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बीबीसी की पत्रकारिता कार्यशाला इंदौर में | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बीबीसी हिंदी डॉट कॉम और बेव दुनिया ने मिलकर इंटरनेट पत्रकारिता पर इंदौर में एक कार्यशाला का आयोजन किया. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में पत्रकारिता के छात्र-छात्राओं को दिन भर इंटरनेट पत्रकारिता पर जानकारियाँ दी गईं. भारत के चुनिंदा पत्रकारिता संस्थानों में इंटरनेट पत्रकारिता पर आयोजित की जा रही कार्यशालाओं की कड़ी में यह पहली कार्यशाला थी. इसके बाद भोपाल में एक कार्यशाला और दिल्ली में दो कार्यशालाएँ आयोजित की जाएँगी. इन कार्यशालाओं का उद्देश्य पत्रकारिता के छात्रों को ‘ऑनलाइन पत्रकारिता’ के व्यावहारिक पहलुओं से अवगत करवाना है. कार्यशाला सोमवार को हुई कार्यशाला में पत्रकारिता विभाग के 35 छात्रों ने भाग लिया. कार्यशाला की शुरुआत में बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की संपादक सलमा ज़ैदी ने बीबीसी हिंदी डॉट कॉम की विशेषताओं का ज़िक्र किया और वेबसाइट की कार्यप्रणाली का ब्यौरा दिया.
उन्होंने कार्यशाला की ज़रुरत पर कहा, “हमें लगा कि मीडिया से जुड़े या जुड़ने जा रहे लोग ऑनलाइन पत्रकारिता को समझ नहीं पा रहे हैं इसलिए इन कार्यशालाओं का आयोजन किया जा रहा है.” इसके बाद वेबदुनिया डॉट कॉम के संपादक जयदीप कार्णिक ने अपनी वेबसाइट का की जानकारी देते हुए बताया कि हिंदी का पहला पोर्टल होने से लेकर अब तक का सफ़र कैसे तय किया गया. इंदौर में पहली कार्यशाला आयोजित करने के बारे में जयदीप ने कहा, “इसी मिट्टी से ही हमनें दुनिया में हिंदी की पताका फहराई इसलिए बीबीसी के साथ हमनें मिलकर तय किया कि कार्यशाला की शुरुआत भी यहीं से होनी चाहिए.” छात्र-छात्राओं को इंटरनेट पत्रकारिता के मूलभूत तत्वों की जानकारी भी दी गई और यह बताने का प्रयास किया गया कि समाचार पत्रों और टेलीविज़न की पत्रकारिता से किस तरह इंटरनेट की पत्रकारिता अलग है. वेब दुनिया की सीमा पांडे ने बताया कि ऑनलाइन सामग्री किस तरह तैयार होती है और वेब साइट पर उसे लाने के लिए किस रास्ते से गुज़रना होता है. इसके बाद छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन में प्रकाशन के लिए एक आलेख लिखने को कहा गया. इसके लिए ‘2020 का भारत’ और ‘हिंदी के प्रसार में सिनेमा का योगदान’ विषय दिए गए थे. इन आलेखों में से सर्वश्रेष्ठ का चयन करने के बाद उसे बीबीसी हिंदी डॉट कॉम और वेब दुनिया पर प्रकाशित किया जाएगा. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ एमएस परमार ने इस कार्यशाला के आयोजन के लिए धन्यवाद दिया. छात्र-छात्राओं को अंत में प्रमाण पत्र वितरित किए गए. | इससे जुड़ी ख़बरें बीबीसी हिंदी और वेबदुनिया की कार्यशालाएँ05 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस 'रोज़गारोन्मुख पाठ्यक्रम बनाए जाएँ'05 मार्च, 2006 | भारत और पड़ोस युवाओं को ध्यान में रखकर नया कार्यक्रम18 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस बीबीसी समाचार यानी पत्थर की तेज़ धार16 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस 'बिहार-झारखंड की यात्रा कभी नहीं भूलूंगा'15 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस कटनी में शोषण पर गरमागरम बहस11 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस विदेशियों का मोहताज नहीं है विदिशा09 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस फिर चला बीबीसी हिंदी का कारवाँ08 मार्च, 2005 | भारत और पड़ोस इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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