैं.

कोंकणा सिर्फ हिन्दी फ़िल्म दर्शकों तक ही सीमित नहीं रहना चाहतीं.

 मैं अलग-अलग भाषाओं में काम करने को एन्जॉय करती हूँ क्योंकि मैं सिर्फ हिन्दी फ़िल्मों से ही बंधकर काम नहीं करना चाहती. मैं एक कलाकार हूँ और अलग-अलग तरह के काम करना ही एक कलाकार की हॉबी होती है. फ़िल्म कौन सी भाषा में है से ज्यादा मैं फ़िल्म की कहानी पर ध्यान देती हूँ
कोंकणा सेन

वे हर भाषा में अपना अभिनय दिखाना चाहती हैं फिर चाहे वह फ़िल्म हिन्दी हो, अंग्रेज़ी हो या फिर उनकी मातृभाषा बांग्ला हो.

कोंकणा के शब्दों में,"मैं अलग-अलग भाषाओं में काम करने को एन्जॉय करती हूँ क्योंकि मैं सिर्फ हिन्दी फ़िल्मों से ही बँधकर काम नहीं करना चाहती. मैं एक कलाकार हूँ और अलग-अलग तरह के काम करना ही एक कलाकार की हॉबी होती है. फ़िल्म कौन सी भाषा में है से ज्यादा मैं फ़िल्म की कहानी पर ध्यान देती हूँ."

वैसे तो कोंकणा अपनी फ़िल्मों से संतुष्ट हैं लेकिन चुनौतीपूर्ण रोल करने में उन्हें ज्यादा मज़ा आता है, ख़ासकर पुरूषों को ध्यान में रखकर लिखे गए रोल वे करना चाहती हैं.

कोंकणा को नजदीक से जानने वालों के अनुसार, कोंकणा एक अच्छी कलाकार होने के साथ – साथ एक बहुत अच्छी इंसान भी हैं.

डेडलाइन बनाने वाली कंपनी प्लस इंटरटेंनमेंट के निर्माता रवि अग्रवाल कहते हैं, "कोंकणा में अभिनय की बारीकियां कूट-कूटकर भरी हुई हैं."

तभी तो इतनी लटके-झटके वाली हिरोइनों को पीछे छोड़ कोंकणा ने फ़िल्म इंडस्ट्री में अपनी एक अदद पहचान बनाई है.

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