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गुजरात सरकार पर बरसे आमिर ख़ान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नर्मदा बचाओ आंदोलन और भोपाल गैस पीड़ितों के लिए अपनी आवाज़ उठाने वाले बॉलीवुड के चर्चित अभिनेता आमिर ख़ान ने अब गुजरात सरकार को अपना निशाना बनाया है. बीबीसी एशियन नेटवर्क से विशेष बातचीत में आमिर ख़ान ने सांप्रदायिक दंगों को रोक पाने में असफल रहने पर गुजरात की भारतीय जनता पार्टी सरकार की आलोचना की है. ये कार्यक्रम 15 मई को प्रसारित होगा. कार्यक्रम में अपने एक प्रशंसक के सवाल का जवाब देते हुए आमिर ख़ान ने कहा कि हाल ही में वडोदरा में पुलिस फ़ायरिंग की घटना पर वे काफ़ी चिंतित हैं. आमिर ने कहा, "मेरा मानना है कि कुछ वर्षों पहले गुजरात में जो कुछ भी हुआ, वह काफ़ी दुर्भाग्यपूर्ण था. यह शर्मनाक है कि प्रशासन स्थिति को नियंत्रित नहीं कर पा रहा. इस कारण निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं." नाकाम उन्होंने कहा कि इससे फ़र्क नहीं पड़ता कि मारे गए लोग किस क़ौम के थे. महत्वपूर्ण बात ये है कि वे सभी इंसान थे. आमिर के अनुसार उन्हें लगता है कि प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने में नाकाम रहा है. अमरीका के राष्ट्रपति जॉर्ज बुश की भी आमिर ख़ान ने आलोचना की. उन्होंने इराक़ पर अमरीकी हमले को ग़ैरक़ानूनी बताया. आमिर ने कहा, "मेरा मानना है कि जॉर्ज बुश ग़लत कर रहे हैं. मेरे विचार से इराक़ के लोगों को अपने बारे में ख़ुद से निर्णय लेने की छूट होनी चाहिए न कि बाहरी शक्तियों के दबाव में. अमरीकी सैनिकों ने इराक़ पर यह कह कर हमला किया था कि सद्दाम हुसैन के पास सामूहिक विनाश के हथियार थे. लेकिन अब हम सब जानते हैं कि ऐसा नहीं है." एक प्रशंसक के सवाल के जवाब में आमिर ख़ान ने कहा कि अगर उन्हें अच्छी स्क्रिप्ट मिली, तो वे पाकिस्तानी फ़िल्म में भी काम करने को तैयार है. आमिर ने कहा कि भारत और पाकिस्तान में प्रतिभा की कमी नहीं है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों की प्रतिभाओं को साथ मिलकर दुनियाभर के लोगों का मनोरंजन करना चाहिए. | इससे जुड़ी ख़बरें आमिर ख़ान ने समर्थन जताया14 अप्रैल, 2006 | भारत और पड़ोस आमिर ने 21 करोड़ का दावा ठोका26 फ़रवरी, 2006 | मनोरंजन 'रंग दे बसंती' को मिली हरी झंडी10 जनवरी, 2006 | मनोरंजन आमिर और किरण अब पति-पत्नी हैं29 दिसंबर, 2005 | मनोरंजन बॉलीवुड में शादियों का मौसम09 दिसंबर, 2005 | मनोरंजन फ़ना को लेकर रोमांचित हैं काजोल11 नवंबर, 2005 | मनोरंजन मंगल पांडे फ़िल्म के ख़िलाफ़ याचिका01 सितंबर, 2005 | मनोरंजन ऐतिहासिक फ़िल्मों के साथ कितना न्याय?25 अगस्त, 2005 | आपकी राय | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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