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'कॉर्पोरेट' को लेकर उत्साहित हैं भंडारकर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कुछ हटकर फ़िल्में बनाने की कला के माहिर मधुर भंडारकर फ़िल्म 'पेज-थ्री' के बाद अपनी आने वाली फ़िल्म 'कॉर्पोरेट' को लेकर बहुत उत्साहित हैं. मधुर भंडारकर ने कुछ ही फ़िल्में बनाई हैं और उन्हीं की बदैलत वो फ़िल्म जगत और दर्शकों पर अपनी एक अलग छाप छोड़ने में कामयाब रहे हैं. अपनी आने वाली फ़िल्म 'कॉर्पोरेट' के बारे में मधुर कहते हैं, "यह एक अलग तरह की फ़िल्म है जो राजनीति और व्यापार जगत का एक ख़ाका खींचती है. बहुत ही कम लोग हैं जिन्होंने ऐसे विषयों पर फ़िल्में बनाने की हिम्मत है. मैंने यह जोखिम उठाया है." इस फ़िल्म को बनाने का विचार कैसे आया, इस बाबत वो कहते हैं, "पेज-थ्री के बाद मैंने सोचा कि कॉर्पोरेट जगत पर एक फ़िल्म बन सकती है. मैंने इसे दिखाने की कोशिश की है, बाक़ी तो दर्शक ही बताएँगे." मधुर बताते हैं, "चाहे वह 'चांदनी बार' हो या 'सत्ता', लोग मुझे मेरी फ़िल्मों के विषयों के लिए याद करते हैं. अपने देश में कितने ही ऐसे विषय हैं तो क्यों उनपर फ़िल्में क्यों नहीं बनाई जाएँ. मेरी तीनों फ़िल्में, 'पेज-थ्री', 'कॉर्पोरेट' और 'सिग्नल' एकदम अलग विषयों पर आधारित हैं और सच्चाई के बेहद क़रीब हैं”. अपनी फ़िल्म कॉर्पोरेट में मधुर ने बिपाशा बसु को लिया है. इस बारे में उनका कहना है, " मुझसे भी कई लोगों ने कहा कि बिपाशा एक ग्लैमरस लड़की है, सेक्सी इमेज है, एक गंभीर अभिनेत्री के रूप में उन्होंने काम नहीं किया है. लेकिन मेरे ख़याल से इस फ़िल्म के बाद ये अटकलें दूर हो जाएंगी. बिपाशा को आप एक अलग ही रंग में देखेंगे." कॉर्पोरेट प्रतिक्रिया इनकी इसी फ़िल्म को लेकर जब हमनें कॉर्पोरेट जगत से ताल्लुक रखने वाले कुछ लोगों से बात की तो ज़्यादातर लोगों ने माना कि कॉर्पोरेट जगत में भी इतनी गंदगी हैं कि इसे लोगों के सामने लाना ही चाहिए था. ईटीसी चैनल की मीडिया सलाहकार नीलम गुप्ता कहती हैं, "मधुर भंडारकर इस तरह की फ़िल्में बनाकर बहुत ही अच्छा काम कर रहे हैं. बिज़नेस जगत में जितनी गंदगी है वह तो बाहर आनी ही चाहिए." इस फ़िल्म के बारे में शक्तिमान फ़ेम अभिनेता और निर्माता मुकेश खन्ना ने कहा, "आज हर क्षेत्र में गंदगी है और इन गंदगियों को जल्द से जल्द लोग जान जाएँ तो बेहतर होगा. फिर चाहे इसे सामने लाने का माध्यम फ़िल्म ही क्यों न हो." इतना तो तय है कि पेज-थ्री जैसे विषयों पर फ़िल्म बनाकर एक बड़ी बहस छेड़ने में सफल रहे मधुर भंडारकर की इस नई फ़िल्म का सभी को इंतज़ार है. प्रशंसकों को भी और आलोचकों को भी. |
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