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ओम निश्चल के गीत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गुनगुनी धूप है गुनगुनी धूप है
एक तन एक मन नींद में हम मिलें चिट्ठियाँ जो लिखीं दो घड़ी बैठ कर *****
छुआ मुझे तुमने रूमाल की तरह थके हुए काँधे पर फिर चंचल चैत की बीत गए दिन उन्मन बहुत दिन हुए **** एक साँस गंध नदी सी कौन भला गूँथ गया
एक साँस गंध नदी सी एक प्यार सोन पिरामिड सा एक आस गरम धूप सी ******************* |
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