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वंशवाद पर राजनीति का एकाधिकार नहीं | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राजनीति में वंशवाद का आरोप हमेशा लगता रहा है और सबसे हालिया उदाहरण है पिछले दिनों राज्यसभा में चुनकर आईं राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी नेता शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले. कहने को तो सुप्रिया की संपत्ति करोड़ों की है लेकिन उनके पास एक कार तक नहीं है. ख़ैर बात थी वंशवाद की जो अब सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं रही. भारतीय विदेश सचिव के रुप में नियुक्त हुए शिव शंकर मेनन के परिवार का भी विदेश सेवा से ख़ासा संबंध रहा है. उनके दादा जी केपीएस मेनन और पिता पीएन मेनन का संबंध भी विदेश सेवा से रहा है. शिव शंकर के ससुर आरडी साठे भी विदेश सचिव रहे हैं. वैसे जानकारों का मानना है कि उनका चयन मेरिट के आधार पर हुआ है लेकिन कुछ लोगों को इसमें भी मेनन वंश का प्रभाव दिख रहा है. वैसे लेखन के क्षेत्र में भी इस हफ्ते ऐसा ही कुछ हुआ है. लेखिका किरण देसाई की पुस्तक 'इनहेरिटेंस ऑफ लॉस' को बुकर पुरस्कार के लिए नामांकित किया है. उनकी मां अनिता देसाई की तीन क़िताबों को बुकर के लिए नामांकित किया गया था लेकिन उन्हें बुकर नहीं मिला तो क्या किरण माँ का अधूरा सपना पूरा कर सकेंगी? ****************************************************** भारत में झारखंड का नाम हमेशा उसकी ख़निज संपदा के लिए लिया जाता रहा है लेकिन अब इस राज्य ने भारतीय राजनीति में अनोखा योगदान किया है.
झारखंड में पहली बार कोई निर्दलीय विधायक मुख्यमंत्री बनेगा और यह श्रेय मिलेगा सोमवार को मधु कोड़ा को जो विभिन्न दलों के समर्थन से सरकार बनाएंगे. ये सरकार कितने दिन चलेगी कहना बहुत मुश्किल है. वैसे पूरे पंद्रह दिन तक जोड़ तोड़ की राजनीति के दौरान झारखंड का हर बड़ा नेता यह कहता रहा कि जो हो रहा है वो झारखंड की जनता के हित में नहीं है. नए मुख्यमंत्री के बारे में मीडिया को भी जानकारी कम है लेकिन बीबीसी के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड में कृषि पर ध्यान देने की ज़रुरत है. झारखंड का अर्थ है जंगल युक्त खंड. ऐसे प्रदेश में कृषि पर ध्यान....बात कुछ हजम नहीं हुई. शायद उन्होंने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि खनिज संपदा का ध्यान गुरूजी यानी शिबू सोरेन पहले से ही रख रहे हैं. ************************************************************
पिछले सप्ताह पैगंबर के बारे में पोप के बयान पर भारत में भी बवाल मचा लेकिन जामा मस्जिद में पोप की मुख़ालफ़त की अगुआई को लेकर ही विवाद छिड़ गया जिसमें दिल्ली विधानसभा के डिप्टी स्पीकर शोएब इकबाल घायल हो गए. हुआ कुछ यूं कि जामा मस्ज़िद के पास पहुंचे इमाम बुखारी के समर्थक और कांग्रेस विधायक शोएब इकबाल के समर्थक. दोनों ही पक्ष पोप के ख़िलाफ विरोध प्रदर्शन की अगुआई के इच्छुक थे या फिर कहें ख़ुद को मुस्लिमों का असली हितैषी दिखाने की कोशिश में थे. इसी कोशिश में हुई पहले बहस और उसके बाद बोतल, पत्थर, घूँसे. अंत में रैपिड एक्शन फोर्स को आकर दोनों पक्षों को अलग करना पड़ा. असल में आजकल जामा मस्जिद के इमाम साहब कांग्रेस का विरोध कर रहे हैं तो फिर पोप के विरोध में कांग्रेस नेता को कैसे अगुआई करने देते? |
इससे जुड़ी ख़बरें किरण देसाई बुकर के लिए नामित15 सितंबर, 2006 | पत्रिका नेहरू-गाँधी परिवार का राजनीतिक सफ़र16 मई, 2004 | भारत और पड़ोस गाँधी-नेहरू वंश का एक और बँटवारा13 फ़रवरी, 2004 | भारत और पड़ोस | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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