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परदेस में जगह की तलाश...नेमसेक | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
'मिसिसिपी मसाला', 'सलाम बांबे' और 'मानसून वेडिंग' जैसी फ़िल्मों की निर्माता मीरा नायर की ताज़ा फ़िल्म 'द नेमसेक' का गुरूवार को कोलकाता में प्रीमियर हुआ है और इस फ़िल्म को आगामी मार्च में भारत और अमरीका में रिलीज़ करने की तैयारियाँ हैं. 'द नेमसेक' दो अलग-अलग संस्कृतियों में तालमेल बिठाने की जद्दोजहद से गुज़रती एक आम बंगाली युवती की कहानी है. युवती एक प्रवासी भारतीय से शादी के बाद कोलकाता से सीधे अमरिका के न्यूयार्क शहर पहुँच जाती है. कोलकाता और न्यूयॉर्क की पृष्ठभूमि में फ़िल्माई गई 'द नेमसेक' के प्रीमियर में संदीप रे और अपर्णा सेन जैसे बड़े फ़िल्मकारों के अलावा इस फ़िल्म के कलाकार तो थे ही, वे लोग भी थे जो मई 2005 में कोलकाता में इस फिल्म की शूटिंग के दौरान इससे जुड़े रहे थे. इस मौके पर अमरीकी लेखिका झुंपा लाहिड़ी भी मौजूद थीं. यह फ़िल्म लेखिका झुंपा लहिड़ी के बहुचर्चित उपन्यास 'द नेमसेक' पर आधारित है. फ़िल्म में मुख्य भूमिका में इरफ़ान ख़ान, तब्बू और काल पेन हैं. प्रीमियर के मौके पर काल पेन तो नहीं आ सके लेकिन बाकी अभिनेता मौजूद थे. तब्बू एक फ़िल्म में मध्यवर्गीय बंगाली परिवार की युवती की भूमिका में हैं, जिसकी शादी प्रवासी भारतीय इरफ़ान ख़ान से होती है. शादी के बाद न्यूयार्क की भागदौड़ और व्यस्तता के बीच सामंजस्य बिठाने की कोशिश करती असीमा गांगुली यानी तब्बू की मनोदशा का फ़िल्म में बखूबी चित्रण किया गया है. पूरी कहानी तब्बू और इरफ़ान के आसपास ही घूमती है. मीरा कहती हैं, "कहानी कोलकाता से ही शुरू हुई थी इसलिए सबसे पहले यहीं इसके प्रीमियर का फ़ैसला किया गया." मीरा ने प्रीमियर के मौके पर कहा, "नेमसेक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसने मुझे उन दो शहरों- कोलकाता और न्यूयार्क को एक सूत्र में पिरोने की ताक़त दी जहाँ मैं पली-बढ़ी." वे कहती हैं, "इन दोनों शहरों का ऐसे चित्रण किया गया है मानों दोनों एक ही हों. यही नेमसेक का अर्थ है." नायर कहती हैं, "यह फ़िल्म मेरे जीवन का भी आईना है. मैंने प्रवासी भारतीय परिवार और विदेश में अपनी पहचान तलाशती उनकी दूसरी पीढ़ी की दिक्कतों को इसमें दिखाने का प्रयास किया है." दूसरी पीढ़ी के इस युवक की भूमिका काल पेन ने निभाई है, जो बाद में अपना नाम बदल कर कालपेन मोदी कर लेता है. उम्मीदें और सराहना झुंपा लहिड़ी मीरा की सराहना करते हुए कहती हैं, "मेरे उपन्यास पर इतनी अच्छी फ़िल्म बन सकती है, यह इसे देखे बिना समझना कठिन है."
फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने वाली तब्बू कहती हैं, "फ़िल्म के प्रदर्शन के पहले मुझे यही चिंता खाए जा रही थी कि क्या मैं एक बंगाली युवती की भूमिका से न्याय कर सकी हूँ?" तब्बू कहती हैं, "नेमसेक का उनके लिए ख़ास महत्व इसलिए है कि यह 'आबार अरण्ये' के बाद मेरी दूसरी बाँग्ला फ़िल्म है और मैं बंगाली भी नहीं हूँ." मीरा नायर तब्बू की प्रशंसा करते हुए कहती हैं, "तब्बू एक असाधारण अभिनेत्री हैं, जो असीमा गांगुली की भूमिका में पूरी तरह रच-बस गई हैं." फ़िल्म के कुछ संवाद बाँग्ला में हैं तो कुछ अमरिकी अंग्रेज़ी में. पटकथा लिखी है सोनी तारापोरवाला ने और संगीत दिया है नितिन साहनी ने. मीरा ने इस फ़िल्म को दक्षिण भारतीय भाषाओं में डब करने का भी फ़ैसला किया है. वे कहती हैं, "अंग्रेज़ी तो जस की तस रहेगी, सिर्फ बाँग्ला वाला हिस्सा दूसरी भाषाओं में डब कर दिया जाएगा." मीरा कहती हैं, "मैं कामयाब फ़िल्में बनाती हूँ और इनमें लगे पैसे मेरे पास वापस नहीं आते. लेकिन जब तक मेरे पास इतना पैसा है कि मैं अपनी मर्जी से काम कर सकूं, तब तक कोई दिक्कत नहीं है. यही कामयाबी की मेरी परिभाषा है." | इससे जुड़ी ख़बरें इस वर्ष बेहतर शुरुआत कर सकता है बॉलीवुड06 जनवरी, 2007 | पत्रिका 'कॉमेडी फ़िल्में भी करना चाहता हूँ'07 नवंबर, 2006 | पत्रिका ऑस्कर की सरगर्मी, दर्शकों की समस्या01 जनवरी, 2006 | पत्रिका वन डॉलर करी - वाकई चीप!25 सितंबर, 2005 | पत्रिका मीरा की वैनिटी फ़ेयर फ़िल्म रिलीज़01 सितंबर, 2004 | पत्रिका रूश्दी लिखेंगे कहानी, प्रेमिका हीरोइन15 जनवरी, 2004 | पत्रिका भारत के बाहर का भारत31 अक्तूबर, 2003 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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