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नरेश शांडिल्य के दोहे | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दोहे जागा लाखों करवटें, भीगा अश्क हज़ार * छोटा हूँ तो क्या हुआ, जैसे आँसू एक * मैं खुश हूँ औज़ार बन, तू ही बन हथियार * तू पत्थर की ऐंठ है, मैं पानी की लोच * मैं ही मैं का आर है, मैं ही मैं का पार * * पाप न धोने जाऊँगा, मैं गंगा के तीर * सब-सा दिखना छोड़कर, ख़ुद-सा दिखना सीख * ख़ाक जिया तू ज़िंदगी, अगर न छानी ख़ाक * बुझा-बुझा सीना लिए, जीना है बेकार * सोने-चाँदी से मढ़ी, रख अपनी ठकुरात * अपनी-अपनी पीर का, अपना-अपना पीर
* वो निखरा जिसने सहा, पत्थर-पानी-घाम * पिंजरे से लड़ते हुए, टूटे हैं जो पंख * जुगनू बोला चाँद से, उलझ न यूँ बेकार * बस मौला ज़्यादा नहीं, कर इतनी औक़ात * पानी में उतरें चलो, हो जाएगी माप * अपने को ज़िंदा रखो, कुछ पानी कुछ आग * शबरी जैसी आस रख, शबरी जैसी प्यास * जो निकला परवाज़ पर, उस पर तनी गुलेल * कटे हुए हर पेड़ से, चीखा एक कबीर * भूखी-नंगी झोंपड़ी, मन ही मन हैरान * हर झंडा कपड़ा फ़क़त, हर नारा इक शोर * सब कुछ पलड़े पर चढ़ा, क्या नाता क्या प्यार * हम भी औरों की तरह, अगर रहेंगे मौन * भोगा उसको भूल जा, होगा उसे विचार * लौ से लौ को जोड़कर, लौ को बना मशाल ********************* नरेश शांडिल्य | इससे जुड़ी ख़बरें विष्णु नागर की कविताएँ23 नवंबर, 2006 | पत्रिका बालस्वरूप राही की गज़लें10 नवंबर, 2006 | पत्रिका भगवत रावत की कविताएँ02 नवंबर, 2006 | पत्रिका अचला शर्मा की कुछ कविताएँ26 अक्तूबर, 2006 | पत्रिका असद ज़ैदी की तीन कविताएँ06 अक्तूबर, 2006 | पत्रिका जया जादवानी की दो कविताएँ28 सितंबर, 2006 | पत्रिका कीर्ति चौधरी की तीन कविताएँ22 सितंबर, 2006 | पत्रिका अरुण कमल की तीन कविताएँ14 सितंबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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