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देवानंद को मिला दादा साहब फाल्के सम्मान
हिंदी फ़िल्मों के सदाबहार अभिनेता देवानंद को इस वर्ष के दादा साहब फाल्के पुरस्कार से नवाज़ा गया है. क़रीब पाँच दशक यानी आधी सदी तक हिंदी सिनेमा पर छाए रहे देवानंद अब हालाँकि काफ़ी उम्रदराज़ हो चुके हैं लेकिन वह ख़ुद को अब भी किसी युवा से कम नहीं मानते. उनका कहना है कि आदमी युवा या बूढ़ा तो दिल से होता है और मेरा दिल अब भी जवान है. सोमवार को राष्ट्रपति डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ने विज्ञान भवन में दादा साहब फाल्के पुरस्कार देने के लिए देवानंद का नाम पुकारा तो लोग तालियाँ बजाने के लिए टूट से पड़े. देवानंद अपनी जाने-पहचाने अंदाज़ में चलते हुए पुरस्कार लेने पहुँचे तो लोगों को उनकी फ़िल्मों उनका ख़ास अंदाज़ याद आ गया. इस मौक़े पर उनके कुछ ख़ास गानों और फ़िल्मों का प्रदर्शन भी किया गया जो हिंदी फ़िल्म इतिहास में मील का पत्थर बन चुकी हैं जैसे गाइड, ज्वैल थीफ़, तेरे घर के सामने, जॉनी मेरा नाम, सी आई डी वग़ैरा. देवानंद हिंदी फ़िल्मों के एक ऐसे अभिनेता रहे हैं जिन्होंने चलने, बात करने और कपड़े पहनने का अपना अलग और बिल्कुल ख़ास अंदाज़ चलाया जो बहुत ही लोकप्रिय हुआ. दादा साहब फाल्के पुरस्कार में दो लाख रुपए, एक प्रशस्ति पत्र और स्वर्ण कमल दिया जाता है. वर्ष 2003 के राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कारों में सबसे ज़्यादा बाज़ी मारी संजय लीला भंसाली की फ़िल्म देवदास ने. देवदास को पाँच पुरस्कार मिले. उसके बाद अपर्णा सेन की 'मिस्टर एंड मिसेज़ अय्यर' और मणिरतनम की 'कनाथिल मुथामित्थल' को अनेक पुरस्कार मिले. सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार अजय देवगन को फ़िल्म 'द लैजेंड ऑफ़ भगत सिंह' के लिए दिया गया और कोंकणा सेन शर्मा को 'मिस्टर एंड मिसेज़ अय्यर' में अभिनय के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फ़िल्म पुरस्कार दिया गया. |
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