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लंदन में हिंदी वेब पत्रकारिता पर बातचीत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
प्रिय पाठको, बहुत दिन के बाद आपसे संबोधित हूँ. लेकिन इस बीच अतिथि संपादक असग़र वजाहत और मेरे सहयोगी विनोद वर्मा लगातार आपसे संपर्क बनाए रहे. अभी पिछले दिनों जब लंदन में भारतयीय उच्चायोग में हिंदी और संस्कृति अधिकारी राकेश दुबे ने उच्चायोग आकर वहाँ के अधिकारियों से वेब पत्रकारिता पर चर्चा करने का आमंत्रण दिया तो एक सुखद आश्चर्य हुआ. अब तक पत्रकारिता के छात्रों से कार्यशालाओं के माध्यम से इस विषय पर कई बार बातचीत हुई है लेकिन विदेश में कार्यरत भारतीय अधिकारियों से इस बारे में चर्चा एक नया अनुभव था. इन अधिकारियों की अपनी जिज्ञासाएँ थी. हिंदी में काम करना क्या सचमुच संभव है? हिंदी टाइपिंग कितनी दुरूह है और कैसे सीखी जा सकती है? और यह कि हिंदी की अच्छी वेबसाइट्स कौन सी हैं? हिंदी कंप्यूटर की उपयोगिता लंदन में बसे वरिष्ठ साहित्यकार और कथा यूके के संयोजक तेजेंद्र शर्मा और मैंने अपने-अपने तरीक़े से हिंदी कंप्यूटर की उपयोगिता और उसकी सुलभता पर विचार व्यक्त किए. लंदन में हिंदी के प्रचार और प्रसार में भारतीय उच्चायोग और कथा यूके महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं. समय-समय पर गोष्ठियों और कार्यशालाओं का आयोजन और हिंदी में लिखने वालों को प्रोत्साहन सचुमच उत्साहवर्धक है. ऐसी ही संस्थाएँ और व्यक्ति विदेश में भी हिंदी की गरिमा और उसकी पहचान बरक़रार रखे हुए हैं. संगोष्ठी में हिस्सा लेने पर यह भी अंदाज़ा हुआ कि हिंदी के प्रति लगाव और उससे जुड़ाव केवल हिंदीभाषियों की ही थाती नहीं है. हिस्सा लेने वालों में कुछ ऐसे लोग भी दिखे जिनकी मातृभाषा हिंदी नहीं है लेकिन वे भी हिंदी से जुड़े हुए हैं. जैसे, भारतीय उच्चायोग में समन्यवय मंत्री राजत्व बागची जिनकी मातृभाषा बांग्ला है लेकिन हिंदी से उनका लगाव बना हुआ है. यही कुछ कारण हैं जो विदेश में देश का वियोग हावी नहीं होने देते. | इससे जुड़ी ख़बरें बेवकूफ़ नहीं हैं दर्शक-पाठक-श्रोता03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस दुनियाभर में विशेष स्थान है हिंदी फ़िल्मों का03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस उज्जवल है भारत का भविष्य03 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस मुंबई विश्वविद्यालय में वेब कार्यशाला10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस जयपुर में पत्रकारिता कार्यशाला संपन्न11 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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