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जयकृष्ण राय तुषार के गीत | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक नए साल की उफ! गेहूँ की बाली पर बैठा आँगन में बँटकर ***** दो कोई गीत लिखा मौसम ने हरे-भरे खेतों में सरसों के अरसे बाद गाँव से आई हम फिर होंगे बदनाम ***** तीन मन ही मन खामोश क्या इस युग में हम सांझ ढले माँ के चौके चाँद-सितारों की छाया में *********************** |
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