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जयपुर में पत्रकारिता कार्यशाला संपन्न | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
"टीवी या अन्य माध्यमों से जुड़ने के बजाए मैं वेब माध्यम के लिए ही काम करना चाहता हूँ क्योंकि इस माध्यम के ज़रिए पलक झपकते ही दुनिया के हर कोने में अपनी बात पहुँचाई जा सकती है," यह कहना था राजस्थान विश्वविद्यालय में पत्रकारिता पाठ्यक्रम के एक छात्र का. बीबीसी हिंदी ऑनलाइन और वेबदुनिया की ओर से राजस्थान विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग में ऑनलाइन पत्रकारिता पर कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह पहला मौका था जब यहाँ के पत्रकारिता के छात्र वेब पत्रकारिता के बारे में इस तरह का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे थे. संचार केंद्र में आयोजित इस कार्यशाला में पत्रकारिता पाठ्यक्रम के छात्रों के अलावा कई पत्रकारों ने भी हिस्सा लिया. कार्यशाला में प्रशिक्षुओं को वेब पत्रकारिता के नए-नए आयामों, संभावनाओं और इसके भविष्य के बारे में जानकारी दी गई. कार्यशाला में बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की संपादक सलमा ज़ैदी ने कहा, "आने वाले समय में वेब पत्रकारिता का क्षेत्र संभावनाओं से भरा होगा और इसके लिए पत्रकारिता के क्षेत्र में संभावनाएँ तलाश रहे लोगों को तैयार रहने की ज़रूरत है." इस अवसर पर बोलते हुए वेबदुनिया के संपादक जयदीप कर्णिक ने प्रशिक्षुओं को बताया कि किस तरह से वेब पत्रकारिता प्रिंट और इलेक्ट्रानिक माध्यम की पत्रकारिता से भिन्न है. कार्यक्रम में भाग ले रहे प्रशिक्षुओं ने वेब पत्रकारिता के बारे में अपने कई सवाल आए हुए अतिथियों से पूछे. बीबीसी हिंदी के राजस्थान संवाददाता नारायण बारेठ ने इस अवसर पर कहा कि वेब माध्यम के ज़रिए दुनिया के किसी भी कोने में बैठे अपने पाठक तक जितनी तेज़ी से समाचार और जानकारी पहुँचाई जा सकती है, वो बाक़ी माध्यमों में शायद संभव न हो सके. नैतिकता का सवाल कार्यशाला में आए विद्यार्थियों ने इस अवसर पर भारतीय मीडिया की परिवक्वता जैसे विषय पर चर्चा भी की. साथ ही पत्रकारिता में नैतिकता के सवाल पर गरमा-गरम बहस भी हुई.
टीवी चैनलों में अंतरराष्ट्रीय महत्व के विषयों की अनदेखी से लेकर अनावश्यक विषयों को अधिक समय दिए जाने की भी आलोचना की गई. कार्यशाला में हिस्सा ले रहे लोगों को वेब माध्यम के लिए लेखन की बारीकियों से अवगत कराया गया और इसके बाद समाचार माध्यमों की परिपक्वता और मेरी नज़र में 2010 का भारत जैसे विषयों पर लेख भी लिखवाए गए. इस कार्यशाला में हिस्सा ले रहे लोगों को बीबीसी हिंदी डॉट कॉम और वेबदुनिया की ओर से संयुक्त रूप से प्रमाणपत्र भी दिए गए. कार्यशाला की शुरुआत में अधिकतर प्रतिभागियों ने प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों में करियर बनाने की बात कही पर वेब पत्रकारिता कार्यशाला के बाद अधिकतर प्रशिक्षु वेब माध्यम को ही अपनी आगे की दिशा बनाने की बात कहते नज़र आए. कार्यक्रम का संचालन राजस्थान विश्वविद्यालय में पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर संजीव भनावत ने किया. | इससे जुड़ी ख़बरें जामिया में ऑनलाइन पत्रकारिता कार्यशाला09 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस बीबीसी की पत्रकारिता कार्यशाला इंदौर में06 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस भोपाल में हुई पत्रकारिता कार्यशाला 08 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस अपेक्षा से अधिक अच्छा रहा यह अनुभव10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस आईआईएमसी में वेब पत्रकारिता कार्यशाला10 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस मुंबई विश्वविद्यालय में वेब कार्यशाला10 जनवरी, 2007 | भारत और पड़ोस | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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