BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शनिवार, 06 दिसंबर, 2003 को 00:36 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
फिर साथ-साथ शबाना और उर्मिला

उर्मिला मातोंडकर
उर्मिला मातोंडकर ने अच्छा अभिनय किया है

देश भर में शुक्रवार को रिलीज़ हुई फ़िल्म तहज़ीब में 20 साल पहले हिट हुई फ़िल्म मासूम की माँ-बेटी की जोड़ी ने एक बार फिर कमाल दिखाया है.

हिंदी फ़िल्मों पर लिखने वाले जाने माने पत्रकार ख़ालिद मोहम्मद की फ़िज़ा के बाद ये दूसरी फ़िल्म है.

इस कहानी में भी महिलाओं की प्रमुख भूमिका है.

उर्मिला मातोंडकर बनी हैं तहज़ीब जो अपनी माँ शबाना आज़मी से नफ़रत करती है.

साथ ही उन्हें अपने पिता के कत्ल का ज़िम्मेदार भी मानती हैं.

शबाना आज़मी एक मशहूर गायिका का किरदार निभा रही हैं जो अपने काम में व्यस्त रहने के कारण अपने परिवार के लिए वक्त नहीं निकाल पातीं.

संगीत इस कहानी का एक अहम हिस्सा है.

इसके बावजूद फ़िल्म का एक ही गाना याद रहता है.

इस बार संगीतकार ए आर रहमान का जादू शायद अपना असर न छोड़ पाए.

फ़िल्मों में आने से पहले मॉडल रहे अर्जुन रामपाल ने उर्मिला के लेखक पति का किरदार बखूबी निभाया है.

दिया मिर्ज़ा ने शबाना आज़मी की छोटी और मानसिक तौर पर बीमार बेटी का रोल किया है लेकिन वो प्रभावित नहीं कर पाती हैं.

आजकल के चलन को ध्यान में रखते हुए पूर्व मिस वर्ल्ड डायना हेडन को भी एक भूमिका दी गई है.

एक बार फिर साफ़ हो गया है कि ख़ालिद जितने अच्छे लेखक हैं, शायद उतने अच्छे निर्देशक नहीं हैं.

मध्यांतर के बाद फ़िल्म खिंचती चली जाती है और अंत में फॉर्मूला फ़िल्म बन कर रह जाती है.

लेकिन फ़िल्म में कहीं- कहीं नयापन भी झलकता है साथ ही शबाना और उर्मिला ने अच्छा अभिनय किया है.

लेकिन भावनात्मक फ़िल्म होने के बावजूद फ़िल्म लोगों को भावुक करने में कामयाब नहीं हो पाती है.

इससे जुड़ी ख़बरें
इंटरनेट लिंक्स
बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है.
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>