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न्यूयॉर्क में देसी फ़िल्मों का फेस्टिवल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में आजकल भारतीय मूल के फिल्मकारों की फिल्मों का महोत्सव चल रहा है. न्यूयॉर्क के मशहूर लिंकन सेंटर में बुधवार की रात एक आलीशान पार्टी के साथ शुरू हुए इस समारोह में फीचर फ़िल्मों के साथ साथ कई डाक्यूमेंट्री फिल्में और शॉर्ट फिल्में भी शामिल की गई हैं. पाँच दिनों तक चलने वाले इस समारोह में भारतीय मूल के निर्देशकों, कलाकारों और निर्माताओं की फ़िल्में दिखाई जा रही हैं जिससे नए और उभरते हुए फिल्मकारों को अपनी कला का प्रदर्शन करने का मौक़ा मिले. इनमें से ज़्यादातर अमरीका, ब्रिटेन और कनाडा में रहते हैं. इंडो अमेरिकन ऑर्ट्स कांउसिल नामक एक भारतीय सांस्कृतिक संस्था ने इसका आयोजन किया है. इस महोत्सव में करीब 40 फिल्में दिखाई जाएँगी जिनमें मशहूर भारतीय कलाकारों की फिल्में भी शामिल हैं. इनमे कुछ हिंदी भाषा में हैं तो कई फिल्में अँग्रेज़ी भाषा में बनाई गई हैं.
बॉलीवुड सितारों में शबाना आज़मी, नंदिता दास, कोंकोना सेन शामिल हैं तो दीपा मेहता और स्वर्गीय इसमाईल मर्चेंट जैसे निर्देशकों की फ़िल्में भी हैं. अमरीका में रहने वाले भारतीय मूल ही नहीं बल्कि दक्षिण एशियाई मूल के लोगों में भारतीय फिल्मों के प्रति बहुत दिलचस्पी रहती है. और जब ऐसे समारोह आयोजित किए जाते हैं तो फिल्में देखने वालों का तांता लग जाता है. सैकड़ों की तादाद में फिल्मों के शौकीन लोग इस समारोह में भारतीय मूल के फिल्मकारों की अलग-अलग मुद्दों पर बनाई गई फ़िल्मों का आनंद उठाने आ रहे हैं. सप्ताहांक के दौरान भीड़ और बढ़ने की ही उम्मीद है. वॉटर समारोह के पहले दिन दीपा मेहता की बहुचर्चित और विवादित फिल्म वॉटर का प्रदर्शन किया गया.
वॉटर में 1938 के भारतीय समाज में विधवाओं की स्थिति का चित्रण किया गया है. लीज़ा रे और जॉन अब्राहम ने इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभाई है और इस फिल्म में संगीत दिया है एआर रहमान ने. इसकी शूटिंग श्रीलंका में की गई है. पहले बनारस में इसकी शूटिंग के समय विवाद छिड़ गया था और काफी तोड़-फोड़ के बाद इसका फ़िल्माया जाना रोक दिया गया था. इसके अलावा जो फिल्में दिखाई जाएँगी उनमें शोनाली बोस की अमू, निर्देशिका शोनाली बोस की पहली फिल्म अमू में कोंकोना सेन के अलावा भारत की मार्क्सवादी-कम्युनिस्ट पार्टी की बृंदा कारत भी अभिनय के जौहर दिखा रही हैं. हिंदी भाषा में बनी इस दो घंटे लंबी फ़िल्म में दिल्ली में सिख-विरोधी दंगों पर आधारित कहानी बुनी गई है जिसमें एक 21 साल की भारतीय मूल की अमरीकी लड़की वापस दिल्ली जाती है और उसे अपनी ज़िंदगी के कई पहलुओं के बारे में नए सिरे से सोचना पड़ता है. इस समारोह में एक और फिल्म जिसका लोगों को इंतज़ार है वह है सुमति राम के निर्देशन में बनी एक रोमांटिक फिल्म 'विश्वतुलसी', इसमें मुख्य भूमिका निभाई है नंदिता दास और दक्षिण भारत के मशहूर अदाकार ममूटी ने. | इससे जुड़ी ख़बरें सलमान रुश्दी बुकर की दौड़ से बाहर09 सितंबर, 2005 | मनोरंजन ‘नैना’ पर विवाद निराधार है: उर्मिला25 मई, 2005 | मनोरंजन 'जो बोले सो निहाल' के ख़िलाफ़ प्रदर्शन14 मई, 2005 | मनोरंजन विवादों के साथ फ़ैशन वीक का समापन26 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन नेताजी पर बनी फ़िल्म विवाद में14 अप्रैल, 2005 | मनोरंजन फ़िल्म 'ब्लैक फ्राइडे' विवादों में घिरी28 जनवरी, 2005 | मनोरंजन इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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