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अमेरिकन आइडल से संजय की विदाई | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में भारतीय मूल के पॉप गायक संजय मालाकार ने अमेरिकन आइडल की प्रतियोगिता में काफ़ी उम्मीदें जगा दी थीं लेकिन वह इस ख़िताब तक पहुँचे बिना ही प्रतियोगिता से बाहर हो गए. 17 वर्षीय संजय मालाकार अपने बालों के ख़ास स्टाइल के लिए जाने जाते हैं और पॉप गायन की अपनी विशिष्ट शैली की बदौलत वह अमेरिकन आइडल प्रतियोगिता में में काफ़ी आगे आ गए थे. बुधवार को जब मतदान के ज़रिए उन्हें इस प्रतियोगिता से बाहर किया गया तो उनकी आँखें भर आईं, हालाँकि उन्होंने भर्राए गले से इतना ज़रूर कहा कि इस प्रतियोगिता में हिस्सा लेना उनके लिए अनोखा तजुर्बा था. अमरीका में भारतीय समुदाय के लोगों ने ख़ासतौर पर संजय की जीत की कामना की थी और बहुत से युवा उनके सुर में सुर मिलाने की कोशिश कर रहे थे. बुधवार को जब इस शो में हिस्सा लेने वालों के लिए पसंद ज़ाहिर करने वाले वोट माँगे गए तो संजय मालाकार को सबसे कम वोट मिले जिसकी वजह से वो इस प्रतियोगिता से बाहर हो गए. हालाँकि प्रतियोगिता से बाहर होते समय उन्होंने अपना एक और गीत गाया जिसका शीर्षक था - समथिंग टू टॉक अबाउट. संजय मालाकार के बालों का अंदाज़ ख़ासतौर से मीडिया के आकर्षण का केंद्र बना और उनके हजा़रों प्रशंसकों ने आख़िरी क्षण तक उनकी जीत की कामना की. उनमें से कुछ प्रशंसकों ने तो यहाँ तक उम्मीद कर डाली थी कि अपनी कमज़ोर आवाज़ के बावजूद संजय मालाकार मई में होने वाले फ़ाइनल तक ज़रूर पहुँच पाएंगे. संजय मालाकार के कुछ प्रशंसकों का तो यहाँ तक कहना था, "संजय बहुत ख़ूबसूरत हैं, वह युवा हैं और युवा लड़के लड़कियाँ संजय को बहुत पसंद करते हैं." संजय के कुछ प्रशंसकों का कहना था, "हम तुमसे वादा करते हैं, हम तुम्हें भुला नहीं पाएंगे." संजय की आवाज़ को हालाँकि बहुत दमदार नहीं माना गया लेकिन वह अपने बालों और मुस्कुराने के अंदाज़ से बहुत से प्रशंसक बनाने में कामयाब हो गए थे. उन्होंने जो भी गाने गाए उन पर युवाओं में चर्चा ज़रूर होती थी. यह कहने की तो ज़रूरत ही नहीं है कि संजय मालाकार को वाशिंगटन में रहने वाले परिवार और दोस्तों का भरपूर प्यार और समर्थन मिल रहा था. | इससे जुड़ी ख़बरें लंदन के मंच पर गांधी का सत्याग्रह17 अप्रैल, 2007 | पत्रिका ये हम नहीं... एक तस्वीर14 अप्रैल, 2007 | पत्रिका अमरीका में बढ़ रहा है हिंदी का दायरा12 अप्रैल, 2007 | पत्रिका दो देशों के बीच बँटे कलाकारों की प्रदर्शनी11 अप्रैल, 2007 | पत्रिका डिज़ाइनर आनंद जॉन ज़मानत पर रिहा05 अप्रैल, 2007 | पत्रिका डिज़ाइनर आनंद अमरीका में गिरफ़्तार15 मार्च, 2007 | पत्रिका एनआरआई बाज़ार ने बदले समीकरण03 फ़रवरी, 2007 | पत्रिका परदेस में जगह की तलाश...नेमसेक02 फ़रवरी, 2007 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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