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15 पार्क एवेन्यू:पता एक बीमार लड़की का | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जानी-मानी निर्देशक अपर्णा सेन को शायद पोस्टल एड्रेस यानी पतों से ख़ास लगाव है. इसलिए '36 चौरंगी लेन' के बाद इस कड़ी में उनकी दूसरी फ़िल्म है '15 पार्क एवेन्यू'. इसमें मानसिक तौर पर बीमार लड़की मीठी (कोंकणा सेन) इस पते की तलाश करती है. उन्हें विश्वास है कि वह इसी पते पर अपने पति और पाँच बच्चों के साथ रहती हैं. सिजोफ्रेनिया नामक बीमारी की शिकार मीठी के ईर्द-गिर्द घूमती कहानी पर अंग्रेज़ी में बनी इस फ़िल्म को बाद में हिंदी में भी डब किया गया. अब तीन करोड़ की लागत से बनी यह फ़िल्म छह जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ हो रही है. वैसे, रिलीज़ होने के पहले ही यह भारत से लंदन तक आलोचकों और दर्शकों की प्रशंसा बटोर चुकी है. इस फ़िल्म में कोंकणा के अलावा शबाना आज़मी, वहीदा रहमान, राहुल बोस और सौमित्र चटर्जी ने भी काम किया है. इसके निर्माता हैं एसपीएस फ़िल्म्स के विपिन वोहरा. शौक विकलांग और चुनौतीपूर्ण चरित्रों पर फ़िल्म बनाना अपर्णा का शौक रहा है. इससे पहले भी वे ‘पारोमितार एकदिन’ और ‘परमा’ जैसी फ़िल्में बना चुकी हैं. अपर्णा कहती हैं, "इस फ़िल्म के लिए मैंने और कोंकणा ने सिजोफ्रेनिक मरीजों का काफ़ी नज़दीक से अध्ययन किया. हमारे कई रिश्तेदार भी इस बीमारी से पीड़ित हैं. मुझे लगता है कि विकलांग चरित्रों पर हाल में मुख्यधारा की फ़िल्में बनने लगी हैं. इनमें ब्लैक और इक़बाल का नाम लिया जा सकता है." फ़िल्म में इस चरित्र को निभाने वाली मीठी यानी कोंकणा का कहना है, "मैंने मीठी के चरित्र के साथ ही परवरिश पाई है. हमारे परिवारों में कहीं न कहीं कोई ऐसा चरित्र होता है जो छिपा रहता है. मीठी की भूमिका मिसेज अय्यर से काफ़ी अलग है." फ़िल्म को तकनीकी रूप से चुस्त बनाने के लिए निर्देशक ने एक साइकियाट्रिस्ट (मनोरोग विशेषज्ञ) से भी सहायता ली. उससे इस बीमारी के तकनीकी और डॉक्टरी पहलुओं को समझने में सहायता मिली. कोंकणा बताती है कि उन्होंने डॉक्टर से इस तरह बात की जैसे उन्हें मिरगी और सिजोफ्रेनिया,दोनों बीमारियाँ हों. मीठी पहले सामान्य रहती है लेकिन एक दुर्घटना के बाद वह सिजोफ्रेनिया का शिकार हो जाती है. यह ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज दो अलग-अलग व्यक्तित्व में खुद को देखता है. शबाना आज़मी फ़िल्म में शबाना के शामिल होने के बारे में अपर्णा कहती हैं कि पटकथा लिखते समय शबाना ने, जोकि मेरी क़रीबी मित्र हैं, भी इसमें काम करने की इच्छा जताई.
कोंकणा से विचार-विमर्श करने के बाद शबाना के लिए भी एक भूमिका तैयार की गई. वे इस फ़िल्म में मीठी की सौतेली बहन बनी हैं जो उनसे 18 साल बड़ी हैं. वहीदा रहमान ने इसमें दोनों बहनों की डरी-सहमी और असुरक्षित माँ की भूमिका निभाई है और सौमित्र चटर्जी ने उनके दूसरे पति की. लंदन में एक विशेष शो के दौरान फ़िल्म को काफ़ी सराहना मिल चुकी है. अपर्णा का कहना है कि एक ख़ास विषय को लेकर चलने के कारण ही उन्होंने इसे अंग्रेज़ी में बनाने का फ़ैसला किया. बाद में फ़िल्म पूरी होने पर लगा कि यह हिंदी के दर्शकों को भी पसंद आएगी इसलिए हिंदी में इसकी डबिंग की गई. इस फ़िल्म की शूटिंग कोलकाता के अलावा भूटान के कुछ खूबसूरत लोकेशनों पर की गई है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'कई महिला निर्देशक हैं मुख्य धारा में'17 अगस्त, 2005 | मनोरंजन देवानंद को मिला दादा साहब फाल्के सम्मान30 दिसंबर, 2003 | मनोरंजन टोरंटो फ़िल्मोत्सव का उदघाटन 'वॉटर' से09 सितंबर, 2005 | मनोरंजन फिर साथ-साथ शबाना और उर्मिला06 दिसंबर, 2003 | मनोरंजन ये तो बस दिखावा है: शबाना | भारत और पड़ोस 'राजनीतिक दल गंभीर नहीं' | भारत और पड़ोस शबाना जैसे रोल मिलें तो... | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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