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कभी नायक तो कभी 'खलनायक' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संजय दत्त एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं. अदालत का फ़ैसला आने के बाद सबकी नज़रें उनकी तरफ़ उठ गई हैं. आइए एक नज़र डालें उनके जीवन और करियर पर. संजय दत्त, बॉलीवुड का एक ऐसा अभिनेता जो रुपहले पर्दे पर पिछले 25 वर्षों से नायक बनकर चमकता रहा तो असल ज़िंदगी में ‘खलनायकी’ के कुछ बदनुमा दाग भी लगे. संजय दत्त फ़िल्म अभिनेता से राजनेता बने सुनील दत्त और नरगिस दत्त के पुत्र हैं. 47 वर्षीय पुत्र संजय दत्त को 1993 के सिलसिलेवार मुंबई बम धमाकों के मामले में विशेष टाडा अदालत ने दोषी पाया है. हालांकि अदालत ने उन्हें धमाकों की साज़िश रचने के आरोप से बरी कर दिया है लेकिन अपने घर में धमाका करने वालों के हथियार रखने का दोषी करार दिया है. ग़ौरतलब है कि 12 मार्च, 1993 को हुए इन धमाकों में 257 लोगों की मौत हो गई थी और 713 लोग घायल हुए थे. 1993 में इसके एक महीने बाद ही संजय दत्त को गिरफ़्तार कर लिया गया था और लगभग डेढ़ साल तक उन्हें जेल में रहना पड़ा. ‘बैड ब्वॉय’
वैसे यह पहला मामला नहीं था जब संजय दत्त ग़लत कारणों से सुर्खियों में आए. अपने कॉलेज के दिनों में ड्रग्स लेने के कारण भी उनकी छवि ‘बैड ब्वॉय’ की बनी. संजय दत्त नें 1981 में फ़िल्म ‘रॉकी’ के ज़रिए बॉलीवुड में क़दम रखा और अब तक सौ से भी अधिक फ़िल्मों में काम कर चुके हैं. ‘रॉकी’ का निर्देशन उनके पिता सुनील दत्त ने ही किया था. इसी साल संजय दत्त की माँ और अपने ज़माने की मशहूर नायिका नरगिस दत्त की कैंसर से मौत हो गई. शुरुआती दिनों में तो संजय दत्त ने ज़्यादातर एक्शन फ़िल्में कीं लेकिन पिछले कुछ वर्षों से कॉमेडी भूमिकाओं को लेकर भी उन्होंने खूब वाहवाही बटोरी. हाल में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘लगे रहो मुन्नाभाई’ में संजय दत्त की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी काफ़ी सराहा गया. इस फ़िल्म में उन्होंने एक ऐसे गैंगस्टर की भूमिका की है, जो गाँधी के बताए रास्ते अहिंसा पर चलने की पैरवी करते हुए नज़र आता है. पिछले 25 वर्षों में संजय दत्त ने कई तरह के किरदार निभाए लेकिन पर्दे पर उनका गैंगस्टर का रोल दर्शकों को खूब भाया. संजय दत्त ने संजय गुप्ता के साथ मिलकर फ़िल्म निर्माण के लिए एक कंपनी बनाई और इसके बैनर तले कुछ फ़िल्में भी बनाईं. दुर्भाग्य एक तरफ़ वक्त के साथ संजय दत्त अभिनय की बुलंदियों को छूते गए तो दूसरी तरफ़ दुर्भाग्य भी उनके साथ ही लगा रहा. वर्ष 2001 में मीडिया में एक टेप जारी हुआ जिसमें कथित रूप से पाकिस्तान के अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा शकील के साथ उनकी बातचीत टेप की गई थी. इस टेप में संजय दत्त ने कथित रूप से सह अभिनेता गोविंदा की शिकायत की थी जो सेट पर अक्सर देर से आते थे. ज़ाहिर है समस्याएं और विवाद संजय दत्त के साथ हमेशा ही जुडे़ रहे. इस वर्ष के शुरू में एक इंटरव्यू में संजय दत्त ने कहा भी था कि ज़िंदगी में ऐसा कोई समय मुझे याद नहीं है जब कोई समस्या न रही हो. | इससे जुड़ी ख़बरें लगे रहो मुन्नाभाईपत्रिका संजू के लिए पंजाब में प्रार्थना16 नवंबर, 2006 | पत्रिका संजू बाबा अपनी फ़िल्म पर फ़िदा09 सितंबर, 2006 | पत्रिका मन मोहने वाली लगे रहो मुन्नाभाई02 सितंबर, 2006 | पत्रिका संजय दत्त को भी फ़ैसले का इंतज़ार10 अगस्त, 2006 | भारत और पड़ोस आइफ़ा समारोह में परिणीता का प्रीमियर 10 जून, 2005 | पत्रिका 'मुन्नाभाई...' चली हॉलीवुड की ओर13 मई, 2005 | पत्रिका फिर उठा मुंबई में नशे का मामला 03 अगस्त, 2005 | पत्रिका | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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