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बदल रही है बिपाशा की पहचान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिपाशा बसु, ऐसा लगता है कि अपनी एक ख़ास तरह की पहचान ख़त्म करने में सफल हुई हैं. पिछले एक साल में उन्होंने कई ऐसी भूमिकाएँ निभाई हैं जो उनके कम कपड़ों और उनकी अदाओं के कारण चर्चा में नहीं आईं. हाल ही में उन्होंने रामगोपाल वर्मा की फ़िल्म 'डरना ज़रुरी है' की एक कहानी में भूमिका निभाई थी. वो कहानी फ़िल्म की आधा दर्जन कहानियों में से सबसे असरदार कहानी कही जा सकती है. हालांकि 'डरना मना है' के बाद रामगोपाल वर्मा की 'डरना ज़रुरी है' भी असफल हो गई थी लेकिन शायद निर्माताओं को कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ा है. हाल ही में फिल्मकार संजय गुप्ता ने इसी थीम पर काम करने का फैसला किया है और संजय दत्त, नाना पाटेकर, अर्जुन रामपाल, के अलावा बिपाशा बसु भी दर्शकों को डराती नज़र आएँगी. इस फ़िल्म का नाम भी ‘दस कहानियां’ रखा गया है. फिर हेराफेरी फिलहाल बिपाशा 9 जून को रिलीज होनेवाली अपनी फिल्म ‘फिर हेरा-फेरी’ के लिए बहुत उत्साहित नज़र आ रहीं हैं.
इस फ़िल्म के बारे में पूछने पर बिपाशा कहतीं हैं, “इस फ़िल्म में उतनी ही कॉमेडी भरी है जितनी कि आपने ‘हेरा-फेरी’ में देखी. इस फ़िल्म में सभी पैसों के पीछे भागते हैं और मैं भी उनमें से एक हूँ.” “परेश रावल, अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की केमिस्ट्री लोगों को काफी पसंद आई थी इसलिए उनकी इस कॉमेडी पर भी दर्शक लोटपोट होने ज़रूर आएँगे”. इससे पहले बिपाशा ने 'नो एंट्री' में काम किया है. ‘नो इंट्री’ भी कॉमेडी फ़िल्म थी और ‘फिर हेरा-फेरी’ भी इसी तरह की है, कहीं कॉमेडी मास्टर तो बनने का इरादा नहीं है? इस पर बिपाशा कहती हैं , “एक ही तरह की एक दो फ़िल्में कर लेने से ज़रूरी नहीं कि मैं उसकी मास्टर बन जाऊँ.” वे बताती हैं, “मधुर भंडारकर की फ़िल्म ‘कॉर्पोरेट’ में मैं एक साधारण लडकी की भूमिका में हूं. मुझे लगता है कि ग्लैमरस के अलावा एक सामान्य रोल में भी मैं अपने अभिनय को और निखार सकती हूं.” पार्ट-2 अपने पुराने समय को याद कर बिपाशा कहती हैं, “जब मैं इस इंडस्ट्री में नई थी तो स्क्रिप्ट और अपने किरदार पर विशेष ध्यान देती थी. मगर धीरे-धीरे मुझे यह महसूस होने लगा कि अगर सह कलाकार बेहतर हैं तभी फ़िल्म हिट हो सकती है. बहुत सारे कलाकार हों, स्क्रिप्ट अच्छी है तो मैं अतिथि किरदार करने के लिए भी हां कर देती हूं”.
बिपाशा मानती हैं कि “आजकल के दर्शक भी काफ़ी समझदार हो गए हैं. आज एक अभिनेता या एक अभिनेत्री के नाम पर फ़िल्म देखने आने वाले दर्शकों की संख्या बहुत ही कम हो गई है. आज का दर्शक एक साथ ज़्यादा कलाकारों वाली फ़िल्में देखना भी पसंद करता है.” बिपाशा की कई फ़िल्में पार्ट-टू वाली हैं. जिनमें ‘धूम-2’, ‘डरना ज़रूरी है’, ‘फिर हेरा फेरी’ आदि मुख्य हैं इसका कारण पूछने पर ये कहती हैं “असल मे इन फ़िल्मों के लिए मैंने कुछ सोच समझकर निर्णय नहीं लिया था. फ़िल्म निर्माताओं का ऑफर मुझे काफ़ी मज़ेदार लगा और मैंने हां कर दी”. 'जॉन अमिताभ तो नहीं' मीडिया में बिपाशा और जॉन को लेकर चर्चे आम हैं. लेकिन शायद बिपाशा को जॉन के बारे में ज़्यादा चर्चे करना पसंद नहीं है. वे कहती हैं “जॉन के विषय में हमने काफी बातें की हैं. अगर वह मीडिया में नहीं होता तो मैं उसके बारे में ज़रूर बातें करती. वह कोई बहुत बड़ा आदमी नहीं है जिसके बारे में हर वक़्त चर्चा की जाए. जब वह अमिताभ बच्चन बन जाएगा तब हम उसके बारे में बातें ज़रूर करेंगे”. हालांकि वो ये कहना नहीं भूलतीं कि जॉन उनके जीवन का अहम हिस्सा है. “मेरी ज़िंदगी में मेरे परिवार, दोस्त और जॉन ख़ास जगह रखते हैं. इनके बिना मेरी ज़िंदगी कभी पूरी नहीं हो सकती”. बिपाशा बंगाली हैं लेकिन इसके बावजूद कोई बंगला फ़िल्म क्यों नहीं करतीं, इस सवाल पर वे कहती हैं, “मुझ पर बंगला फ़िल्म करने का काफ़ी दबाव है. जब मेरे पास समय होता है तो किसी अन्य कलाकार को ले लिया जाता है और जब मेरे पास ऑफर आते हैं तो मेरे पास वक़्त नहीं होता है. पर मैं जल्द ही बंगला फिल्म करूंगी”. | इससे जुड़ी ख़बरें सबसे बढ़ कर हैं बिपाशा बसु20 जनवरी, 2006 | मनोरंजन बिहार के 'अपहरण उद्योग' पर फ़िल्म30 नवंबर, 2005 | मनोरंजन 'पाँच साल बाद ऐक्टिंग छोड़ दूँगी'21 अक्तूबर, 2005 | मनोरंजन बिपाशा को मिला एक यादगार रोल13 अगस्त, 2004 | मनोरंजन | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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