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शनिवार, 23 सितंबर, 2006 को 10:22 GMT तक के समाचार
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करण को कभी तालियाँ और कभी गालियाँ

करण जौहर
करण जौहर एक महीने छुट्टी मनाने गए थे
करण जौहर एक महीने की छुट्टी के बाद भारत लौट रहे हैं. लंदन में आराम करने के अलावा करण इस एक महीने के दौरान टोरंटो फ़िल्म फ़ेस्टिवल में भी शामिल हुए.

उनके साथ अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ ख़ान भी थे. वहाँ उनकी फ़िल्म कभी अलविदा ना कहना दिखाई गई और उसे दर्शकों ने ख़ूब पसंद भी किया.

यहाँ तक कि लोग हॉलीवुड के सितारों को छोड़कर अमिताभ बच्चन और शाहरुख़ ख़ान के दीवाने बन गए. दीवानगी यहाँ तक पहुँच गई कि अमिताभ को लोग- सेक्सी सैम...सेक्सी सैम के नाम से ही पुकारने लगे.

ये तो था टोरंटो का हाल. लेकिन लंदन में हालात ज़रा इससे अलग थे. करण को यहाँ दो तरह के लोगों का सामना करना पड़ा.

एक तो वो जो उनकी फ़िल्म की तारीफ़ करते नहीं थकते थे और दूसरे वो जो उनकी फ़िल्म की बुराई और सिर्फ़ बुराई ही गिना रहे थे.

करण ने बताया- जिन्हें फ़िल्म की कहानी अच्छी लगी, उन्हें फ़िल्म भी अत्यंत पसंद आई. मगर जो फ़िल्म की कहानी से सहमत नहीं थे, उन्हें तो फ़िल्म बहुत बुरी लगी.

वैसे ओवरसीज़ में करण की इस फ़िल्म ने करण की ही कभी ख़ुशी कभी ग़म का भी रिकॉर्ड तोड़ दिया और ये फ़िल्म ओवरसीज़ में भारत की सबसे बड़ी हिट फ़िल्म बन गई है.

इस का मतलब ये हुआ है कि विदेश में नंबर एक और दो पर करण की ही फ़िल्में हैं.

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सिगरेट के बिना शाहरुख़

शाहरुख़ ख़ान हाल ही में बंगलौर गए थे. वहाँ उन्हें कैंसर की दो नई दवा को बाज़ार में लाँच करना था. कैंसर से उनके माता-पिता की भी मौत हुई थी.

शाहरुख़ ख़ान को अक़्सर सिगरेट पीते देखा जा सकता है

इसलिए कैंसर से जुड़े किसी काम के लिए शाहरुख़ मना नहीं करते. इस मौक़े पर किंग ख़ान ने फ़ॉर्मल कपड़े पहन रखे थे. वैसे शाहरुख़ को जींस और टी-शर्ट ही पहनना पसंद है.

लेकिन उस दिन उन्होंने ग्रे कलर की पूरी आस्तीन की शर्ट और एक काली पैंट पहन रखी थी. आँखों पर काला चश्मा था लेकिन गले में लटक रहा था उनका नंबर वाला एक अन्य चश्मा.

और हाँ, उनकी हाथों में उस दिन सिगरेट नहीं थी. कैंसर के इलाज की जो बात थी.

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'बाबुल' की प्रेरणा

रानी मुखर्जी बाबुल में बहू की भूमिका में हैं

क्या बीआर चोपड़ा और रवि चोपड़ा ने बाबुल की कहानी की प्रेरणा अपने परिवार में घटी कहानी से ली है?

बड़े चोपड़ा साहब के भाई के बेटे की मौत जवानी में हो गई थी. उनकी बहू के लिए बीआर चोपड़ा के भाई ने एक ट्रैवेल एजेंसी शुरू की.

और कुछ समय बाद ससूर ने बहू की दोबारा शादी करा दी. फ़िल्म बाबुल में भी अमिताभ बच्चन की बहू रानी मुखर्जी विधवा बन जाती हैं और बच्चन उनकी दोबारा शादी का प्रस्ताव रखते हैं.

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नए रोल में राहुल बोस

अपने अनुभव को क़लमबद्ध कर रहे हैं राहुल

राहुल बोस एक्टिंग तो करते ही हैं, साथ में उन्हें रग्बी का भी बहुत शौक है. लेकिन इनके अलावा उन्हें आजकल उन्हें एक और शौक ने आ घेरा है.

और वो है- प्यार के साइड इफ़ेक्ट्स के हीरो के रूप में अपने अनुभव को क़लमबद्ध करना. इसके अलावा राहुल एक फ़िल्म की कहानी पर भी काम कर रहे हैं.

कहानी बहुत डार्क यानी गंभीर है. लेकिन राहुल का कहना है- इसमें मैं कुछ मीठी बातें जोड़ रहा हूँ. ताकि देखने वालों को बोरियत ना हो.

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एक लड़की दूजा बौना

मानो या ना मानो आने वाली फ़िल्म जानेमन में सलमान ख़ान एक सीन में लड़की के वेश में नज़र आएँगे.

जानेमन में लड़की के वेश में नज़र आएँगे सलमान

और असली लड़की दिखाने के लिए सलमान ने लंबे बाल रखे हैं और लड़कियों के कपड़े भी पहने हैं. इसी फ़िल्म में अनुपम खेर बने हैं अप्पू राजा.

जिस तरह कमल हासन ने सालों पहले फ़िल्म अप्पू राजा में बौने की भूमिका निभाई थी, उसी तरह जानेमन में अनुपम खेर एक बौने का किरदार निभा रहे हैं.

वाह एक लड़की और दूजा बौना- क्या बात है.

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काबुल एक्सप्रेस को पटरी से गिरा डाला

यश चोपड़ा की नई फ़िल्म काबुल एक्सप्रेस की वेरायटी मैगज़ीन ने बुराई की है. ये फ़िल्म भी हाल ही में संपन्न टोरंटो फ़िल्म समारोह में दिखाई गई थी.

काबुल एक्सप्रेस में जॉन अब्राहम की अहम भूमिका है

पर वेरायटी मैगज़ीन के पत्रकारों को जॉन अब्राहम और अरशद वारसी की अफ़ग़ानिस्तान में बनी फ़िल्म कुछ कम समझ आई.

पत्रकार रॉबर्ट कोहलर के अनुसार फ़िल्म झूठी लगती है और इतनी साधारण है कि दर्शकों पर कोई विशेष छाप नहीं छोड़ पाती.

उनका ये भी कहना है कि जॉन अब्राहम और अरशद टीवी न्यूज़ रिपोर्टर और कैमरामैन बिल्कुल नहीं लगते.

(कोमल नाहटा का ये कॉलम आपको कैसा लगा. हमें अपनी राय से ज़रूर अवगत कराएँ. पता है- hindi.letters@bbc.co.uk)

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