|
अमरीका में बढ़ रहा है हिंदी का दायरा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में 11 सितंबर के हमले के बाद दक्षिण एशियाई भाषाओं ख़ासकर हिंदी और उर्दू को ज़्यादा बढ़ावा दिया जा रहा है और इसके नतीजे भी देखने को आ रहे हैं. अमरीका के सेंट लुईस स्थित वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के हिंदी भाषा और भाषा विज्ञान पढ़ाने वाले एमजे वारसी का मानना है कि दक्षिण एशियाई लोगों को उनकी भाषा सीखने के लिए बढ़ावा देने का मक़सद उन्हें उनकी भाषा में ही समझाना है. अमरीकी सरकार का मानना है कि इस आधार पर वह दक्षिण एशियाई लोगों के साथ ज़्यादा मेल-मिलाप हो सकता है और वह अपनी बात आसानी से लोगों को समझा पाएगी. रुचि एमजे वारसी का मानना है कि अमरीकी नीतियों के कारण ही सही लेकिन विदेशों में रहने वाले लोगों में भी अपनी भाषा के प्रति रुचि बढ़ी है. एमजे वारसी ने अमरीका में हिंदी पत्रकारिता भी पढ़ाई है और उनका मानना है कि अब लोग ज़्यादा से ज़्यादा भाषा जानने को लेकर काफ़ी उत्सुक हैं. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के गोल्ड मेडलिस्ट और पश्चिम बंगाल उर्दू एकेडमी से पुरस्कार प्राप्त एमजे वारसी ने भाषा और संचार पर पुस्तक भी लिखी है जो अमरीका के साथ-साथ भारत के कई संस्थाओं में पढ़ाई भी जाती है. बीबीसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "भाषा के प्रति लोगों का उत्साह इसी से पता चलता है कि पिछले वर्ष 4500 छात्रों को हिंदी और उर्दू में स्कॉलरशिप दी गई थी." उनका मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती साख के कारण भी अमरीका में हिंदी भाषा को बढ़ावा मिल रहा है. उन्होंने कहा कि भारत लगातार एक आर्थिक शक्ति के रूप में आगे बढ़ रहा है और अमरीका अब भारत की अनदेखी नहीं कर सकता. | इससे जुड़ी ख़बरें लंदन में हिंदी वेब पत्रकारिता पर बातचीत30 मार्च, 2007 | पत्रिका विदेशों में पहचान बढ़ रही है हिंदी की09 फ़रवरी, 2007 | पत्रिका हिंदी के अख़बारों की दुनिया09 फ़रवरी, 2007 | पत्रिका भारत में क्षेत्रीय सिनेमा की भूमिका05 फ़रवरी, 2007 | पत्रिका मातृभाषा बनाम सपनों की भाषा01 दिसंबर, 2006 | पत्रिका लंदन में बिखरता हिंदी-उर्दू तर्जुमे का रंग22 नवंबर, 2006 | पत्रिका अंग्रेज़ी पर गर्व और हिंदी पर शर्म?26 अक्तूबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||