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सोमवार, 03 अप्रैल, 2006 को 11:51 GMT तक के समाचार
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उज्जवल है भारत का भविष्य

कार्यशाला
जामिया मिलिया पत्रकारिता के स्थापित संस्थानों में है
'मेरा एक सपना है...', इन शब्दों से भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने एक नए, स्वतंत्र, गणतंत्र और समृद्ध भारत की तस्वीर पेश की थी.

समय गुज़रा, युग बीता, 20वीं सदी ख़त्म हुई और भारत ने 21वीं सदी में क़दम रखा.

क़रीब 200 वर्षों तक अंग्रेज़ों की गुलामी झेलने के बाद भारत एक स्वतंत्र गणराज्य के रूप में दुनिया के दृश्य पटल पर उभरा.

पंचवर्षीय योजनाएं बनीं. रोटी, कपड़ा और मकान जैसी बुनियादी चीज़ें सभी को मुहैया हों. इसकी पुरज़ोर कोशिशें की गईं. कृषि, विज्ञान वाणिज्य और तकनीक के क्षेत्र में धीरे ही सही लेकिन भारत ने अपने क़दम जमाए.

लोकतांत्रिक ढंग से चुनाव संपन्न कराकर पूरे देश को अपने ही लोगों द्वारा प्रतिनिधित्व देने का चलन हुआ. विभिन्न दलों ने देश में अपनी सरकारें चलाईं.

वर्ष 1997 में जब भारत ने अपनी स्वतंत्रता के पचास वर्ष पूरे किए तो पूरी दुनिया की नज़र इस ओर रही कि भारत ने इन पचास वर्षों में क्या खोया, क्या पाया. कितनी प्राप्ति की? कितना विकास हुआ?

भारत को इन वर्षों में शायद 50 नंबर मिले.

सफलता-विफलता

कहीं सफलता मिली तो कहीं विफलता हाथ लगी.

शिक्षा का स्तर बढ़ा, लेकिन बेरोजगारी भी बढ़ी. भारत का मध्यम वर्ग बड़ी तेज़ी से उभरा तो ग़रीबी रेखा में जीने वालों की तादाद में वृद्धि हुई.

तकनीक के क्षेत्र में विकास हुआ लेकिन अभी भी भारत के गांवों में बिजली और सड़क, एक सपना मात्र है. कुल मिलाकर कहीं ख़ुशी मिली तो कहीं गम नसीब हुआ.

अब सवाल है वर्ष 2020 का भारत कैसा हो? क्या संभावनाएं है? क्या चुनौतियां हैं? क्या होगी भारत की तस्वीर अगले बीस वर्षों में?

वर्ष 2020 का भारत, एक ताकतवर और समृद्ध राष्ट्र के रूप में अपनी पहचान बनाएगा. अगर आज के दौर को एक संकेत मान लें तो भारत का भविष्य बिल्कुल उज्जवल होगा.

बानगी

जिसके पास ऊर्जा है उसके पास शक्ति है और उद्योग के लिए दरवाज़े खुले हैं.

हाल के भारत-अमरीका परमाणु ऊर्जा संधि ने भारत को ऐसे मुकाम पर पहुंचाया है जहां से भारत उद्योग को आगे ले जाएगा, रक्षा क्षेत्र में अपनी धाक जमाएगा और एक आर्थिक शक्ति के रूप में उभरेगा.

भारत में ज्ञान का भंडार है, विशेषकर कंप्यूटर के क्षेत्र में. हैदराबाद, बंगलौर में इन्फ़ोसिस, विप्रो और सत्यम जैसी कंपनियों ने विश्व स्तर पर अपना बाज़ार फैलाया है.

यहां के विद्वान छात्र दूसरे देशों में अपना योगदान दे रहे हैं.

आज भारत की सबसे बड़ी शक्ति है इसका मध्यम वर्ग. इस वर्ग के पास ख़रीदने की क्षमता है जो विश्व बाज़ार में बहुत मायने रखता है.

भारत उपभोक्ता के संदर्भ में एक बड़े बाज़ार के रूप में उभर रहा है.

एक कृषि प्रधान देश के लिए इस वर्ग में उन्नति एक बड़ी उपलब्धि है. इससे गांवों में रहने वाली जनता की ग़रीबी में गिरावट होगी.

उन्नत किस्म की तकनीक गांवों में उपलब्ध हो रही है. बिजली मुहैया कराया जा रही है. भारत निर्माण योजना के तहत लोगों को रोज़गार मुहैया कराया जा रहा है. ग़रीबी रेखा से लोग मध्यम वर्ग की श्रेणी में आ रहे हैं.

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