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शुक्रवार, 21 जुलाई, 2006 को 22:16 GMT तक के समाचार
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नसीर की प्रयोगधर्मी फ़िल्म 'यूँ होता...'

'यूं होता तो क्या होता' का एक दृश्य
कलाकारों के चयन में नसीरुद्दीन शाह ने अपनी पसंद को ही अहमियत दी है
करीब तीस साल तक फ़िल्मों और थिएटर में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुके नसीरूद्दीन शाह फ़िल्म ‘यूँ होता तो क्या होता’ के साथ निर्देशक के रूप में दर्शकों के सामने हैं.

अभिनय में बेहद प्रयोगधर्मी रहे नसीरुद्दीन शाह के निर्देशन में बनी इस पहली फ़िल्म के बारे में कई अटकलें लगाई गईं थीं.

कहानी से लेकर कलाकारों के चयन तक फ़िल्म में काफ़ी कुछ ऐसा है भी जो इसे एक धाकड़ कलाकार की फ़िल्म साबित कर सके.

शुक्रवार को यह फ़िल्म रिलीज़ हुई है.

अलग कहानी

इस फ़िल्म के निर्माता शब्बीर बॉक्सवाला कहते हैं, “हमने एक अलग तरह की फ़िल्म बनाने की कोशिश की. दर्शकों की हमेशा से यही शिकायत रहती है फ़िल्मों में वही घिसी-पिटी कहानियाँ होती है. लेकिन इस फ़िल्म से यह शिकायत नहीं होगी.”

9/11 की पृष्ठभूमि में बनी इस फ़िल्म में एक कहानी को चार अलग-अलग तरह से पिरोने की कोशिश की गई है.

नसीरुद्दीन शाह
"फ़िल्म की सफलता मेरे लिए अहम नहीं है लेकिन निर्माता के लिए ज़रूरी है. मेरे लिए यह बहुत ही दुख की बात होगी अगर दर्शक मेरी फ़िल्म को नकार देंगे"

वे कहते हैं, “फ़िल्म की सबसे बड़ी बात तो यह कि इसे नसीरूद्दीन शाह ने निर्देशित किया है जो खुद हर तरह के निर्माता-निर्देशकों और कलाकारों के साथ काम कर चुके हैं.”

नसीरूद्दीन शाह ने ख़ुद इस फ़िल्म के बारे में कहा कि इसमें चार किरदार है जो थ्रिलर, कॉमेडी, रोमांस और ड्रामा का प्रतिनिधित्व करते हैं.

शाह के मुताबिक़, इस फ़िल्म में उन्होंने ऐसे कलाकारों को लिया है जिन्हें वह एक कलाकार के रूप में काफ़ी इज़्ज़त देते हैं.

इनमें कोंकणा सेन शर्मा, इरफान खान, परेश रावल, जिमी शेरगिल, आएशा टाकिया के अलावा नसीरुद्दीन शाह की पत्नी रत्ना पाठक शाह भी हैं.

दर्शक करेगा फ़ैसला

नसीरुद्दीन शाह कहते हैं, “फ़िल्म की सफलता मेरे लिए अहम नहीं है लेकिन निर्माता के लिए ज़रूरी है. मेरे लिए यह बहुत ही दुख की बात होगी अगर दर्शक मेरी फ़िल्म को नकार देंगे.”

 इस फ़िल्म में कमर्शियल वैल्यू बिलकुल नहीं है. नसीरूद्दीन शाह के आर्ट बैकग्राउण्ड होने की साफ़ झलक इस फ़िल्म में दिखती है
विकास मोहन, फ़िल्म समीक्षक

देखना है कि लोगों को नसीरुद्दीन शाह की ये प्रयोगधर्मिता कितनी पसंद आती है.

ट्रेड पत्रिका सुपर सिनेमा के संपादक और फ़िल्म समीक्षक विकास मोहन को इस फ़िल्म से बहुत उम्मीदें थी लेकिन उनकी उम्मीदों पर यह फ़िल्म खरी नहीं उतर सकी.

वह कहते हैं, “इस फ़िल्म में कमर्शियल वैल्यू बिलकुल नहीं है. नसीरूद्दीन शाह के आर्ट बैकग्राउण्ड होने की साफ़ झलक इस फ़िल्म में दिखती है.”

वैसे विकास का कहना है कि नसीरूद्दीन शाह की वजह से दर्शकों में एक उत्सुकता ज़रूर है और इसकी वजह से मल्टीप्लेक्सेस में यह फ़िल्म चल सकती है.

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