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शनिवार, 06 मई, 2006 को 14:27 GMT तक के समाचार
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असग़र वजाहत को इंदु शर्मा सम्मान
असग़र वजाहत
वजाहत कहानी, नाटक और उपन्यास लेखन में सक्रिय हैं
वर्ष 2006 के लिए अंतरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान हिंदी के वरिष्ठ कथाकार और नाटककार असग़र वजाहत को देने का फ़ैसला किया गया है.

यह सम्मान कथा यूके की तरफ़ से दिया जाता है और वर्ष 2006 के लिए असग़र वजाहत की कृति 'कैसी आगी लगाई' को चुना गया है.

कैसी आगी लगाई का प्रकाशन 2005 में राजकमल प्रकाशन से हुआ था.

यह सम्मान असग़र वजाहत को लंदन के हाउस ऑफ़ लार्ड्स में 23 जून 2006 को प्रदान किया जायेगा. यह पहला मौक़ा होगा जब किसी भारतीय भाषा के लिए कोई सम्मान हाउस ऑफ़ लार्ड्स में दिया जायेगा.

इंदु शर्मा मेमोरियल ट्रस्ट की स्थापना संभावनाशील कथा लेखिका और कवियत्री इंदु शर्मा की स्मृति में की गई थी. इंदु शर्मा का कैंसर से अल्प आयु में ही निधन हो गया था.

अब तक यह सम्मान चित्रा मुदगल, संजीव, ज्ञान चतुर्वेदी, एस. आर. हरनोट, विभूति नारायण राय और प्रमोद कुमार तिवारी को दिया जा चुका है.

असगर वजाहत का जन्म 5 जुलाई 1946 को हुआ था. उन्होंने पी एच डी तक की पढ़ाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से की. उनके लेखन में तीन कहानी संग्रह, चार उपन्यास, छ: नाटक और कई अन्य रचनाएँ शामिल हैं.

वजाहत टेलीविज़न व फ़िल्म लेखन और निर्देशन से भी जुड़े रहे हैं. वह कैसी आगी लगाई उपन्यास के दूसरे खंड पर भी काम कर रहे हैं.

इनके नाटक 'जिस लहौर नी वेख्या' ने पिछले पंद्रह बरसों से कई देशों में धूम मचाई है. इस नाटक के अब तक देश-विदेश में एक हज़ार से अधिक प्रदर्शन हो चुके हैं.

पदमानंद साहित्य सम्मान

कथा यूके ने फ़िल्म स्क्रिप्ट लेखन, फ़िल्मी गीत लेखन और फ़िल्मों से जुड़ी अन्य विधाओं को विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की हिमायत की है.

बीबीसी हिंदी विभाग की अध्यक्ष अचला शर्मा
अचला शर्मा को भी पदमानंद सम्मान मिल चुका है

इसी विचारधारा के अंतर्गत वर्ष 2006 के लिए पदमानंद साहित्य सम्मान गोविंद शर्मा को उनकी पुस्तक 'हिंदी सिनेमा - पटकथा लेखन' के लिए दिया जा रहा है.

गोविंद शर्मा ने लेखन की शुरुआत भारतीय सेना में रहते हुए एक नाटक से की और फिर पीछे मुड़ कर नहीं देखा.

1990 के दशक में टेलीविज़न से जुड़े और बीपीएल -एक से बढ़ कर एक, माल है तो ताल है, गड़ बड़ जैसे धारावाहिक लिखे.

उन्होंने फ़िल्मों की पटकथाएँ भी लिखी हैं. यही किताब वह अंग्रेज़ी में भी लिख रहे हैं. इससे पहले इंग्लैंण्ड के हिंदी लेखकों डॉक्टर सत्येंद्र श्रीवास्तव, दिव्या माथुर, नरेश भारतीय, भारतेंदु विमल, अचला शर्मा और ऊषा राजे सक्सेना को पदमानंद साहित्य पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है.

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