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अच्छी कहानी लिखो, इनाम पाओ
घिसी पिटी प्रेम कथाएँ और बिछड़े भाइयों की कहानियाँ, इनसे तंग आकर सरकारी संस्था नेशनल फ़िल्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन यानी एनफ़डीसी ने अब अच्छी फ़िल्म पटकथाओं को पुरस्कार देने का फ़ैसला किया है. एनएफ़डीसी का यह पुरस्कार पाँच लाख रूपए तक का होगा. एनएफ़डीसी इस वर्ष से एक पटकथा लेखन प्रतियोगिता का आयोजन करने जा रहा है.
इस आयोजन के तहत पाँच बेहतरीन पटकथाओं को पुरस्कृत किया जाएगा जिन पर निर्माता फ़िल्में बना सकेंगे. इस तरह एनएफ़डीसी के पास फ़िल्मी पटकथाओं का संग्रह होगा और निर्माता एनएफ़डीसी से ये पटकथाएँ ख़रीद सकेंगे. एनएफ़डीसी के कार्यकारी निदेशक दीपांकर मुखोपाध्याय का कहना है कि आजकल हिंदी फ़िल्मों के फ्लॉप होने का मुख्य कारण अच्छी कहानियों का अभाव है क्योंकि "फ़िल्म बनाने वाले नया कुछ करने के बदले नक़ल करने के चक्कर में रहते हैं." स्वागत
एनएफ़डीसी की इस नई योजना का बॉलीवुड ने भी स्वागत किया है. कुछ-कुछ होता है, कल हो न हो जैसी फ़िल्मों के लेखक-निर्देशक करण जौहर का कहना है कि "इंडस्ट्री के लेखकों को यह समझना होगा कि अच्छी कहानी के बिना अच्छी फ़िल्म नहीं बन सकती." उन्होंने कहा, "एनएफ़डीसी ने जो शुरू किया है, एक अच्छी कोशिश है. अच्छी फ़िल्में इसलिए नहीं बनतीं क्योंकि उनका लेखन बहुत कमज़ोर होता है, जब लेखन का स्तर बढ़ेगा तो हिंदी सिनेमा को बहुत फ़ायदा होगा." दीपांकर मुखोपाध्याय ने अपनी दलील को पुख़्ता करने के लिए आँकड़े भी पेश किए, "2003 में 246 हिंदी फ़िल्में रिलीज़ हुई, एक सुपरहिट, पाँच हिट रही, कुल मिलाकर सिर्फ़ 15 फ़िल्में ऐसे थीं जो अपना पैसा वसूल कर सकीं." एनएफ़डीसी के कार्यकारी निदेशक का कहना है कि ज़्यादातर फ़िल्मों के फ्लॉप होने की वजह ये है कि दर्शकों को कुछ नया देखने को नहीं मिलता. अगर एनएफ़डीसी की यह योजना सफल रही तो शायद हिंदी फ़िल्मों के सिर्फ़ गाने और कपड़े ही नहीं, बल्कि लोगों को कहानियाँ भी याद रहेंगी. |
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