 |  हर साल अचला शर्मा के नए नाटक का श्रोता बेसब्री से इंतज़ार करते हैं |
बीबीसी हिंदी के नाटक का आपको साल भर इंतज़ार रहता है. इस बार अचला शर्मा आपके लिए ले कर आई हैं 'रेस'. 'रेस' कहानी है उस होड़ की, जिसने हाल के अर्से में भारतवासियों को कुछ ऐसा लपेट में लिया है कि वह सोच ही नहीं पा रहे कि जो सोचने के लिए मिल रहा है वह सोचने की चीज़ है भी कि नहीं. छोटे पर्दे की इस 'रेस' ने सवाल ला खड़ा किया है कि ख़बरों की परिभाषा क्या होनी चाहिए. 'रेस' सवाल उठाती है कि क्या ख़बर केवल किसी घटना को, बल्कि हर किसी छोटी-बड़ी घटना को बता देने भर का ही नाम है या ख़बरों के कुछ मानदंड भी हैं. |