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'मर्डर में मल्लिका शेरावत नहीं दिखीं' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दक्षिण भारतीय शहर हैदराबाद में आयोजित प्रवासी भारतीय सम्मेलन में सऊदी अरब से आए अब्दुल रऊफ़ मेमन ने एक अनोखी ही मांग रख दी. उनका कहना था कि भारत सरकार सऊदी अरब सरकार से कहे कि वह सेंसरशिप नियमों में ढील दे. मेमन ने कहा, "भारतीय फ़िल्मों को सेंसरशिप के तहत इतना काट-छांट दिया जाता है कि मज़ा नहीं आता". और उस वक़्त तो हॉल ठहाकों से गूंज उठा जब मेमन ने कहा, "अब यही देख लीजिए कि सऊदी अरब में हम 'मर्डर' देखने गए तो उसमें मल्लिका शेरावत नदारत थी". यानी, फ़िल्म में मल्लिका शेरावत से जुड़ा हर सीन ऐसा था कि उस पर सेंसर की क़ैंची चले बिना नहीं रह पाई. और लगता है मेमन की इस टिप्पणी में भी ज़रूर दम होगा कि सेंसरशिप के बाद उन्हें हर हिंदी फ़िल्म आधी ही देखने को मिलती है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * मैं इधर जाऊँ या... किन्हीं कमज़ोर क्षणों में हुई एक ग़लती कैसे जीवन की दिशा ही बदल देती है कुछ यही कहा गया है कि नई फ़िल्म 'जवानी दीवानी' में.
इमरान हाशमी अपनी पिछली कई फ़िल्मों की तरह इस फ़िल्म में भी एक प्लेबॉय की भूमिका निभा रहे हैं जिसके लिए अपना करियर हर रिश्ते से बड़ा है. इसके लिए उन्हें अपना प्यार भी दाँव पर लगाना पड़ता है लेकिन अंत में उनके सामने दो विकल्प होते हैं जिनमें से एक को उन्हें चुनना ही है. छोड़िए, बाक़ी सब सस्पेंस ही रहने दीजिए. निर्देशक मनीश शर्मा ने फ़िल्म को एक ऐसे ताने बाने में बुना है कि अंत तक दर्शकों की उत्सुकता बनी रहती है. फ़िल्म की अन्य भूमिकाओं में हैं सेलीना जेटली, ऋषिता भट्ट और टीकू तलसानिया. महेश मांजरेकर ने इसमें एक अंडरवर्ल्ड डॉन चप्पू भाई की भूमिका निभाई है. * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * * भोजपुरी फ़िल्मों का बोलबाला भोजपुरी बोलने वाले दुनिया के कोने-कोने में फैले हुए हैं और जब भी कोई भोजपुरी फ़िल्म रिलीज़ होती है धूम मचा देती है.
अब कुछ फ़िल्मकारों का ध्यान इस पर गया कि हिंदी की ब्लॉकबस्टर फ़िल्मों को अगर भोजपुरी ज़ुबान दे दी जाए तो कैसा रहे. अमिताभ बच्चन की 'नमकहलाल' 'बबुआ खिलाड़ी ददुआ अनाड़ी' के नाम से सिनेमाघरों में रिलीज़ हो ही चुकी है और अब बारी है 'दीवार' और 'शोले' की. भोजपुरी फ़िल्मों के कलाकार भी फ़िल्मी दुनिया में तेज़ी से अपनी पहचान बना रहे हैं. कहा जाता है कि भोजपुरी के सुपरस्टार मनोज तिवारी और रवि किशन तो एक-एक फ़िल्म के 45 लाख रुपये तक चार्ज करते हैं. पिछले चालीस साल से सक्रिय भोजपुरी फ़िल्मोद्योग ने वर्ष 2005 में तीस फ़िल्में बना कर एक नया रिकॉर्ड भी क़ायम किया है. |
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