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'बाबुल भी और काबुल एक्सप्रेस भी' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में जॉन अब्राहम का एक अलग स्थान है. मॉडलिंग से एक्टिंग का लंबा सफ़र उन्होंने तय तो किया है लेकिन उनके लिए ये आसान नहीं रहा है. इस महीने रवि चोपड़ा की बाबुल के अलावा यशराज फ़िल्म्स की काबुल एक्सप्रेस में भी जॉन अब्राहम दिखेंगे. जॉन का कहना है कि इन दोनों फ़िल्मों से दर्शक उनकी क्षमता जानेंगे कि जॉन बाबुल कर सकता है तो काबुल एक्सप्रेस भी. पिछले दिनों लंदन में फ़िल्म बाबुल के प्रोमोशन के दौरान उन्होंने बीबीसी हिंदी से कई विषयों पर खुल कर बात की. प्रस्तुत है इस बातचीत के कुछ अंश. बाबुल में अपनी भूमिका के बारे में बताइए. बाबुल में मेरी भूमिका काफ़ी रोमांटिक है. मैं एक साधारण व्यक्ति का किरदार निभा रहा हूँ, जो अपने प्यार के लिए कुछ भी कर सकता है. इस फ़िल्म में रानी मुखर्जी का कैरेक्टर है मिली का, जिसके साथ मुझे प्यार हो जाता है. आपने और कभी कई पारिवारिक फ़िल्में की है ये फ़िल्म कितनी अलग है दूसरी फ़िल्मों के मुक़ाबले. ये फ़िल्म मेरे लिए बिल्कुल अलग है. पहली बार मैं इतनी बड़ी कमर्शियल फ़िल्म कर रहा हूँ, जिसमें मेरे साथ इतने बड़े स्टार काम कर रहे हैं जैसे- अमिताभ बच्चन, सलमान ख़ान, हेमा मालिनी और रानी मुखर्जी. मैं तो हमेशा अलग-अलग किस्म की फ़िल्में करता रहा हूँ. जैसे काबुल एक्सप्रेस, वॉटर, ज़िंदा. गरम मसाला भी मेरे लिए एक अलग किस्म की फ़िल्म थी. जैसे फ़िल्में मैं अभी तक करता आया हूँ- बाबुल मेरे लिए एक अलग किस्म की फ़िल्म है. अमिताभ बच्चन के साथ पहले भी आपने काम किया है. कैसा अनुभव रहा उनके साथ काम करने का. अमिताभ बच्चन सेट पर काफ़ी सहयोग करते हैं. उनमें काफ़ी ऊर्जा है. वे हर शॉट के पहले मेरे साथ 20-30 बार रिहर्सल करते थे. मैं उनके साथ अपने को काफ़ी सहज महसूस करता हूँ. ऐसा लगता है कि मैं एक दोस्त के साथ काम कर रहा हूँ. सलमान ख़ान के साथ विवाद आपके विवाद की बातें सामने आई हैं. क्या हुआ था. कुछ बता नहीं सकता क्योंकि मुझे भी कुछ पता नहीं. धूम में आपने काम किया था लेकिन धूम:2 में आप नहीं हैं. बिपाशा धूम:2 में काम कर रही हैं. क्या कहेंगे आप? मैं तो सिर्फ़ ये कहूँगा कि मैं धूम में बाइक चलाना जानता था. शायद बिपाशा को बाइक चलानी नहीं आती. लेकिन धूम:2 में एक अलग स्टोरी है. आपकी बाबुल और काबुल एक्सप्रेस क़रीब-क़रीब साथ ही आ रही हैं. दोनों में काम करने का कैसा अनुभव था. बाबुल एक कमर्शियल हिंदी फ़िल्म है. जिसमें गाने हैं, रोमांस है. अच्छे लोकेशंस हैं. काबुल एक्सप्रेस बहुत ही अलग क़िस्म की फ़िल्म है. इस फ़िल्म को हमने अफ़ग़ानिस्तान में जाकर शूट की है. उसमें एक पाकिस्तानी एक्टर, अफ़गानी एक्टर और एक अमरीकी एक्ट्रेस हैं. इसमें गाने नहीं हैं. इसलिए दोनों फ़िल्मों में काम करने का अलग-अलग अनुभव रहा. सबसे अच्छी बात ये है कि दर्शकों को ये जानने का भी मौक़ा मिलेगा कि जॉन अब्राहम बाबुल भी कर सकता है और काबुल एक्सप्रेस भी. मेरे लिए, मेरे अलग-अलग फ़िल्मों में काम करने की क्षमता के लिए अच्छा रहेगा कि दोनों फ़िल्में चलें. जॉन आपकी फ़िल्म वॉटर भारत के मुद्दे से जुड़ी हुई है लेकिन ऑस्कर में उसे कनाडा की ओर से नामांकन मिला है. क्या कहेंगे आप?
जी, मैं तो इस पर कमेंट नहीं कर सकता हूँ. सिर्फ़ इतना ही कह सकता हूँ कि मेरे लिए अच्छा है कि फ़िल्म को नामांकन मिला है. लेकिन एक भारतीय विषय है अगर भारत की ओर से फ़िल्म को नामांकन मिलता तो बहुत अच्छा होता. बाबुल, काबुल एक्सप्रेस और सलाम-ए-इश्क़ के बाद अपनी आने वाली फ़िल्मों के बारे में बताइए. इन फ़िल्मों के बाद अनुराग कश्यप की नो स्मोकिंग है. इसके बाद श्रीराम राघवेंद्र की फ़िल्म है और एक फ़िल्म इम्तियाज़ अली की भी मेरे पास है. जॉन मॉडलिंग से एक्टिंग का आपका सफ़र रहा है. आज की तारीख़ में आप अपने को कहाँ पाते हैं? जी, अभी भी सीख रहा हूँ. लोग ये भूल जाते हैं कि इस इंडस्ट्री में मेरे सिर्फ़ तीन साल ही पूरे हुए हैं. अगर मुझे दो-तीन साल और अच्छा मौक़ा मिले, तो शायद और भी अच्छा काम कर सकूँगा. आज की तारीख़ में मेरा एक ही प्लस प्वाइंट है और वो मेरी फ़िल्मों के दर्शक. मेरे दर्शक हमेशा मेरा साथ देते हैं. बॉलीवुड में अपने पसंदीदा हीरो और हीरोईन के बारे में बताइए. हीरो में मेरे लिए सबसे पसंदीदा आमिर ख़ान हैं. हीरोईन में मेरी पसंदीदा हैं काजोल. वे मुझे बहुत अच्छी लगती हैं. आमिर ख़ान के साथ अगर फ़िल्म मिले, तो अच्छा होगा. मैं उनके साथ काम करना पसंद करूँगा. मुझे उनका काम बेहद पसंद है. | इससे जुड़ी ख़बरें मैडोना पर नज़र रखेंगे मानवाधिकार समूह02 दिसंबर, 2006 | पत्रिका करोड़ों से खेलने वालों का दिल02 दिसंबर, 2006 | पत्रिका लंदन में तमिल साहित्य का भंडार30 नवंबर, 2006 | पत्रिका किडमैन को सबसे ज़्यादा पैसे30 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'धूम-2 पुरानी कहानी का दोहराव नहीं'29 नवंबर, 2006 | पत्रिका कभी नायक तो कभी 'खलनायक' 28 नवंबर, 2006 | पत्रिका अभिषेक-ऐश्वर्या ने एकसाथ पूजा की27 नवंबर, 2006 | पत्रिका 'जेनिफ़र मुझे अगले जन्म में भी मिलेंगी'26 नवंबर, 2006 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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