BBCHindi.com
अँग्रेज़ी- दक्षिण एशिया
उर्दू
बंगाली
नेपाली
तमिल
शुक्रवार, 09 फ़रवरी, 2007 को 09:34 GMT तक के समाचार
मित्र को भेजेंकहानी छापें
राहुल राजेश की कविताएँ
बंद आँखों में

बंद आँखों में
अतीत का कोलाहल है
स्मृतियों की धकमपेल है
डूबती उतराती छवियाँ हैं
कभी न पिघलने वाले बर्फ़ की तरह
जमा हुआ दुख है

एक ठहर गया वक़्त है
एक चटक गया सपना है
इधर-उधर बिखर गए रंग हैं
एक खाली पड़ा कैनवास है
एक धुंधली-सी अधूरी तस्वीर है
कभी न बहने वाले आँसू के चंद कतरे हैं
एक ठहरी हुई हँसी की
छिटकी हुई चाँदनी है

बंद आँखों में वह सब कुछ है
जो खुली आँखों में नहीं दिखता
मसलन, खुली आँखों में किसी के लिए
धड़कता प्यार नहीं दिखता
जीने की झुंझलाहट दिखती है
खुली आँखों में किसी का इंतज़ार नहीं दिखता
कहीं जल्दी पहुँच जाने की जल्दी दिखती है

रेखांकन-लाल रत्नाकर

खुली आँखों में
सपना नहीं, सुख की नौटंकी है
बेचैनी नहीं, बाज़ार है
बंद आँखों में ऐसा कुछ भी नहीं
जिससे मुझे डरने की ज़रूरत पड़े
बंद आँखों में ऐसा कुछ भी नहीं
जिससे जीने की इच्छा में कोई कमी आए

खुली आँखों में ऐसा कुछ भी नहीं
जिससे बंद आँखों की दुनिया मेल खाए...

****

ख़िलाफ़

एक लड़की है जो हर पल
करती है प्रार्थना-हे भगवान
फिर न हो ट्रेड टॉवर जैसा आतंकी हमला

उसका प्रेमी अभी-अभी गया है यूएसए

एक लड़की हर दिन सिर नवाती है
मंदिर के द्वार पर- हे भगवान, फिर न ढहे
कहीं मुसलमानों पर कहर

उसका प्रेमी करता है नौकरी अहमदाबाद में

एक लड़का है जो रोज़ मत्था टेकता है
गुरुद्वारे में- हे वाहे गुरु, आज भी न फटे
कहीं कोई बारुदी सुरंग

उसकी प्रेमिका रोज़ जाती है खेत में घास काटने
कूपवाड़ा के किसी गाँव में

एक लड़की है असम की जो हर शाम
करती है प्रार्थना- हे माँ कामख्या, फिर न हो
कारगिल जैसा कोई युद्ध

उधर सीमा पर तैनात एक फौजी
रखता है अपनी प्रेमिका की तस्वीर पिछली जेब में
क्या पता कब किधर से कोई गोली आए दनदनाती
और उतर जाए सीने में

एक लड़का है जो चाहता है
जल्दी से जल्दी पहुँच जाए उसकी प्रेमिका के
गाँव में बिजली

वह हर रात उसे लिखती है ख़त
ढिबरी की रौशनी में

एक लड़का नित दिन करता है प्रार्थना
हे भगवान, झारखंड को न बनाओ दूसरा बोडोलैंड
उसकी प्रेमिका साल भर पहले आई है राँची

एक मैं हूँ जो दिन-रात कर रहा हूँ प्रार्थना
अपनी प्रेमिका के पिता की बेहतर सेहत के लिए

एक लड़की है जो प्रेम में लगातार गुनगुनाती
रहती है कवि गुरु का यह गीत-
इस देश की माटी, इस देश का जल
प्रभु सरस बने, प्रभु सरस बने...

इतनी सारी सच्ची प्रार्थनाओं के बावजूद
तनी है बंदूकें
उठे हैं खंजर
बंद हैं दरवाज़े

गोलबंद है पूरी की पूरी दुनिया
प्रेम करने वालों के ख़िलाफ़.

*****

प्रेम में जीवन

रेखांकन - लाल रत्नाकर

प्रेम में हम ऐसे क्षणों को
जी रहे होते हैं
जो घटित नहीं होते
जीवन में कभी

प्रेम में हम ऐसे दृश्यों को
जी रहे होते हैं
जो कभी नहीं दिखते जीवन में

प्रेम में हम ऐसी दुनिया को
जी रहे होते हैं
जो कभी नहीं बनती

प्रेम में हम ऐसे समय को
जी रहे होते हैं जिसकी प्रतीक्षा
बनी रहती है उम्र भर

प्रेम में हम ऐसे प्रेम को
जी रहे होते हैं

जो कभी नहीं आता जीवन में!

****

आतंक

जैसे
बिना इश्तेहार वाली
नहीं बची
कोई दीवार

नहीं बचे
कुर्सी पर
ईमानदार लोग

नहीं बची उनमें
लज्जित होने की
नैतिकता भी.

****************************
राहुल राजेश
सीएमपीएफ़, डी - III
धनबाद, झारखंड
email - rahulrajesh_2006@yahoo.co.in

विष्णु नागर
सुपरिचित कवि विष्णु नागर की चार कविताएँ.
भगवत रावत
इस अंक में भगवत रावत की कुछ कविताएँ.
यश मालवीय के गीत
बीबीसी हिंदी पत्रिका में इस बार यश मालवीय के दो नवगीत.
इससे जुड़ी ख़बरें
राहुल राजेश की कविताएँ
01 फ़रवरी, 2007 | पत्रिका
पंकज पराशर की कविताएँ
19 जनवरी, 2007 | पत्रिका
बालस्वरूप राही की गज़लें
10 नवंबर, 2006 | पत्रिका
ज्ञानेंद्रपति की कविताएँ
16 नवंबर, 2006 | पत्रिका
विष्णु नागर की कविताएँ
23 नवंबर, 2006 | पत्रिका
नरेश शांडिल्य के दोहे
01 दिसंबर, 2006 | पत्रिका
सुर्ख़ियो में
मित्र को भेजेंकहानी छापें
मौसम|हम कौन हैं|हमारा पता|गोपनीयता|मदद चाहिए
BBC Copyright Logo^^ वापस ऊपर चलें
पहला पन्ना|भारत और पड़ोस|खेल की दुनिया|मनोरंजन एक्सप्रेस|आपकी राय|कुछ और जानिए
BBC News >> | BBC Sport >> | BBC Weather >> | BBC World Service >> | BBC Languages >>