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शुक्रवार, 09 सितंबर, 2005 को 13:11 GMT तक के समाचार
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टोरंटो फ़िल्मोत्सव का उदघाटन 'वॉटर' से

जॉन अब्राहम और लीसा रे
दीपा मेहता की इस फ़िल्म में जॉन अब्राहम और लीसा रे ने भी भूमिका अदा की है
दीपा मेहता की जिस फ़िल्म को हिंदू कट्टरपंथियों के विरोध ने देश निकाला दिया था उसी विवादास्पद 'वॉटर' का टोरंटो ने करतल ध्वनि से स्वागत किया.

आठ से 17 सितंबर तक टोरंटो में आयोजित तीसवें टोरंटो अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सव का उदघाटन भारत में विधवाओं की परिस्थिति पर आधारित 'वॉटर' से हुआ और खचाखच भरा रॉय थामसन हॉल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा.

1938 में एक विधवा आश्रम में रह रही विधवाओं की यातनाओं और संघर्षों को दर्शाती इस फ़िल्म ने दर्शकों के मन को छू लिया.

इस फ़िल्म को बनाने में मेहता को काफ़ी दिक्कतें आईं. वाटर की शूटिंग 2000 में बनारस में शुरू तो हुई लेकिन सेट की तोड़-फोड़ और मेहता को मिली जान से मार डालने की धमकियों की वज़ह से इसे रद्द करना पड़ा.

लगभग चार साल विस्थापित रहने के बाद, इस फ़िल्म को दीपा मेहता ने एक नई जगह और नए किरदारों के साथ पुनर्जीवित किया.

दीपा मेहता कनाडा लौट आईं और दो फ़िल्में ‘बॉलीवुड हॉलीवुड’ और ‘रिपब्लिक ऑफ लव’ बनाने के बाद उन्होंने नए सिरे से 'वॉटर' की शूटिंग इस बार श्रीलंका में शुरू की.

वे कहती हैं, ''श्रीलंका में फ़िल्माना एक तरह से अच्छा रहा क्योंकि मैं वहाँ अपना पूरा ध्यान फ़िल्म पर केंद्रित कर पाई. मुझे राजनीति करने की ज़रूरत नहीं पड़ी.''

दीपा मेहता कहती हैं, ''वॉटर मेरी सबसे प्यारी फ़िल्म है क्योंकि इसका विषय अछूता है.''

हालाँकि फ़िल्म 1938 में आधारित है परंतु उनका कहना है,''आज भी बनारस, वृंदावन जैसी जगह पर विधवाओं का हाल देखकर मुझे बहुत बुरा लगता है.''

ख़ास मौक़ा

टोरंटो निवासी दीपा मेहता ने फ़िल्म के प्रदर्शन से पहले दर्शकों को संबोधित करते हुए कहा,''इस फ़िल्म को बड़े पर्दे पर दिखाया जाना एक चमत्कार है. टोरंटो में इसका उदघाटन होना मेरे लिए ख़ास खुशी की बात है.''

दीपा मेहता
दीपा मेहता की यह फ़िल्म भी विवाद के घेरे में रही हैं

हालाँकि फ़िल्म की निर्माण प्रक्रिया को विवाद से धक्का पहुँचा था लेकिन इसी बात से दर्शकों में उत्सुकता भी बनी रही और इसीलिए लोग बड़ी तादाद में इसे देखने पहुँचे.

महोत्सव में शामिल होने के लिए फ़िल्म के प्रमुख कलाकार जॉन अब्राहम, सीमा बिश्वास, लीसा रे और सरला भी उपस्थित थीं.

अपनी ‘माचो’ छवि से हटकर 'वॉटर' में जॉन अब्राहम ने एक गाँधीवादी का रोल किया है. वे कहते हैं कि इस फ़िल्म से जुड़ना उनके लिए ‘गर्व की बात है.’

पहले इस फ़िल्म से शबाना आज़मी और नंदिता दास जुड़ी थीं. स्वाभाविक है कि दीपा मेहता ने उनके स्थान पर जिन कलाकारों का चयन किया, उनके लिए मापदंड काफ़ी सख़्त था.

जहाँ सीमा बिश्वास इस अग्नि परीक्षा में खरी उतरीं. साथ ही लीसा रे की भी इसमें अहम भूमिका है. पर इस फ़िल्म की असली हीरोइन सरला हैं.

श्रीलंका के एक गाँव में रहने वाली आठ वर्षीया सरला हिंदी एवं अभिनय से अनभिज्ञ होते हुए भी बाल-विधवा की भूमिका बखूबी निभा गई हैं. यह सरला की पहली फ़िल्म है.

हर साल सितंबर के महीने में आयोजित होने वाला टोरंटो महोत्सव उत्तरी अमरीका में सबसे बड़ा माना जाता है. पिछले कुछ सालों में इसकी बढ़ती पहचान ने इसे अंतरराष्ट्रीय फ़िल्म महोत्सवों की श्रेणी में ला खड़ा किया है.

इस साल इसमें 52 देशों से चुनी गई 355 फ़िल्में दिखाई जाएंगी जिनमें 109 फ़ीचर फ़िल्मों का विश्व स्तर पर पहला प्रदर्शन होगा.

इनमें ऐश्वर्या राय के फ़िल्म ‘मिस्ट्रेस ऑफ स्पाइसेस’ और मल्लिका शेरावत की ‘मिथ’ शामिल है.

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