अब मैं कुछ बोलूंगा ही नहीं: शाहरुख़

- Author, मधु पाल
- पदनाम, मुंबई से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
कुछ वक़्त से देशभर में 'असहिष्णुता' के मुद्दे को लेकर बहस का माहौल है. इसकी आंच में अभिनेता आमिर ख़ान और शाहरुख़ ख़ान भी आ चुके हैं.
इस विवादित मुद्दे से बचने के लिए शाहरुख़ ख़ान ने फ़ैसला किया है कि वह अब किसी मुद्दे पर बोलेंगे ही नहीं.

इमेज स्रोत, EPA
अपने जन्मदिन पर मीडिया को एक साक्षात्कार में उन्होंने देश में 'डर और असहिष्णुता का माहौल' होने की बात कही थी और फिर उनकी काफ़ी आलोचना हुई थी.
इससे परेशान शाहरुख़ ने कहा, "मैं अपना मुुँह नहीं खोलूंगा क्योंकि मैं जानता हूँ कि अगर मैंने मुँह खोला तो कॉन्ट्रोवर्सी हो जाएगी."
इस मुद्दे पर मिली प्रतिक्रियाओं से ख़ासे निराश नज़र आ रहे शाहरुख़ कहते हैं, "वैसे भी हम एक्टर भांड होते हैं और हमें सिर्फ़ भांडगीरी करनी चाहिए, उसके अलावा कुछ नहीं."

शाहरुख़ आजकल अपनी फ़िल्म 'दिलवाले' के प्रचार में जुटे हैं और इसी सिलसिले में उन्होंने असहिष्णुता और आमिर से जुड़े सवालों पर आमिर का बचाव किया.
वह बोले, "अगर मैं किसी मुद्दे पर बात कर रहा हूँ तो इसका यह मतलब नहीं है कि मैं अपना निर्णय सुना रहा हूँ बल्कि मैं अपनी राय जनता के सामने रख रहा हूँ. हमने कुछ कहा है, तो वह पत्थर की लकीर नहीं है."
शाहरुख़ कहते हैं कि अगर कोई सिर्फ़ अपनी बात रख रहा है पर आप उसे सुनने को भी तैयार नहीं और कहें कि यह आदमी ऐसा कैसे कह सकता है तो ये सोचना मूर्खता है.
''मैं अपने बच्चों को भी यही कहता हूँ कि अगर मॉडर्न होना है तो धर्म, जात-पात, लड़का-लड़की में कौन ज़्यादा है और कौन कम, यह कभी मत सोचना.''

उनका कहना था, "जिसका जो काम है, उसे वही करना चाहिए. हम अभिनेता भांड हैं और हमें सिर्फ़ भांडगीरी ही करनी चाहिए. हमें सिर्फ़ गाने-बजाने पर ही ध्यान देना चाहिए. हमको नहीं मालूम पॉलिटिक्स के बारे में. हमें नहीं पता इकॉनमी के बारे में. हमें नहीं पता खेती-बाड़ी के बारे में. हमको सिर्फ़ हमारी फ़िल्म के बारे में पता है. कटरीना का आख़िरी गाना कौन सा अच्छा लगा था, यह मैं बता दूंगा क्योंकि मैं इस क्षेत्र में काम करता हूँ."
शाहरुख़ ने माना कि वह बहुत सोचने के बाद इस फ़ैसले पर पहुंचे हैं कि कई ऐसे मुद्दे हैं, जिन पर उन्हें बोलना ही नहीं चाहिए.
शाहरुख़ ने कहा, ''इसका मतलब यह नहीं कि मुझे बात करनी नहीं आती या मुझे उन बातों का इल्म नहीं. लेकिन मुझे लगता है कि मेरे बोलने से मेरी बातों को ग़लत तरीक़े से समझना या उसे पेश करना आसान हो जाता है.''

उन्होंने फिर कहा, "मैं सिर्फ़ फ़िल्मों के बारे में बता सकता हूँ. बाक़ी सभी बातों पर बोलने की मेरी औक़ात नहीं है लेकिन मैं जानता हूँ मैंने ऐसी कोई ग़लत बात नहीं की थी."
जब उनसे तीनों ख़ानों के एक साथ एक फ़िल्म में काम करने के बारे में पूछा गया तो शाहरुख़ बोले, "यह ज़रूरी नहीं कि हम साथ आएंगे और फ़िल्म हिट होगी. हर फ़िल्म 'वक़्त' की तरह नहीं हो सकती. कुछ फ़िल्मों से 'त्रिमूर्ति' भी बन सकती है."
साल 1965 में बनी 'वक़्त' में राजकुमार, शशि कपूर, सुनील दत्त और बलराज साहनी जैसे अभिनेता एक साथ मौजूद थे और यश चोपड़ा के निर्देशन में बनी यह फ़िल्म सुपरहिट हुई थी पर 1995 में 11 करोड़ के बजट में बनी फ़िल्म 'त्रिमूर्ति' में शाहरुख़ ख़ान, जैकी श्रॉफ़ और अनिल कपूर जैसे स्टार होने के बावजूद फ़िल्म सिर्फ़ लागत वसूल पाई थी.

बड़े पर्दे पर रोमांस करते और हँसते-मुस्कराते शाहरुख़ असल ज़िंदगी में ख़ुद को बोरिंग मानते हैं, "कई लोग जब मुझसे मिलते हैं तो हताश हो जाते हैं क्योंकि मैं जैसा फ़िल्मों में दिखता हूँ, वैसा असल ज़िंदगी में नहीं हूं और मुझे ज़्यादा बातचीत, लोगों के बीच उठना-बैठना पसंद नहीं है."
उनका मानना है कि एक वक़्त के बाद असल ज़िंदगी में भी अभिनय करना पड़ता है.
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